शराब का नशा केवल सेहत और आर्थिक नुकसान ही नहीं पहुंचाता है. समाज में अपराध का सबसे बडा कारण शराब का नशा होता जा रहा है. घरेलू अपराध में शराब का नशा सबसे बडा कारण बनता जा रहा है. शराब के नशे में छेडछाड, बलात्कार, मारपीट ही नहीं हत्या जैसे जघन्य अपराध भी होने लगे है. शराब के नशे में करीबी रिश्तों के भी कत्ल होने लगे है. उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के मोहनलालगंज में नशे के शिकार नशेडी बेटे ने बुजुर्ग पिता को पीट-पीट कर उतारा मौत के घाट उतार दिया.

मोहनलालगंज के कोराना गांव में रहने वाले 70 साल के बाबूलाल रावत अपने इकलौते बेटे रामकिशुन उर्फ कालिया व पोतो के साथ रहता था. रामकिशुन नशे का आदी था. नशे में वह घर में सभी से मार पिटाई करता था. रामकिशुन के नशे की लत के चलते पिटाई से नाराज होकर उसकी पत्नी रेखा पन्द्रह दिन पहले अपने मायके चली गयी थी. 18 जून मगंलवार की शाम पांच बजे रामकिशुन नशे में धुत होकर आया. मामूली बात पर वह अपने बङे बेटे रामकरन की डंडो से पिटाई करने लगा.

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यह देखकर रामकिशुन के पिता पोते को बचाने के लिये आये. वह लकडी काटने जा रहे थे. उनको हाथ में कुल्हाङी थी. बाबा बाबूलाल ने पोते की पिटाई का विरोध करते हुये एक कुल्हाङी बेटे रामकिशुन को मार दी जिसके बाद उसकी आंखों के पास से खून निकलने लगा. जिसके बाद आगबबूला होकर रामकिशुन ने पिता बाबूलाल की डंडो से पिटाई  शुरू कर दी. रामकिशुन ने पिता का सिर फोङने के साथ ही उनको मरणासन्न अवस्था में छोड कर मौके से भाग निकला.

बाबूलाल की खराब हालत देखकर पोता रामकरन मरणासन्न हालत में बाबा को इलाज के लिये सिसेंडी के निजी हास्पिटल ले गया. जहाँ डाक्टरो के जबाब देने पर सीएचसी मोहनलालगंज लेकर गया. वहा डाक्टरो ने बाबूलाल की हालत गम्भीर देखते हुये लखनऊ के ट्रामा सेंटर रेफर कर दिया. जहाँ डाक्टरो ने भर्ती कर इलाज भी शुरू किया लेकिन पैसे खत्म होने पर उसने डाक्टर से मिन्नते कर बाबा को डिस्चार्ज कराकर घर ले आया. देर रात एक बजे बुजुर्ग बाबूलाल ने घर पर दम तोङ दिया.

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बुद्ववार की सुबह पोते रामकरन की सूचना के बाद इस्पेक्टंर जीडी शुक्ला पुलिस फोर्स के साथ मौके पर पहुंचकर मृतक के शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिये भेजने के साथ ही आरोपी बेटे रामकिशुन को गांव के बाहर से गिरफ्तार कर लिया. इस्पेक्टंर जीडी शुक्ला ने बताया मृतक के पोते रामकरन की तहरीर पर उसके पिता रामकिशुन के विरूद्व गैर इरादन हत्या सहित अन्य धाराओ में मुकदमा दर्ज कर आरोपी को हिरासत में लेकर पुछताछ के बाद जेल भेज दिया. अगर रामकिशुन नशे का आदी नहीं होता तो वह पिता की हत्या नहीं करता और उसे जेल नहीं जाना पडता. नशे की आदत ने पूरे परिवार का तबाह कर दिया है.

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