Equality in Marriage :

क्यों पढ़ें ? - पति को परमेश्वर मानने की धारणा तेजी से बदल रही है तो सिर्फ इसलिए नहीं कि अब अधिकतर पत्नियां भी कमाऊ हो चली हैं बल्कि इसलिए भी कि कपल्स अब खुल कर जीना चाहते हैं और इस के लिए परंपराएं तोड़ भी रहे हैं हर किसी को इस बदलाव का स्वागत करना चाहिए बजाय उस में रोड़ा बनने के जो वैवाहिक जीवन का लुत्फ छीनता है. प्रस्तुत लेख में सभी पात्र व उन से की गई चर्चा वास्तविक हैं. प्रकाशन नीतियों के तहत नाम व स्थान बदल दिए गए हैं.

पतिपत्नी के रिश्ते को ले कर अकसर बहस होती रहती है कि यह कैसा होना चाहिए नए दौर के कपल्स खासतौर से पत्नियों की नजर से देखें तो यह कम से कम भक्त और भगवान सरीखा तो बिलकुल नहीं होना चाहिए यह सैनिकों जैसा हो सकता है जिस में जिंदगी की जंग में दोनों को कंधे से कंधा मिला कर हालातों का सामना करें लेकिन यह लोकतांत्रिक हो तो बात सोने पे सुहागा वाली हो जाती है.

अभिलाष से शादी तय होने के पहले ही मैं ने मम्मीपापा को बतला दिया था कि मैं उस के पैर नहीं पडूंगी...

क्यों,

उन के इस सवाल के जवाब में मैं ने भी सवाल ही दागा था कि आप ही बताइए क्यों पडूं क्या सिर्फ इसलिए कि ऐसा सदियों से चला आ रहा रिवाज है और इसीलिए मुझे इसे मानना चाहिए. इस पर उन्हें कोई सटीक या ठोस जवाब नहीं सूझा. लेकिन जाने क्यों दोनों तनिक गंभीर से हो गए थे.

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