Jharkhand Student Protest: जेपीएससी-जेएसएससी परीक्षा में गड़बड़ी के विरोध में झारखंड की राजधानी रांची में छात्रों का आंदोलन देवेंद्र नाथ महतो की अगुवाई में अपने चरम पर है. पिछले नौ दिन से आमरण अनशन करने वाले देवेंद्र नाथ महतो की हालत इतनी खराब है कि उनको कभी भी हॉस्पिटल ले जाने की जरूरत पड़ सकती है, मगर विधानसभा घेराव के आह्वान पर उन्होंने स्टेचर पर बैठ कर मार्च का नेतृत्व किया.
10 अगस्त को जब आंदोलनकारी विधानसभा के घेराव के लिए निकले तो महतो ने प्रदर्शनकारियों को अकेला नहीं छोड़ा. वे शैया से उठे, शिबू सोरेन की तस्वीर हाथ में उठाई और कुछ दूर तक आंदोलनकारियों का नेतृत्व करते हुए पैदल ही चले. इसके बाद उन्हें एम्बुलेंस में बिठाया गया, मगर थोड़ी ही देर बाद आंदोलनकारियों ने उनके स्ट्रेचर को कन्धों पर उठा लिया और आगे बढ़ चले. देवेंद्र की हिम्मत ने छात्रों में जोश भर दिया. पुलिस की तरफ से लगाईं गई कई बैरिकेटिंग वे पार कर गए. आंदोलनकारियों को रोकने के लिए पुलिस ने कई जगह कंटीले तार लगाए, मगर उन्होंने उसकी भी परवाह नहीं की. पुलिस और प्रदर्शनकारी युवाओं के बीच कई बार धक्का-मुक्की की स्थिति भी बनी, मगर छात्र संगठन के वॉलंटियर्स उन्हें नियंत्रित करने में सफल रहे.
देवेंद्र नाथ महतो ने अपनी जान पर ख़तरा उठा कर मार्च का नेतृत्व सिर्फ इसलिए किया ताकि छात्रों और पुलिस के बीच झड़प न हो जाए. मीडिया से बात करते हुए वे बोले - आज हेमंत सोरेन का जन्मदिन है, मैं नहीं चाहता कि पुलिस की तरफ से कुछ ज्यादती हो, जैसी जंतर मंतर पर हुई. मैं नहीं चाहता छात्रों को चोट पहुंचे और आंदोलन उग्र हो जाए. जन्मदिन पर वह ऐसा तोहफा न दें, जिससे खून बहे. मैं अपनी जान जोखिम में डाल कर मार्च में शामिल हुआ हूं, सिर्फ इसीलिए ताकि आंदोलन उग्र न हो. आज शिबू सोरेन ज़िंदा होते तो आंदोलनकारी छात्रों के साथ होते, जिन्होंने खुद जिंदगीभर आंदोलन किए.
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