लो जी, गलीगली घूम कर रेहड़ी पर सब्जी बेचने वाले भी  एक नई मुसीबत बन कर सामने आ रहे हैं. यानी ये सब्जी बेचने वाले कोरोना वायरस परोस रहे हैं, इसलिए जरूरी है कि सावधानी बरतें.

ये रेहड़ी वाले ज्यादा पढ़ेलिखे नहीं होते हैं, दो पैसे कमाने की खातिर गलियों के फेरे लगा कर ये अपना व अपने बच्चों का पेट पाल रहे हैं, पर कोरोना को ले कर ये ज्यादा जागरूक नहीं हैं.

ये रेहड़ी वाले सब्जी की थोक मंडी से थोक में सब्जी ला कर फुटकर में बेचते हैं. ये वहां मंडी में न जाने कितने लोगों से सब्जी लेते हैं, फिर ये सब्जी ला कर किनकिन गलियों में जाते हैं, कौनकौन ग्राहक इन से सब्जी खरीदते हैं, इन्हें खुद पता नहीं होता. आज इस गलीमहल्ले में होते हैं, तो कल किसी दूसरे महल्ले में.

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जब से साप्ताहिक बाजार लगने बंद हुए हैं, तब से नएनए रेहड़ी वाले नजर आ रहे हैं. इन के बारे में कोई सटीक जानकारी किसी के पास नहीं है.

सरकार तो बारबार अपील कर रही है कि बचाव ही बेहतर इलाज है, घर पर रहें सुरक्षित रहें, पर कोई सुने तब न.

मास्क लगाना तो दूर कहींकहीं तो सामाजिक दूरी की भी धज्जियां उड़ा दी जाती हैं. 2-4 औरतें रेहड़ी वाले को ऐसे घेरे रहती हैं कि फिर कभी सब्जी वाला आएगा ही नहीं. उसी से सब्जी थोक में ले लेती हैं.

वहीं ये सब्जी बेचने वाले भी मास्क को ठीक से नहीं पहन पा रहे, यही वजह है कि इन लोगों के जरिए कोरोना और पैर पसार रहा है.

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