आज के समय में समाज में अकेली औरतों की संख्या बढ़ती जा रही है. अकेली औरतों में कुआरियां, तलाकशुदा और विधवा महिला शामिल है. करवा चौथ वहीं महिलायें मनाती है जिनके पति होते है. कुछ क्षेत्रों में कुंवारी लड़कियां व्रत रख सकती है वह चांद को देखकर अपना व्रत तोड़ती है. तलाकशुदा और विधवाएं इस व्रत को नहीं रखती. विधवाओं के लिये तो करवाचैथ का व्रत धर्मिक रूप से मना है. हालात यह होते है कि विधवा महिलाओं को इस व्रत से दूर ही रखा जाता है. एक तरह से देखे तो यह सामाजिक ब्लैकमेल है. हर अकेली औरत के लिये यह धर्मिक अपमानजनक बात है. जैसे जैसे समाज में अकेली औरतों की संख्या बढ़ती जा रही यह हालात सामने आते जा रहे है. अकेली औरतों के सामने करवा चैथ को लेकर कई अपमानजनक हालातों का सामना करना पड़ जाता है.

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