क्रयक्षमता तथा जीवनस्तर में वृद्धि के कारण वाहनों की संख्या में वृद्धि हो रही है, जबकि सड़कों की क्षमता स्थायी बनी हुई है. एक ओर तेज गति के सभी वाहनों का तीव्र उत्पादन तो दूसरी ओर सरकारी वाहनों की सड़कों पर भरमार. सब को जल्दी है तुरंत गंतव्य स्थान पर पहुंचने की. हम ठहरना नहीं चाहते. बस, दौड़ रहे हैं, दौड़े जा रहे हैं.

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