Religious Mindset: धर्म की जड़ें दिलोदिमाग को इतने गहरे तक जकड़े हुए हैं कि विज्ञानं के इस दौर में भी लोगों का दिमाग धार्मिक निर्देशों और आदेशों की गुलामी ढोता है. खान पानं , जात पात , ऊँच नीच तो धर्म की देन हैं ही लेकिन आवास भी इससे अछूते नहीं हैं. बात छात्रों की लें तो वे पौराणिक काल में जंगलों में बने आश्रमों में रहकर पढ़ते थे और कुटियाओं में रहते थे. इस प्राक्रतिक रूम के एवज में बतौर किराया उन्हें गुरु सेवा जो गुलामी से कमतर नहीं होती थी करना पड़ती थी. ये आश्रम पौराणिक काल के हास्टल्स और पीजी थे

सत्य निकेतन में बनी तंग इमारतों के मुकाबले इन कुटियाओं में चौबीसों घंटे वेंटिलेशन की व्यवस्था होती थी क्योंकि ये लकड़ी और घास फूस की बनी होती थीं. पानी भी कुओं और नदियों से हमेशा मिलता था जिसे छात्र बर्तनों में भरकर आश्रम तक लाते थे. खाने के नाम पर उन्हें कंद मूल बगैरह मिलते थे. एवज में गुरु परिवार की सेवा उन्हें करना पड़ती थी. यही उस काल का किराया था जिसके तहत मवेशियों की सेवा और खेतो में हाड़तोड़ मेहनत भी यही छात्र करते थे. कुल जमा विद्यार्थी जीवन बड़ा कष्टप्रद था जो आज भी है. फर्क इतना भर आया है कि कष्ट भोगने के तौर तरीके बदल गए हैं. लेकिन इस मानसिकता पर कोई खास फर्क नहीं पड़ा है कि छात्र हो तो कष्ट भुगतो तभी जिंदगी में कुछ कर पाओगे

हास्टल डेज के छात्र भी कष्ट ही भुगत रहे थे जिससे सरकार को कोई सरोकार दिख नहीं रहा क्योंकि वह खुद आश्रम व्यवस्था की पैरोकार है. उसके आराध्य राम लक्ष्मण वशिष्ठ के आश्रम में कुटियाओं में रहते थे. तो इन करोडो छात्रों की क्या विसात जो अपने प्रभु के नक़्शे कदम पर न चलें. त्रेता युग में भव्य एशोआराम बाले महल राक्षसों के पास थे जिनसे देवता चिढ़ते थे सो हनुमान को भेज सोने की लंका में आग लगवा दी;. सार यह कि सनातन धर्म कष्ट प्रधान है लेकिन भक्तों के लिए और नीची जाति बालों के लिए जो त्रेतायुग से लेकर आज तक गाँव कस्बो शहरों के बाहरी हिस्से में रहने के लिए मजबूर हैं. ये बहिष्कृत, तिरस्कृत लोग पढ़ने लगे तो धर्म पर खतरा मंडराने लगा

इसलिए सरकार ने शिक्षा व्यवस्था को ही जितना हो सके ध्वस्त करने का बीड़ा उठा लिया जिससे ये पढ़ न सकें. इसके लिए जरुरी था कि हास्टल्स न बनाए जाएँ और पीजी संचालकों को मनमानी करने दी जाए. जिससे पढ़ने बाले युवा कष्ट में रहें और दूसरी तरफ सरकारी मुलाजिम सख्त नियम कानून तोड़ने देने की सहूलियत के एवज में पीजी बालों से पैसे एंठते रहें. जब न केवल सरकारी बल्कि आम लोगों की मानसिकता भी कुटिया और आश्रम बाली हो तो युवाओं को खुद पहल करते अपने लिए हास्टल्स जैसी सहूलियतें माँगना नहीं बल्कि छीनना पड़ेंगी. Religious Mindset

 

 

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