धर्म का प्रचारप्रसार करने वाले किसी आदमी से बात करें या कोई धार्मिक किताब पढ़ें तो समझ में यही आता है कि कमजोर, बूढ़ों, बच्चों और औरतों की मदद करना इंसान का सब से बड़ा धर्म है. कई लोग इसे भारत की महान संस्कृति से भी जोड़ते हैं. इस की तारीफ करते दिनरात थकते भी नहीं हैं. असल में जब मौका आता है तो भारतीय धर्म और संस्कृति का झंडा बुलंद करने वाले यही लोग कमजोर लोगों, बच्चों और औरतों को अपने पैरों के नीचे कीड़ेमकोड़ों की तरह कुचलते हुए निकल जाते हैं. मंदिरों में हुए अब तक के सभी हादसों को देखें तो पता चलता है कि ज्यादातर लोग भीड़ के पैरों तले कुचल कर ही मरते हैं. 

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