धर्म के व्यापार की होलसेल नगरी वृंदावन में महज 500 नास्तिकों के जमावड़े की खबर से राजनीतिक व धार्मिक सत्ता में खलबली मच गई. संवैधानिक अधिकारों के मुकाबले ढोंगी धार्मिक सत्ता एक बार फिर कामयाब हो गई. धर्म के दुकानदारों के दबाव और उन की गुंडागर्दी की ताकत के आगे प्रशासन द्वारा एक नास्तिक सम्मेलन को रद्द करवा दिया गया. हमेशा की तरह भगवाधारियों की भीड़ आयोजन स्थल पर हिंसा और तोड़फोड़ पर उतारू हो गई. आयोजकों के खिलाफ नारेबाजी हुई, पुतले फूंके गए और पत्थरबाजी कर तोड़फोड़ की गई.

कार्यक्रम रद्द होने के बावजूद देशदुनिया के नास्तिकों का संदेश सब तक पहुंच ही गया कि आस्था किस कदर बहस और तार्किकता से डरती है. वृंदावन के परिक्रमा मार्ग स्थित श्री बिंदु सेवा संस्थान के मुखिया स्वामी बालेंदु ने 14 व 15 अक्तूबर को

2 दिवसीय नास्तिकों का सम्मेलन बुलाया था. सम्मेलन में 18 राज्यों से लोग वृंदावन पहुंचने लगे थे. इन में ज्यादातर, महाराष्ट्र, कर्नाटक, पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, दिल्ली के लेखक, पत्रकार, कलाकार, प्रोफैसर, डाक्टर, इंजीनियर, विद्यार्थी और कौर्पोरेट्स भी शामिल थे. कार्यक्रम से 2 दिन पहले प्राइम न्यूज चैनल पर ‘आस्तिक बनाम नास्तिक’ नाम के एक कार्यक्रम में स्वामी बालेंदु और धर्माचार्यों के बीच जबरदस्त बहस हुई. पर तर्क के आगे धर्माचार्य टिक नहीं पाए और बहस के दौरान झूठा शोरशराबा करते रहे. स्वामी बालेंदु का बोलना बंद करवाने की कोशिश में जुटे रहे.

अगले दिन कार्यक्रम की पूर्व संध्या पर आयोजनकर्ताओं ने प्रैस कौन्फ्रैंस कर आयोजन की जानकारी दी. नास्तिक सम्मेलन की बात जब मीडिया में फैली तो विश्व हिंदू परिषद, बजरंग दल, धर्म रक्षा संघ व स्थानीय धार्मिक संगठनों के नेता मथुरा जिला प्रशासन को ज्ञापन देने पहुंच गए. मांग की गई कि यह कार्यक्रम न होने दिया जाए.

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