धर्म के व्यापार की होलसेल नगरी वृंदावन में महज 500 नास्तिकों के जमावड़े की खबर से राजनीतिक व धार्मिक सत्ता में खलबली मच गई. संवैधानिक अधिकारों के मुकाबले ढोंगी धार्मिक सत्ता एक बार फिर कामयाब हो गई. धर्म के दुकानदारों के दबाव और उन की गुंडागर्दी की ताकत के आगे प्रशासन द्वारा एक नास्तिक सम्मेलन को रद्द करवा दिया गया. हमेशा की तरह भगवाधारियों की भीड़ आयोजन स्थल पर हिंसा और तोड़फोड़ पर उतारू हो गई. आयोजकों के खिलाफ नारेबाजी हुई, पुतले फूंके गए और पत्थरबाजी कर तोड़फोड़ की गई.

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