Sexual Health: ऐसी परेशानी बहुत से पुरुषों के जीवन में किसी न किसी समय आती है, लेकिन शर्म या झिझक की वजह से लोग इस के बारे में खुल कर बात नहीं कर पाते. इस का असर केवल शरीर पर नहीं, बल्कि आत्मविश्वास, मानसिक स्थिति और वैवाहिक रिश्ते पर भी पड़ने लगता है. सब से पहले यह सम झना जरूरी है कि शारीरिक कमजोरी का मतलब हमेशा कोई गंभीर बीमारी या पुरुषत्व की कमी नहीं होती. कई बार लगातार तनाव, नींद की कमी, काम का दबाव, चिंता, बढ़ती उम्र, अनियमित दिनचर्या, धूम्रपान, शराब, डायबिटीज, हाई ब्लडप्रैशर या हार्मोन संबंधी बदलाव भी इस की वजह बन सकते हैं.
जब इंसान इस विषय को मन में दबा कर रखता है तब डर और असफलता की चिंता और बढ़ने लगती है. धीरेधीरे व्यक्ति हर बार पहले से ज्यादा तनाव महसूस करने लगता है. यही तनाव समस्या को और बढ़ा सकता है. इसलिए खुद को दोष देने या चुपचाप चिंता करते रहने के बजाय इसे एक सामान्य स्वास्थ्य समस्या की तरह देखना ज्यादा सही होगा.
किसी अच्छे फिजीशियन, यूरोलौजिस्ट या सैक्स हैल्थ विशेषज्ञ से शांत मन से मिलें. डाक्टर जरूरत पड़ने पर कुछ सामान्य जांच कर सकते हैं, ताकि कमजोरी की असली वजह सम झी जा सके. इंटरनैट पर मिलने वाली बिना सलाह की दवाओं, तेलों या तुरंत ताकत के दावों से बचना जरूरी है, क्योंकि कई चीजें नुकसान भी पहुंचा सकती हैं.
साथ ही, अपनी दिनचर्या पर भी ध्यान दीजिए. पर्याप्त नींद, नियमित हलका व्यायाम, संतुलित भोजन, तनाव कम करना और पत्नी के साथ खुला व सहज संवाद कई बार बहुत फर्क लाता है. अकसर पुरुष यह मान लेते हैं कि उन्हें हर समय पूरी तरह परफैक्ट होना चाहिए, लेकिन वास्तविक रिश्ते केवल शारीरिक प्रदर्शन पर नहीं टिके होते. भरोसा, अपनापन और मानसिक सहजता भी उतनी ही महत्त्वपूर्ण होती है.
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