सवाल

रिटायर आदमी हूं, अकेले मेरा वक्त नहीं कटता है.मैं अपने 2 बेटों, बहुओं और उन के बच्चों के साथ रहता हूं. पत्नी की मृत्यु 2 साल पहले हो गई थी. दोनों बेटे सुबह औफिस जाते हैं, शाम 7.30 तक आते हैं. बहुएं घरबाहर के काम में बिजी रहती हैं. मैं 6 महीने पहले रिटायर हुआ हूं. पहले वक्त औफिस में कट जाता था पर अब वक्त जैसे कटता ही नहीं है. कुछ पढ़ते हुए समय गुजारने की कोशिश करूं तो आंखों पर जोर पड़ने लगता है. पोतेपोती अपनी पढ़ाई और कोचिंग में तो कभी मोबाइल के साथ लगे रहते हैं. मन हर समय बेचैन रहता है. क्या करूं, समझ नहीं आता?

जवाब

अपने अकेलेपन को दूर करने के लिए आप का अपने कंफर्ट जोन से बाहर निकलना बेहद जरूरी है. आप घर में दिनभर बोर होते रहते हैं और ऐसा कोई काम नहीं करते जिस से आप में ऊर्जा का प्रवाह हो, मनोरंजन हो या अच्छा महसूस हो. इस व्यस्त जीवन में यदि आप अपने परिवार से उम्मीद लगाएंगे कि वे आप को समय दें तो यह आप का उन से अत्यधिक अपेक्षा रखना होगा.आप किसी वृद्ध ग्रुप को जौइन करने के बारे में क्यों नहीं सोचते. आजकल सीनियर सिटीजन के ऐसे कई ग्रुप्स हैं जो विभिन्न ऐक्टिविटीज द्वारा अपना मनोरंजन करते हैं और सेहत का ध्यान भी रखते हैं. आप वहां अपने हमउम्र लोगों से मिलेंगे तो आप को अच्छा लगेगा.आप को यदि अपनी मनपसंद किताबें या पत्रिकाएं पढ़ने में तकलीफ होती है तो आप उन की औडियो क्लिप्स सुन लिया कीजिए. हर समय तटस्थ होने के बजाय आप स्मार्टफोन का थोड़ाबहुत उपयोग करना शुरू कर दीजिए.सोशल मीडिया से न केवल आप का थोड़ाबहुत मन लग जाएगा बल्कि आप के पास अपने पोतेपोतियों से बात करने के लिए कुछ नया भी होगा.आप के अकेलेपन का उपाय आप का अपटूडेट न होना ही है. दुख और चिंता में डूबे रहने से आप खुश कैसे रहेंगे. अब तो औफिस भी नहीं है तो इस खाली समय का भरपूर आनंद लीजिए.

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