उत्तराखंड के मुख्यमंत्री को हटा कर भाजपा ने अपने नेताओं को संदेश देने का काम किया है कि हर विद्रोह को दबाया जाएगा. कांग्रेस की तरह अब भाजपा में भी विद्रोही स्वरों को दबाने के लिए पार्टी नेताओं पर हाईकमान के फैसले थोपे जाने की शुरुआत हो गई है. उत्तराखंड में भाजपा नेताओं के बीच विद्रोह का प्रभाव अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव पर न पड़े, इस के लिए पार्टी हाईकमान ने स्थानीय नेताओं की राय जाने बिना अपने फैसले से नया मुख्यमंत्री चुना. स्थानीय नेताओं के गुस्से को दबाने के लिए ऐसा फार्मूला 80 के दशक में कांग्रेस में अपनाया जाता था, जिस में कांग्रेस हाईकमान ताश के ‘पत्तों की तरह’ मुख्यमंत्रियों को बदलता था. वर्ष 1982 में श्रीपति मिश्रा अचानक उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री बनाए गए थे. वे भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के नेता थे. इस के पहले वे विधानसभा अध्यक्ष भी थे.

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