Indian Economy: महंगाई अभी और बढ़ेगी. हालत तो यह है कि आम लोगों का मंथली बजट बेहद गड़बड़ा गया है जिस की जिम्मेदार सीधेसीधे सरकार ही है जो लोगों को तो किफायत की नसीहत दे रही है लेकिन खुद की फुजूलखर्ची कम नहीं कर रही. क्रूड औयल के बढ़े दाम तो उसे एक खूबसूरत बहाना मिल गया है. अब अगर महंगाई बढ़ ही गई है तो इस से बचने के उपाय भी खुद ही करने पड़ेंगे. सरकार से कोई उम्मीद रखना भैंस के आगे बीन बजाने जैसी बात है.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वक्त रहते ही आम जनता को आगाह कर दिया था कि उसे क्या नहीं और क्या खरीदना है. कहां अपनी गाढ़ी कमाई खर्च करना है और कहां नहीं करना है. इस के बाद वे 5 देशों की यात्रा के लिए फुर्र हो गए थे. जिस पर देश की जनता हैरान रह गई थी कि पैट्रोल व डीजल बचाने की और विदेश यात्राएं न करने की जिम्मेदारी हमारी ही है. प्रधानमंत्री की नसीहतों की कथनी और करनी में हमेशा की तरह जमीनआसमान का फर्क है. जमीन हमारे लिए और आसमान उन के लिए है.
इस दोहरेपन का जितने तरीकों से हो सकता था, खूब मजाक बना था. लेकिन यह महज तात्कालिक खी झ थी. कोई कुछ कर नहीं सकता था सिवा बेबसी से यह देखने कि दूध, पैट्रोल, डीजल, गैस सिलैंडर, ग्रौसरी, दवाएं और रोजमर्रा में इस्तेमाल होने वाले दीगर आइटमों के बढ़ते दामों के सामने अपना घरखर्च कैसे मैनेज करना है. हर किसी को सोशल मीडिया पर प्रवाहित होने वाला यह स्लोगन, झूठी ही सही, तसल्ली दे रहा था कि ‘याद रखिए, हमें सरकार से नहीं, महंगाई से लड़ना है.’
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