एक शूर्पनखा थी लेकिन वैसी कुरूप और वीभत्स नहीं थी जैसी कि भक्तों के दिलोदिमाग में बैठा दी गई है बल्कि वह एक निहायत ही खूबसूरत स्त्री थी. शूर्पनखा की नाक कटने का प्रसंग हर कोई जानता है कि उसे लक्ष्मण ने काटा था. शूर्पनखा एक स्वतंत्र माहौल में पली बढ़ी युवती थी. राक्षस कुल में आर्यों जैसी बन्दिशें औरतों पर नहीं थीं और न ही वे ब्राह्मणों और ऋषि मुनियों के इशारे पर नाचने वाली जाति के थे. उनमें व्यक्तिगत स्वतन्त्रता का बड़ा महत्व था ठीक वैसा ही जैसा आज यूरोप के लोगों में दिखता है. बहरहाल शूर्पनखा वनवासी भाइयों राम और लक्ष्मण पर रीझ गई और उसने बेहद विनम्रता से उनसे प्रणय निवेदन कर डाला.

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