बौलीवुड की ही तरह राजनीति में भी कोई स्थायी दोस्त व दुश्मन नहीं होता. इसी के चलते महाराष्ट्र राज्य में राजनीतिक समीकरण हर घंटे बदलते हुए नजर आ रहे हैं. यूं तो इस बार ‘महाराष्ट्र राज्य’ का विधानसभा चुनाव भारतीय जनता पार्टी और शिवसेना दोनों ने मिलकर लड़ा था. 24 अक्टूबर को जब चुनाव के परिणाम आए, तो महाराष्ट्र की जनता ने भारतीय जनता पार्टी और शिवसेना के गठबंधन को 161 सीटों (भारतीय जनता पार्टी 105 और शिवसेना 56) के साथ पूर्ण बहुमत भी दे दिया. मगर आज लगभग 18 दिन हो गए हैं, पुरानी सरकार का कार्यकाल भी नौ नवंबर को खत्म हो गया. मगर अब तक महाराष्ट्र में सरकार का गठन नहीं हो पाया है.

वास्तव में चुनाव परिणाम वाले दिन से ही शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे ने मुख्यमंत्री पद पर शिवसेना का दावा ठोंकना शुरू कर दिया था. तो वहीं भारतीय जनता पार्टी के निवर्तमान मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने ऐलान कर दिया था कि मुख्यमंत्री तो भारतीय जनता पार्टी का होगा और वही मुख्यमंत्री होगे. उस दिन से दोनों राजनीतिक दल एक दूसरे पर राजनीतिक दबाव बनाने के लिए कई तरह के हथकंडे अपनाते रहे. शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे के घर मातोश्री के सामने बड़ा पोस्टर लग गया कि ‘‘आदित्य ठाकरे को मुख्यमंत्री बनाया जाए. ज्ञातव्य है कि उद्धव ठाकरे के बेटे है आदित्य ठाकरे, जो कि पहली बार वरली सीट से चुनाव जीतकर विधायक बने हैं.

पर आठ नवंबर को मुख्यमंत्री पद से देवेंद्र फड़नवीस के त्यागपत्र के साथ ही लगभग यह तय हो गया था कि अब भारतीय जनता पार्टी महाराष्ट्र में सरकार नही बनाने जा रही है. मगर डरकर शिवसेना ने अपने चुने हुए विधायकों को मुंबई में ही मड आयलैंड के होटल ‘‘रिट्रीट’’ में एक साथ बंधक सा बनाकर रख दिया. तो वहीं कांग्रेस ने अपने सभी चुने हुए विधायकों को जयपुर के होटल में भेज दिया.

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