अयोध्या के राम मंदिर पर फैसला भले ही दिल्ली में सुप्रीम कोर्ट से सुनाया जाना था पर इसमें गांवगांव तक रहने वालो के कान लगे थे. एक रात पहले से ही लोगों के दिलों में तमाम आशंकायें घर कर गई थी. चिन्ता की लकीरों का आलम यह था कि दूर दराज के बाजार और सड़को पर सन्नाटा सुबह से ही परस गया था. हर कोई यह सुनने को बेचैन था कि फैसला क्या असर डालेगा ? जैसे जैसे सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने लगा जनता को राहत महसूस होने लगी.

देश का सबसे बड़ा और सबसे पुराना जमीन का विवाद पर सबसे बड़ी अदालत का फैसला समाज में गंगा जमुनी तहजीब को बढ़ावा देने वाला रहा है. अयोध्या राममंदिर विवाद का फैसला देते समय सुप्रीम कोर्ट ने विवादित जगह भारत सरकार को देते हुए कहा है कि वह 3 माह में ट्रस्ट बनाकर मंदिर निर्माण को दिशा दे. मंदिर निर्माण के साथ कोर्ट ने मस्जिद बनाने के लिये भी 5 एकड़ जमीन देने का निर्णय दिया है. सुप्रीम कोर्ट के फैसले का देश की बहुसंख्यक जनता ने स्वागत किया है. सुप्रीम कोर्ट में बाबरी मस्जिद पक्ष के वादी इकबाल अंसारी ने कहा ‘यह फैसला अहम मुददा था. कोर्ट ने जो फैसला दिया है उसका स्वागत है. वह हम स्वीकार करते है. अब सरकार पर निर्भर है कि वह हमें कहा जमीन देती है.’

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सुन्नी वक्फ बोर्ड के वकील जफरयाब जिलानी कहते हैं कि सुन्नी बोर्ड इस फैसले से संतुष्ट नहीं है. यह फैसला विरोधाभासी है. इस पर पुर्नविचार करना चाहिए. हम कोर्ट के फैसले का पूरा अध्ययन करके अगला कदम उठायेगे.’ दूसरी तरफ हिन्दू महासभा ने फैसले को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने विविधता में एकता का संदेश दिया है. देश की जनता ने 5 जजों की संविधान पीठ प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई, एसए बोबडे, डीवाई चन्द्रचूड, अशोक भूषण और एस अब्दुल नजीर के फैसले का स्वागत किया है. सुप्रीम कोर्ट ने अपना फैसला सुनाते समय इस बात का खास ख्याल रखा कि इसका सार्थक संदेश जनता में जाये. जिससे देश में सौहार्द का वातावरण बना रहे.

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