Veer Savarkar: सावरकर के grandnephew हैं सत्यकी सावरकर. वह राहुल गांधी के खिलाफ पुणे के MP/MLA स्पेशल कोर्ट में मानहानि केस लड़ रहे हैं क्योंकि राहुल ने लंदन में कहा था कि सावरकर ने अपनी किताब में मुसलमान को पीटने को आनंददायक बताया था. इसी केस में 18 अगस्त 2025 को राहुल गांधी के वकील मिलिंद पवार ने उनसे क्रॉस सवाल पूछा- क्या नाथूराम गोडसे और गोपाल गोडसे RSS के सक्रिय कार्यकर्ता थे? सत्यकी सावरकर ने कोर्ट में जो कहा उससे आरएसएस का झूठ उजागर हो गया और उसका 77 साल पुराना नेरेटिव एक झटके में धाराशाई हो गया.
सत्यकी सावरकर ने कोर्ट में कहा- “गोपाल गोडसे उनके नाना है, नाथूराम गोडसे उनके नाना के भाई है यानी ग्रैंड-अंकल हैं. यह सच है कि गोपाल गोडसे और नाथूराम गोडसे आरएसएस के सक्रिय सदस्य थे और नाथूराम हिंदू महासभा के भी कार्यकर्ता थे. सत्यकी सावरकर का यह ऑन रिकॉर्ड बयान जुडिसियल मजिस्ट्रेशट अमोल शिंदे के सामने हुआ है”
1948 में गांधी हत्या के बाद से RSS कहता रहा है कि नाथूराम गोडसे ने हत्या से बहुत पहले ही RSS छोड़ दिया था और नाथूराम गोडसे ने खुद ट्रायल में यह लाइन ली थी कि उसने आरएसएस की प्रेरणा से नहीं बल्कि अपनी अंतरात्मा की आवाज सुनकर हिंदुओं के अधिकारों के लिए गांधी की हत्या की थी. इतिहासकार धीरेंद्र झा अपनी किताब “Gandhi's Assassin” में लिखते हैं कि गोडसे के महासभा ज्वाइन करने की कोई तारीख, कोई दस्तावेज आज तक नहीं मिला.
इसी विवाद के बीच सरदार पटेल का वह खत भी फिर चर्चा में है जो उन्होंने 11 सितंबर 1948 को गोलवलकर को लिखा था कि गांधी की हत्या के बाद RSS के लोगों ने मिठाई बांटी और खुशी मनाई थी.
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