Gen Z In Children Par: अजीब बात है. जब मैं चिल्ड्रन था तो चिल्ड्रन पार्क नहीं थे और अब जो चिल्ड्रन पार्क हैं तो वहां चिल्ड्रन नहीं हैं. अब तो चिल्ड्रन पार्क में मौमडैड के चिल्ड्रनों के बदले आवारा कुत्तों के साथ पालतू कुत्ते खेलते रहते हैं, धूप सेंकते रहते हैं. जैसे वह चिल्ड्रन पार्क न हो कर सर्व जात समभाव पार्क हो.
बड़े दिनों बाद किसी को प्यार से बतियाते सुना तो उन में जिज्ञासा जगी. मेरे घर में अब कोई किसी के साथ नहीं बतियाता. जब भी कोई बतियाता है तो केवल अपने फोन से ही बतियाता है. मेरे घर में अब कोई किसी के साथ नहीं हंसियाता. हंसियाता तो बस, अपने फोन के साथ ही हंसियाता है. इसलिए आजकल घर में जितने सदस्य हैं, घर में उस से एकदो मोबाइल स्टैंडबाई रहते हैं. क्या पता किस का मोबाइल कब खराब हो जाए? क्या पता किस फैमिली मैंबर को जोक सुनाने की इमरजैंसी पड़ जाए. क्या पता किस के फोन की बैटरी कब जैसे जवाब दे जाए. बंदे की बैटरी जवाब दे जाए तो चलेगा, पर फोन की बैटरी जवाब दे गई तो समझो लाइफ में कुहराम मच गया. बंदे के सारे फ्यूज उड़ गए.
आज हम उस दौर में जी रहे हैं कि हमारा दिमाग खराब हो जाए तो हो जाए, हमारा फोन खराब नहीं होना चाहिए. आज हम उस दौर में जी रहे हैं कि हमारा जिगर खराब हो जाए तो हो जाए, हमारे फोन की मैमोरी खराब नहीं होनी चाहिए. आज हम उस दौर में जी रहे हैं कि हमारी किडनियां खराब हो जाएं तो हो जाएं, हमारे फोन की बैटरी खराब नहीं होनी चाहिए.
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