सत्रहवीं लोकसभा समर में,  सत्ता की चाहत के साथ 19 माह से राहुल गांधी बड़ी बेताबी से प्रयासशील थे. यह सच है कि राहुल गांधी कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं जिस कांग्रेस का प्राचीन और 134 साल का समृद्ध इतिहास है. और जिस पर महात्मा गांधी का सर्वाधिक प्रभाव और छाया है. महात्मा जी साध्य और साधन के शुचिता की बात करते थे और जीवन में उसे उतारा भी,  इस एक मात्र सूत्र का मर्म अगर राहुल गांधी समझते तो कांग्रेस का उद्धार हो जाता. आज यह हालात नही होते.

मगर ऐसा प्रतीत होता है राहुल गांधी स्वयं और हर एक कांग्रेस मैन यह मानता है कि पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी जैसे, इंदिरा इज इंडिया और इंडिया इज इंदिरा मानी जाती थी "राहुल ही कांग्रेस हैं, कांग्रेस का मतलब ही सिर्फ राहुल है ! "

मगर ऐसा है नहीं, यह 17 वीं लोकसभा चुनाव परिणाम से आईने की भांति स्पष्ट हो गया है. अब हताश निराश राहुल गांधी ने इस्तीफा देने की पेशकश की है यह मामला देश दुनिया में चर्चा का बयास बना हुआ है. कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी की इस "नौटंकी" को कांग्रेस और देश हित में आपको समझना होगा. दरअसल कांग्रेस आजकल यह मानकर चलती है कि वह गांधी परिवार के बगैर शून्य है और सत्ता का स्वर्ग प्राप्त नहीं कर सकती. और चाहती है उसके नेता गांधी परिवार की कोई विभूती हो, मगर अब वह जादुई नेतृत्व, व्यक्तित्व कांग्रेस के पास नहीं है. परिणाम स्वरूप कांग्रेस 'रूग्ढ' हो चली है, यह बूढी कांग्रेस अब धीरे-धीरे चल रही है, ठिठक रही है, गिर रही है. और इसे भरपूर  औक्सीजन चाहिए .

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