गोरखपुर और फूलपुर लोकसभा उपचुनाव में मिली करारी हार के बाद भाजपा को सपाबसपा की दोस्ती किसी भी तरह से हजम नहीं हो रही है. भाजपा को अखिलेश यादव और मायावती के बीच दोस्ती की उम्मीद नहीं लग रही थी, पर उन दोनों नेताओं ने जिस तरह से बहुत सारे विवादों को किनारे कर के दोस्ती का हाथ आगे बढ़ाया है, वह भाजपा के लिए खतरे की घंटी है.   साल 2019 के लोकसभा चुनाव की नजर से उत्तर प्रदेश सब से अहम राज्य है. पिछले लोकसभा चुनाव में भाजपा और उस के सहयोगी दलों को वहां की कुल 80 सीटों में से 72 सीटें मिली थीं.

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