सत्यापन ऐसी सरकारी कार्यवाही है जिस से गुंडों, मवालियों और बदमाशों से ज्यादा शरीफ लोग कांपते हैं, क्योंकि यह नेककाम पुलिस वालों के करकमलों द्वारा संपन्न होता है. सत्यापन की एक और खूबी इस का बिना दक्षिणा के न होना है और  अगर दक्षिणा मुंहमांगी दी जाए तो घोर बेईमान आदमी भी हरिश्चंद्र और सत्यवान होने का प्रमाणपत्र हासिल कर सकता है.

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