हरेक की जिंदगी में एक दौर ऐसा आ ही जाता है जब वह इस देश में पैदा होने पर कोसने से खुद को रोक नहीं पाता. ऐसा ही कुछ मद्रास हाईकोर्ट के जज सी एस करनन के साथ हुआ जिन्होंने खुद अपने तबादले पर स्थगन आदेश लगा कर हैरानी फैला दी थी. तबादला करने वाले जजों के खिलाफ आग उगलते करनन का कहना था कि चूंकि वे पिछड़ी जाति के हैं, इसलिए उन्हें तंग किया जा रहा है. इतना ही नहीं, उन्होंने अपने साथ हुई ज्यादती के खिलाफ एससीएसटी ऐक्ट के तहत एफआईआर दर्ज कराने की भी धौंस दी थी.

लेकिन हफ्ता पूरा भी नहीं गुजरा था कि इन जज साहब को ज्ञान प्राप्त हो गया कि कैसे वे ओबीसी के हो कर एससीएसटी ऐक्ट के तहत एफआईआर दर्ज कराएंगे. इसलिए उन की शर्मिंदगी दूर हो गई और वे मान बैठे कि चूंकि वे हफ्तेभर के लिए कुंठित हो गए थे, इसलिए ऐसा कुछ बोल गए थे. अच्छा है कि शर्मिंदगी के ये दोनों अध्याय जल्द और बिना किसी बड़े विवाद के समाप्त हो गए.

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