इस बार पूरे देश समेत मध्य प्रदेश में भी दलित संत रविदास की जयंती धूमधाम से सरकारी तौर पर मनाई गई, तो भारतीय जनता पार्टी की इस चाल का कांग्रेस कोई सटीक जवाब नहीं दे पाई. दलित समुदाय के लोग सड़कों पर जयकारे लगाते और झूमतेगाते नजर आए. दलित वोट बैंक को लुभाने के लिए अब भगवा खेमे ने हमेशा की तरह तय कर लिया है कि इन के देवीदेवता और संत अलग कर दिए जाएं, जिस से ये उन के पूजापाठ में रमे रहें. इस से सवर्ण भी खुश हैं कि चलो अबये लोग राम, शिव और विष्णु के मंदिरों में आ कर मंदिर को अपवित्र नहीं करेंगे और दानदक्षिणा के फेर में भी पड़े रहेंगे. रविदास या अंबेडकर जयंती धूमधाम से मनाने से दलितों का क्या भला होगा, यह न कोई पूछ रहा है, न कोई सोच रहा है.

आगे की कहानी पढ़ने के लिए सब्सक्राइब करें

सरिता डिजिटल

डिजिटल प्लान

USD4USD2
1 महीना (डिजिटल)
  • 5000 से ज्यादा फैमिली और रोमांस की कहानियां
  • 2000 से ज्यादा क्राइम स्टोरीज
  • 300 से ज्यादा ऑडियो स्टोरीज
  • 50 से ज्यादा नई कहानियां हर महीने
  • एक्सेस ऑफ ई-मैगजीन
  • हेल्थ और ब्यूटी से जुड़ी सभी लेटेस्ट अपडेट
  • समाज और राजनीति से जुड़ी समसामयिक खबरें
सब्सक्राइब करें

डिजिटल प्लान

USD48USD10
12 महीने (डिजिटल)
  • 5000 से ज्यादा फैमिली और रोमांस की कहानियां
  • 2000 से ज्यादा क्राइम स्टोरीज
  • 300 से ज्यादा ऑडियो स्टोरीज
  • 50 से ज्यादा नई कहानियां हर महीने
  • एक्सेस ऑफ ई-मैगजीन
  • हेल्थ और ब्यूटी से जुड़ी सभी लेटेस्ट अपडेट
  • समाज और राजनीति से जुड़ी समसामयिक खबरें
सब्सक्राइब करें

प्रिंट + डिजिटल प्लान

USD100USD79
12 महीने (24 प्रिंट मैगजीन+डिजिटल)
  • 5000 से ज्यादा फैमिली और रोमांस की कहानियां
  • 2000 से ज्यादा क्राइम स्टोरीज
  • 300 से ज्यादा ऑडियो स्टोरीज
  • 50 से ज्यादा नई कहानियां हर महीने
  • एक्सेस ऑफ ई-मैगजीन
  • हेल्थ और ब्यूटी से जुड़ी सभी लेटेस्ट अपडेट
  • समाज और राजनीति से जुड़ी समसामयिक खबरें
सब्सक्राइब करें
और कहानियां पढ़ने के लिए क्लिक करें...