विधानसभा चुनावों से पहले बहुजन समाजव पार्टी सुप्रीमो मायावती ने जिस अहंकार के साथ कांग्रेस के साथ गठबंधन को ठुकरा दिया था, चुनाव नतीजों के बाद वह पस्त नजर आने लगी हैं. मायावती की शुरू में मध्यप्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ में कांग्रेस के साथ गठबंधन की बातचीत चल रही थी पर बाद में उन्होंने मध्यप्रदेश और राजस्थान में अकेले चुनाव लड़ने का ऐलान कर दिया तथा छत्तीसगढ़ में अजित जोगी की जनता कांग्रेस जोगी के साथ गठबंधन कर लिया.

मायावती चुनाव से पहले कांग्रेस से नाराज थीं. उन्होंने प्रेस कांफ्रेंस कर कांग्रेस पर हमला बोला औैर गठबंधन न होने का ठीकरा दिग्विजय सिंह पर फोड़ा. उन्होंने कहा था कि कांग्रेस भाजपा से ज्यादा गैरभाजपा दलों को कमजोर करने में लगी रहती है.

मायावती के इस कदम को भाजपा के खिलाफ महागठबंधन के प्रयासों में रोड़ा मान लिया गया, लेकिन इन चुनाव नतीतों ने मायावती के गरूर को तोड़ा है और फिर से विपक्षी दलों को भाजपा के खिलाफ महागठबंधन की नई राह खुल गई है.

चुनाव नतीजों के बाद मायावती बिना मांगे कांग्रेस को समर्थन देने का ऐलान करते हुए कहा कि उन की पार्टी ने भाजपा को सत्ता से दूर रखने के लिए चुनाव लड़ा था इसलिए कांग्रेस की सरकार बनाने के लिए उसे मध्यप्रदेश और राजस्थान में समर्थन देने का फैसला किया है.

मध्यप्रदेश और राजस्थान में कांग्रेस सामान्य बहुमत से 2-2 सीटें दूर रह गई. मध्यप्रदेश में कांग्रेस को 114 सीटें मिली हैं. उसे बहुमत के लिए 116 सीटों की जरूरत हैं. उधर राजस्थान में भी कांग्रेस को 99 सीटें प्राप्त हुईं और बहुमत के लिए 101 सीटें चाहिए.

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