Mamata Banerjee Detained: 10 अक्टूबर को दिल्ली में SIR और चुनावी धांधली के खिलाफ हो रहे प्रदर्शन के बीच पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और तृणमूल कांग्रेस के कई नेताओं को पुलिस ने हिरासत में ले लिया. चुनाव आयोग के प्रमुख ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर हो रहे इस प्रोटेस्ट में ममता बनर्जी का शामिल होना अपने आप में एक बड़ा राजनीतिक संदेश था क्योंकि अगर SIR और चुनाव आयोग की वोट चोरी की कोई सबसे बड़ी विक्टिम है तो वह ममता बनर्जी ही हैं. सवाल यह है कि लोकतंत्र में विरोध की आवाज को सुनने के बजाय उसे हिरासत में लेने की जरूरत ही क्यों पड़ रही है?

बंगाल में SIR का जो गंदा खेल हुआ है, उसने लोकतंत्र की सारी मर्यादाएं तोड़ दी. बंगाल में SIR के नाम पर मुस्लिम, दलित और ग्रामीण इलाकों के वोटरों के लाखों असली वोटरों के नाम काटे गए. दूसरी तरफ बीजेपी के इशारे पर हजारों फर्जी वोट एक-एक घर में जोड़ दिए गए. इसी वोट चोरी के कारण TMC को नुकसान झेलना पड़ा. इस सुनियोजित हार के बाद 20 सांसदों ने भी ममता का साथ छोड़ दिया. ममता बनर्जी की यह हार जनता की वजह से नहीं, बल्कि ज्ञानेश कुमार के चुनाव आयोग की मेहरबानी से हुई.

दरअसल बीजेपी बंगाल में जनता के बीच जाकर ममता को कभी नहीं हरा पाती इसलिए बीजेपी ने चुनाव आयोग के कंधे पर बंदूक रखकर यह गेम खेला. 2021 में जब बंगाल की जनता ने ‘खेला होबे’ कहकर बीजेपी को 77 सीटों पर समेट दिया था तभी से बीजेपी ने बदला लेने की कसम खा ली थी. पहले ईडी, सीबीआई से TMC नेताओं को तोड़ने की कोशिश की और जब बात नहीं बनी तो सीधे वोट ही चोरी कर लिए.

आज जब ममता बनर्जी खुद दिल्ली के इस प्रोटेस्ट में शामिल होने आईं तो अमित शाह की पुलिस ने उन्हें भी नहीं बख्शा और हिरासत में ले लिया. एक महिला और वह भी पूर्व मुख्यमंत्री के साथ ऐसा सलूक करना बीजेपी की महिला विरोधी और बंगाल विरोधी मानसिकता ही है. भाजपा बंगाल से इतना डरती है कि उसे ममता बनर्जी के दिल्ली आने से भी डर लग रहा है लेकिन बीजेपी यह भूल रही है कि ममता बनर्जी वो नेता हैं जो सिंगूर-नंदीग्राम में लाठियां खाकर भी नहीं झुकीं. Mamata Banerjee Detained

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