Gold Digger Girls: लड़की को लड़के का पैसा नहीं देखना चाहिए, उस का दिल देखना चाहिए.’ शादी या डेटिंग के समय आप ने यह बात न जाने कितनी बार सुनी होगी. अकसर जब कोई लड़की अपने होने वाले पति की नौकरी, कमाई, घर, सेविंग्स या आर्थिक स्थिति के बारे में सवाल करती है तो तुरंत उसे एक गोल्ड डिगर होने का टैग दे दिया जाता है.
लेकिन अगर कोई लड़की यह जानना चाहती है कि उस का होने वाला पति आर्थिक रूप से कितना स्थिर है, उस की नौकरी कितनी सुरक्षित है, उस पर कितना कर्ज है और वह भविष्य को ले कर कितना जिम्मेदार है, तो क्या उसे गोल्ड डिगर कहना सही होगा?
अखिर गोल्ड डिगर होने में बुराई क्या है. दरअसल, शादी सिर्फ 2 लोगों के प्यार से नहीं होती. शादी के साथ घर का किराया, ईएमआई, बच्चों की पढ़ाई, मैडिकल खर्च, मातापिता की जिम्मेदारी, अचानक आने वाले खर्च और कई बार कैरियर से जुड़े फैसले भी सोचनेसमझने जरूरी होते हैं. इन सब के बीच सिर्फ यह कहना कि ‘प्यार है न, सब ठीक हो जाएगा’ तो आगे जा कर दिक्कतें ही होंगी.
प्यार जरूरी है, लेकिन सिर्फ प्यार से बिजली का बिल नहीं भरता, अस्पताल का खर्च नहीं निकलता और बच्चे की फीस भी जमा नहीं होती. इसलिए अगर कोई लड़की अपने से ज्यादा आर्थिक रूप से स्थिर पुरुष को जीवनसाथी के रूप में चुनना चाहती है, तो इस में शर्म की बात नहीं है.
गोल्ड डिगर शब्द में नैगेटिविटी
मान लीजिए एक लड़का शादी के लिए ऐसी लड़की चाहता है जो खूबसूरत हो, पढ़ीलिखी हो, समझदार हो, परिवार संभाल सके और उस के साथ सामाजिक रूप से अच्छी लगे. समाज आमतौर पर इसे ‘उस की पसंद’ कहता है. लेकिन अगर लड़की कहती है कि उसे ऐसा लड़का चाहिए जिस की आमदनी अच्छी हो, नौकरी स्थिर हो और जो आर्थिक रूप से जिम्मेदार हो, तो उसे कहा जाता है ‘पैसे के पीछे भाग रही है.’ यह डबल स्टैंडर्ड क्यों?
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