Nepal Violence: नेपाल में सावन की बोलबम-कांवड़ यात्रा के दौरान शुरू हुआ एक मामूली विवाद जिस तरह सांप्रदायिक हिंसा में बदल गया और अंततः तीन लोगों की जान चली गई और सैकड़ों घायल हुए, वह केवल कानून-व्यवस्था की विफलता की कहानी नहीं है. यह दक्षिण एशिया में धार्मिक जुलूसों के बदलते चरित्र पर भी गंभीर सवाल खड़ा करता है.
आस्था जब निजी और सामूहिक श्रद्धा से आगे बढ़कर सड़क पर शक्ति प्रदर्शन, तेज आवाज, उग्र नारों और समुदायों के बीच टकराव का माध्यम बनने लगे, तब धर्म की मूल भावना पीछे छूट जाती है और उसकी जगह पहचान की राजनीति लेने लगती है. यही कुछ सावन शुरू होने के साथ नेपाल में हुआ.
नेपाल के सुनसरी जिले के देवानगंज ग्रामीण नगरपालिका क्षेत्र के कप्तानगंज में 26 जुलाई की रात बोलबम यात्रा के दौरान विवाद शुरू हुआ. पुलिस के मुताबिक कांवड़ियों का एक समूह लाउडस्पीकर पर तेज संगीत बजाता हुआ कोशी बैराज से जल लेकर लौट रहा था. समय था रात का कोई साढ़े दस-ग्यारह बजे का, जब पूरी दुनिया नींद के आगोश में होती है. ऐसे में तेज आवाज में लाउडस्पीकर पर गाना बजाने को लेकर लोगों ने आपत्ति की.
मगर कांवड़िये कहां मानने वाले थे. लगे सड़क पर तांडव मचाने. यानी चोरी भी, सीनाजोरी भी. देखते ही देखते हिंसक झड़प शुरू हो गई. हालात इतने बिगड़े कि सुरक्षा बलों को पहले आंसू गैस छोड़नी पड़े और उसके बाद गोली चलानी पड़ी. गोलीबारी में तीन लोगों की मौत हो गई.
इसके बाद मामला कप्तानगंज तक सीमित नहीं रहा. तनाव सुनसरी के दूसरे हिस्सों और बाद में मधेश प्रदेश तक फैल गया. मकानों, दुकानों, वाहनों और दूसरी संपत्तियों को कांवड़ियों ने नुकसान पहुंचाया. दुसरे समुदाय ने भी इसका भरपूर जवाब दिया. .
आगे की कहानी पढ़ने के लिए सब्सक्राइब करें
डिजिटल
सरिता सब्सक्रिप्शन से जुड़ेें और पाएं
- सरिता मैगजीन का सारा कंटेंट
- देश विदेश के राजनैतिक मुद्दे
- 7000 से ज्यादा कहानियां
- समाजिक समस्याओं पर चोट करते लेख
डिजिटल + 24 प्रिंट मैगजीन
सरिता सब्सक्रिप्शन से जुड़ेें और पाएं
- सरिता मैगजीन का सारा कंटेंट
- देश विदेश के राजनैतिक मुद्दे
- 7000 से ज्यादा कहानियां
- समाजिक समस्याओं पर चोट करते लेख
- 24 प्रिंट मैगजीन





