Gen Z mindset: जंतरमंतर पर नीट पेपर लीक को ले कर जेनजी द्वारा जो भी प्रोटैस्ट या हंगामा हुआ उस में जेनजी के जीवन के जीने के कई तरीके और बहुत से किरदार सामने आए, जिन में से एक है उन का बेफिक्र जिंदादिल व स्वतंत्र विचारों वाला मनमौजी किरदार, जिसे न मिलेनियल लोगों की तरह सरकार का डर है और न ही जेल जाने का.
यहां तक तो सही है, लेकिन बात तब बिगड़ जाती है जब ये युवा अपने भविष्य के साथ खुद ही खिलवाड़ करने लगते हैं, जैसे आकाश का बीटैक अभी हाल ही में कंप्लीट हुआ और उसे एक अच्छी कंपनी से जौब का औफर आया. लेकिन उस ने इस जौब को करने से इसलिए इनकार कर दिया क्योंकि वह उस के घर से डेढ़ घंटे की दूरी पर है. उसे लगता है कि इतनी दूर कौन ट्रैवल करेगा.
डेढ़ घंटे के ट्रैवल की वजह से जौब ठुकरा देना आज के जेनजी युवाओं की मानसिकता को दिखाता है.
नौकरी कभी कैरियर नहीं, घर चलने का जरिया थी
पहले बहुत सारे बच्चे होते थे. 8-8 बच्चों को पालना आसान नहीं था. घर के बड़े बच्चे अपने पिता के साथ कम उम्र में ही घर की जिम्मेदारी ले लेते थे और घर से कई घंटों दूर ट्रैवल कर के भी काम पर जाते थे.
पेरैंट्स का सपोर्ट बड़ी वजह
आज के कई जेनजी युवाओं को पता है कि अगर वे 6 महीने या 1 साल बेरोजगार भी बैठ जाएं, तो उन के सिर से छत नहीं छिनेगी और न ही खाना बंद होगा. यही प्रिविलेज उन्हें अवसर ठुकराने की हिम्मत देता है. पेरैंट्स उन्हें खुद कहते हैं कि अभी से काम की क्या जरूरत है, अभी आराम से पढ़ाई करो, मजे करो, काम तो पूरी उम्र करना ही है. लेकिन इस वजह से धीरेधीरे उन्हें बैठ कर खाने की आदत लग जाती है.
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