Sheikh Hasina Return: बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने दिसंबर में स्वदेश लौटकर अदालत में आत्मसमर्पण करने की घोषणा की है. यह फैसला सिर्फ उनकी व्यक्तिगत वापसी नहीं, बल्कि बांग्लादेश के लोकतंत्र, न्याय व्यवस्था और राजनीतिक परिपक्वता की भी बड़ी परीक्षा है. जिस नेता ने सबसे लंबे समय तक देश की सत्ता संभाली, वही आज अपने देश में मृत्युदंड की सजा का सामना कर रही हैं और उनकी पार्टी अवामी लीग पर प्रतिबंध लगा हुआ है.
पाकिस्तान और बांग्लादेश को धार्मिक कट्टरता से क्या मिला? दोनों देशों में तानाशाही भी चली और एक एक करके कितने ही नेताओं को उनके द्वारा मार दिया गया जिन्होंने फिर सत्ता पर कब्जा कर लिया. मुगलिया इतिहास इन दोनों देशों में बार बार दोहराया जा रहा है. अगर लोकतंत्र अपनाया जाता और धर्म को मस्जिदों में ही रहने दिया जाता तो जनता भी खुश रहती और नेता भी.
रॉयटर्स को दिए साक्षात्कार में शेख हसीना ने साफ कहा कि वह हर जोखिम उठाने को तैयार हैं. उन्हें पता है कि गिरफ्तारी हो सकती है, जान का खतरा भी है, लेकिन वह यह देखना चाहती हैं कि मौजूदा सरकार अपने सबसे बड़े राजनीतिक विरोधी के साथ कैसा व्यवहार करती है. उनका संदेश साफ है - अगर लोकतंत्र जिंदा है तो न्याय भी निष्पक्ष होना चाहिए. वे खुद कभी न लोकतांत्रिक रहीं न उन्होंने न्याय की चिंता की.
2024 में बांग्लादेश में उग्र छात्र आंदोलन के बाद हसीना की सरकार सत्ता से बाहर हो गई थी और हसीना को रातोंरात वहां से भागना पड़ा था. वे भारत आ गईं. बाद में बांग्लादेश में हसीना के खिलाफ कई मुकदमे दर्ज हुए. उनकी अनुपस्थिति में उन्हें मृत्युदंड सुनाया गया. बांग्लादेश की सत्ता अब तारिक रहमान के हाथ में है. उनकी पार्टी बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी हसीना की धुर विरोधी रही है.
आगे की कहानी पढ़ने के लिए सब्सक्राइब करें
डिजिटल
सरिता सब्सक्रिप्शन से जुड़ेें और पाएं
- सरिता मैगजीन का सारा कंटेंट
- देश विदेश के राजनैतिक मुद्दे
- 7000 से ज्यादा कहानियां
- समाजिक समस्याओं पर चोट करते लेख
डिजिटल + 24 प्रिंट मैगजीन
सरिता सब्सक्रिप्शन से जुड़ेें और पाएं
- सरिता मैगजीन का सारा कंटेंट
- देश विदेश के राजनैतिक मुद्दे
- 7000 से ज्यादा कहानियां
- समाजिक समस्याओं पर चोट करते लेख
- 24 प्रिंट मैगजीन





