अफगानिस्तान के खिलाफ पाकिस्तान लगातार ‘प्रोपगेंडा वार’ चला रहा है, और भारत, जो इस क्षेत्र और विश्व की बड़ी ताकतों में से एक है, आतंकी गुटों का समर्थन करने के लिए पाकिस्तान को दुनिया में अलग-थलग करने की कोशिशों में लगा है. वाकई इन आतंकी गुटों ने इस पूरे इलाके को दोजख बना रखा है.

अफगान हुक्मरान लगातार पाकिस्तान से यह गुजारिश करते रहे हैं कि वह हक्कानी नेटवर्क, तालिबान और आईएस जैसे वहशी गुटों का साथ देना बंद करे. मगर वह इसे अनसुना करता रहा है. ऐसा लगता है कि इस्लामाबाद की मंशा इनका खाद-पानी बंद करने की है ही नहीं, अलबत्ता वह अपने पड़ोसी मुल्कों के साथ आरोप-प्रत्यारोप और ‘प्रोपगेंडा वार’ में उलझा हुआ है. यह नीति पाकिस्तान की सेहत के लिए ठीक नहीं. दुष्प्रचार ऐसा कि उसने अपने यहां भी जंगी माहौल बना रखा है.

इस काम में उसकी फौज के आला अधिकारी जुटे हुए हैं, जो सोशल, प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया पर बेसिर-पैर की खबरें परोस रहे हैं, ताकि अवाम को झांसा दिया जा सके और उनके बीच अपनी बिगड़ती छवि दुरुस्त की जा सके. इस ‘प्रोपगेंडा’ पर फौज अच्छी-खासी रकम खर्च कर रही है. अवाम को बताया जा रहा है कि पाकिस्तान पर हमला किया जा सकता है.

पाकिस्तानी मीडिया ने ऐसी रिपोर्ट भी दिखाई है कि ईरान के चाबहार के रास्ते भारत अपनी फौज अफगानिस्तान भेजेगा, और अफगान व भारतीय खुफिया एजेंसियों ने पाकिस्तान के खिलाफ आपस में साझेदारी कर ली है. हालांकि ये तमाम खबरें झूठी हैं. पाकिस्तानी सेना अपनी जम्हूरी हुकूमत और बाशिंदों को गुमराह कर सकती है, मगर अनुभवी मुल्कों को बेवकूफ नहीं बना सकती. अब अमेरिका भी यह मानने लगा है कि इस्लामाबाद ने दहशतगर्दों का बखूबी इस्तेमाल किया है.

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