America Time Capsule: टाइम कैप्सूल एक विशेष प्रकार का सुरक्षित और सीलबंद कंटेनर होता है, जिसमें वर्तमान समय की महत्वपूर्ण वस्तुएं, तस्वीरें, दस्तावेज और तकनीक को सुरक्षित रखा जाता है. इसका मुख्य उद्देश्य भविष्य की पीढ़ियों (सदियों या हजारों साल बाद) तक अपने युग की संस्कृति, इतिहास और जीवनशैली की जानकारी पहुंचाना होता है. दुनिया के अनेक देश कई महत्वपूर्ण अवसरों पर उस समय की जानकारियों से भरा टाइम कैप्सूल दफनाते रहे हैं. हाल ही में अमेरिका ने भी एक टाइम कैप्सूल आने वाली पीढ़ियों को अमेरिका की आज की स्थिति बताने के लिए दफनाया है.

भारत में भी कई महत्वपूर्ण मौकों पर टाइम कैप्सूल दफ़नाए गए. इनका मुख्य उद्देश्य भविष्य की पीढ़ियों या इतिहासकारों के लिए आज के दौर के इतिहास, तकनीक और संस्कृति को सुरक्षित रखना था. कुछ की चर्चा करते चलें -

1. लाल किला, दिल्ली (कालपात्र - 1973)

यह भारत के इतिहास का सबसे चर्चित और विवादित टाइम कैप्सूल है. 15 अगस्त 1973 को तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने आजादी के 25 साल पूरे होने के मौके पर लाल किले के बाहर एक टाइम कैप्सूल दफनाया था, जिसे ''कालपात्र' नाम दिया गया. इसे 1000 साल बाद खोले जाने के लिए डिज़ाइन किया गया था, मगर विपक्ष को खुजली शुरू हो गई. विपक्ष ने आरोप लगाया कि इसमें केवल नेहरू-गांधी परिवार के इतिहास और उपलब्धियों को बढ़ा-चढ़ाकर संरक्षित किया गया है. 1977 में जब जनता पार्टी की सरकार आई तो प्रधानमंत्री मोरारजी देसाई के आदेश पर इसे जमीन से वापस खोदकर निकाल लिया गया.

2. लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी, पंजाब (2019)

जनवरी 2019 में 106वीं 'भारतीय विज्ञान कांग्रेस' के दौरान पंजाब की एलपीयू यूनिवर्सिटी में एक टाइम कैप्सूल 10 फीट की गहराई में दफनाया गया. इसे दो नोबेल पुरस्कार विजेताओं - अब्राहम हेर्शको और डंकन हाल्डेन की मौजूदगी में दबाया गया था. इस टाइम कैप्सूल में आज के दौर की 100 तकनीकी चीजें रखी गई हैं, जैसे - स्मार्टफोन, लैंडलाइन फोन, लैपटॉप, वीआर ग्लासेज, अमेज़न एलेक्सा, ड्रोन, इंडक्शन कुकटॉप, एयर फ्रायर और मार्स मिशन (मंगलयान) व तेजस फाइटर जेट के रेप्लिका. इसे 3 जनवरी 2119 यानी ठीक 100 साल बाद खोला जाएगा.

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