गोरख पांडे की इस कविता “राजा बोला रात है, रानी बोली रात है, यह सुबह सुबह की बात है” की प्रासंगिकता ऐसे समय के लिए फिट बैठती है जब लोगों को सिर्फ भेड़ बकरियों की तरह हंकवाया जाता है. जो ऊपर से कहा जाता है उसे ही अंतिम सत्य मान लिया जाता है. फिर उन सवालों की एहमियत ख़त्म कर दी जाती है जिनका जवाब जानने का सभी को पूरा हक है.

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