Governance Issues : ब्यूरोक्रेसी का भी अपना एक प्रोटोकॉल होता है. प्रदेश का मुख्य सचिव मुख्यमंत्री के प्रति जवाबदेह होता है. ऐसे में जब प्रधानमंत्री सीधे प्रदेश के मुख्य सचिवों से रूबरू हो कर उन मीटिंग लेते हैं, उन्हें दिशा-निर्देश देते हैं तो इस से मुख्यमंत्री की सीमाओं का हनन होता है.
नई दिल्ली के मंडपम सभागार में 26-28 दिसंबर 2025 को 5वीं मुख्य सचिवों की तीन दिवसीय नेशनल कांफ्रेंस का आयोजन किया गया. इसकी अध्यक्षता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने की. इसमें सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के चीफ सेक्रेटरी, सीनियर अधिकारी, पॉलिसी बनाने वाले और डोमेन एक्सपर्ट मौजूद थे.
प्रधानमंत्री कार्यालय के अनुसार मुख्य सचिवों की 5वीं कॉन्फ्रेंस की मेन थीम ‘विकसित भारत के लिए मानव पूंजी’ था. इस कार्यक्रम का मकसद प्रधानमंत्री के कोऑपरेटिव फेडरलिज्म के विजन पर आधारित, स्ट्रक्चर्ड और लगातार बातचीत के जरिए केंद्र-राज्य के समन्वय को मजबूत करना है. यह कान्फ्रेंस एक ऐसे फोरम की तरह काम करती है जहां केंद्र और राज्य दोनों मिलकर काम करते हैं.
इसके जरिए देश की मानव पूंजी को ज्यादा से ज्यादा प्रयोग करने, मजबूत बनाने, भविष्य के लिए तैयार करने के लिए एक यूनिफाइड रोडमैप बनाते हैं.
मुख्य सचिवों के साथ प्रधानमंत्री की इस बातचीत का मकसद देश को अपनी आबादी को सिर्फ डेमोग्राफिक डिविडेंड के तौर पर देखने से आगे ले जाना है. इसके बजाय ‘एजुकेशन सिस्टम को मजबूत करने, स्किल्स को आगे बढ़ाने और देश भर में भविष्य में रोजगार के मौके पैदा करने के लिए पक्की स्ट्रेटेजी बनाकर नागरिकों को तैयार करना है.
इसके लिए पांच जरूरी क्षेत्रों पर खास जोर दिया जाएगा. इसमें बचपन की शिक्षा, स्कूलिंग, स्किलिंग, हायर एजुकेशन, और स्पोर्ट्स और एक्स्ट्रा करिकुलर एक्टिविटीज शामिल है. राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए बेस्ट प्रैक्टिस और एक्शनेबल स्ट्रैटेजी पर डिटेल में चर्चा की गई. इसके अलावा मुख्य रिफार्म और ग्रोथ-ओरिएंटेड सब्जेक्ट पर छह स्पेशल सेशन शेड्यूल किए गए थे. जिनमें राज्यों में डीरेगुलेशनय गवर्नेंस में टेक्नोलौजी मौके, रिस्क और मिटिगेशनय स्मार्ट सप्लाई चेन और मार्केट लिंकेज के लिए एग्रीस्टैकय एक राज्य, एक वर्ल्ड क्लास टूरिस्ट डेस्टिनेशनय और आत्मनिर्भर भारत प्लान शामिल थे.
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