Vote Theft Allegations: शुरुआत हुई थी चंदा चोरी से. पीएम केयर के नाम पर देश से हजारों करोड़ वसूले गए लेकिन आज तक उसका ऑडिट नहीं हुआ. फिर इलेक्टोरल बॉन्ड लेकर आए जिसे सुप्रीम कोर्ट ने रद्द कर दिया क्योंकि यह दुनिया का सबसे बड़ा घोटाला साबित हुआ था. ईडी और सीबीआई का छापा पड़ता था और अगले ही दिन उसी कंपनी का करोड़ों का चंदा बीजेपी के खाते में जाता था. यह सरकारी वसूली का नया तरीका था जिसमें इलेक्टोरल बॉन्ड के नाम पर ईडी और सीबीआई जैसी संवैधानिक संस्थाओं का इस्तेमाल कर कंपनियों से वसूली की गई थी. यह कनपटी पर तमंचा रखकर की गई वसूली नहीं तो और क्या थी? राम मंदिर के नाम पर भी चंदा और जमीन घोटाले सामने आए. व्यापारियों को जीएसटी के नाम पर लूटा गया और उस पैसे से विज्ञापन और विधायक खरीदे गए.
जब चंदा चोरी से पेट नहीं भरा तो वोट चोरी शुरू कर दी क्योंकि चंदा चोरी से सरकार चलती है और वोट चोरी से सरकार बचती है. बीजेपी को समझ आ गया था कि महंगाई, बेरोजगारी और पेपर लीक के बाद जनता वोट नहीं देगी इसलिए 2023 के बाद चुनाव आयोग को पूरी तरह से कब्जे में ले लिया गया. ज्ञानेश कुमार जैसे अफसर को बैठाकर SIR के नाम पर विपक्ष के वोट काटने का खेल शुरू हुआ. पूरे देश में मुसलमान और दलित बस्तियों के करोड़ों वोट काट दिए गए.
चुनाव आयोग और बीजेपी सरकार यह गठजोड़ वाकई कमाल का रहा है. इलेक्टोरल बॉन्ड से वसूली और चंदा चोरी से जो पैसा आया, उससे विधायक खरीदने में ख़र्च किया गया, मीडिया खरीदी गई. वोट चोरी से चुनाव जीते गये और फिर सत्ता में आकर और बड़ी चंदा चोरी की गई. बीजेपी की 12 साल की उपलब्धि यही रही है. असल में तो वोट चोरी और चंदा चोरी एक ही सिक्के के दो पहलू हैं इसीलिए आज जंतर-मंतर पर जो लड़ाई है, वो सिर्फ वोट बचाने की नहीं, देश बचाने की लड़ाई है. जब तक इस चोरी के इकोसिस्टम को नहीं तोड़ा जाएगा तब तक न लोकतंत्र बचेगा और न देश.
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