Meerut Farmers Protest: 10 अक्टूबर को भारतीय किसान यूनियन के किसानों ने मेरठ कमिश्नरी के पास लगे सरकारी बैरियर तोड़ डाला और काशी टोल प्लाजा पर किसानों और पुलिस के बीच हाई-वोल्टेज ड्रामा जारी है. पुलिस लाठियां भांज रही है, आंसू गैस छोड़ रही है लेकिन किसान पीछे हटने को तैयार नहीं है.

जो काम अंग्रेजों ने नहीं किया, जो इंदिरा गांधी ने इमरजेंसी में भी नहीं किया, वो आज की विश्वगुरु सरकार कर रही है. अंग्रेजों ने किसानों से लगान जरूर लिया था लेकिन उनके वोट चोरी नहीं किए थे. इंदिरा गांधी ने भी इमरजेंसी लगाई थी लेकिन किसानों को दिल्ली आने से इस तरह नहीं रोका था. आज बीजेपी सरकार ने सारी हदें पार कर दी हैं.

किसानों ने जगह-जगह बैरियर तोड़ डाले हैं. ये बैरियर सिर्फ लोहे के नहीं, ये उस तानाशाही के बैरियर हैं जो बीजेपी ने जनता और दिल्ली के बीच खड़े किए हैं. दिल्ली कूच के लिए निकला किसान अब पीछे लौटने को तैयार नहीं है. सरकार ने सोचा था कि एक दिन के प्रोटेस्ट को रोककर, जंतर-मंतर की परमिशन न देकर, 1000 लोगों को हिरासत में लेकर आंदोलन को कुचल देगी लेकिन उसने गलती कर दी. एक दिन के प्रोटेस्ट को रोकने के चक्कर में सरकार ने देश कि जनता से लंबी लड़ाई शुरू कर दी है.

भाजपा को याद रखना चाहिए कि यह वही किसान है जिसने 13 महीने तक दिल्ली के बॉर्डर पर बैठकर तीन काले कृषि कानून वापस करवाए थे. यह वही किसान है जो वोट चोरी को सबसे अच्छे से समझता है क्योंकि उसकी फसल की MSP भी वैसे ही चोरी हो रही है जैसे उसका वोट चोरी हो रहा है. जब किसान और जवान दोनों ही सरकार के खिलाफ सड़क पर आ जाएंगे तो सरकार के ये बैरियर और ये वर्दी वाले कॉकरोच भी उसे बचा नहीं पाएंगे. साफ है कि आज मेरठ और काशी में बैरियर टूटा है, कल पूरे देश में सत्ता का घमंड टूटेगा. Meerut Farmers Protest

और कहानियां पढ़ने के लिए क्लिक करें...