Green White Dwarf Star: 16 अक्टूबर को खगोलविदों ने जो देखा है, वो धर्म के लिए एक और परेशान करने वाली खबर है. एक हरा-सफेद बौना तारा और उसके पास ही एक सैल्मन-गुलाबी तारा, पहली बार देखा गया. धर्म हमेशा से कहता आया है कि तारों को ईश्वर ने रोशनी के लिए बनाया लेकिन विज्ञान ने इस बात को गलत साबित किया है.
सफेद बौना तारा एक मरे हुये तारे का बचा हुआ कोर होता है. हमारा सूरज भी एक दिन मरेगा, अपना ईंधन खत्म करेगा और सिकुड़ कर पृथ्वी के आकार का सफ़ेद बौना तारा रह जाएगा. अब सवाल यह है कि अब तक हमें सफेद, हल्के नीले, हल्के पीले बौने तारे ही मिले थे लेकिन हरा तारा क्यों नहीं मिला था? क्योंकि हरा रंग आंखों का धोखा है.
तारों का रंग उसके तापमान से तय होता है. गर्म तारा नीला नजर आता है और ठंडा तारा लाल दिखाई पड़ता है. हरा रंग बीच में कहीं होता है. हमारी आंखें हरे और नीले-लाल के मिश्रण को सफेद देख लेती हैं इसलिए अब तक हरा तारा बनना लगभग असंभव माना जाता था.
साइंटिस्टों का अनुमान है कि इस बौने हरे तारे के वातावरण में ऑक्सीजन, कार्बन और आयरन की एक अजीब परत है. जब उसका प्रकाश उस परत से निकला तो कुछ तो सोख ली गईं लेकिन कुछ बच गईं. बची हुई तरंगों का मिश्रण हमारी आंख को हरा-सफेद दिखाई दिया. बगल का दूसरा सैल्मन-गुलाबी वाला तारा भी वही है. इस गुलाबी तारे में हाइड्रोजन और हीलियम का ऐसा खेल चल रहा है कि यह तारा गुलाबी दिख रहा है.
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