देश भर के लोग पितृपक्ष के चलते इन दिनों अपने पूर्वजों को श्रद्धापूर्वक याद कर रहे हैं. सुबह से ही पत्तल में खीर, पूरी हलवा बगैरह रखकर कोवो, गायों और ब्राह्मणों को खिलाया जा रहा है. जिनके पूर्वज ज्यादा जमीन जायदाद छोड़ गए हैं उनकी थाली में पकवान ज्यादा नजर आते हैं. जाहिर है खेल विरासत का है जो जितना ज्यादा छोड़ गया है उसे उसी अनुपात में वशंज याद करते दान दक्षिणा दे रहे हैं.

भाजपा को विरासत में राममन्दिर आंदोलन मिला था जिसके चलते आज वह सत्ता में है और इसी के चलते नरेन्द्र मोदी प्रधानमन्त्री हैं. 80 के दशक में राममन्दिर आंदोलन पके फल की तरह भाजपा की झोली में आ गिरा था, टपकाने बाले थे विश्व हिन्दू परिषद के मुखिया अशोक सिंघल. जिनके प्रति नरेन्द्र मोदी ने कृतज्ञता ज्ञापित करते बड़ा सा लेख देश के चुनिंदा अख़बारों में छपवाया है. इस लेख में मंदिर आंदोलन की कम अशोक सिंघल के व्यक्तिगत जीवन दर्शन और तथाकथित त्याग, तपस्या से ताल्लुक रखती बातें और प्रसंग ज्यादा हैं.

तो अशोक सिंघल को याद करने की इकलौती बड़ी वजह यही है कि उन्होंने साल 1984 में राममन्दिर आंदोलन की रणनीति बनाई थी. इस खास काम के लिए उन्हें खासतौर से आरएसएस ने वीएचपी में शिफ्ट किया था. अशोक सिंघल संपन्न गुजराती बनिया परिवार से थे जिसका जिक्र मोदी ने अपने लेख में किया भी है. बस एक बात जो वे नहीं लिख पाए वह यह थी कि मैं आज प्रधानमन्त्री हूँ तो उसकी वजह अशोक सिंघल हैं.नहीं तो मैं बडनगर रेलवे स्टेशन पर चाय ही बेचता ही रह जाता. जिन्होंने ऐसी आग हिन्दुओं के दिलोदिमाग में लगाई कि लोग पगला उठे थे. जमकर हिंसा हुई थी और उससे भी ज्यादा जमकर मंदिर निर्माण के नाम पर चंदा हुआ था. अशोक सिंघल की लिखी स्क्रिप्ट राजनीति के भगवा परदे पर साकार हुई तो 2014 में गोधरा कांड के हीरो नरेन्द्र मोदी प्रधानमन्त्री बने. जिन्होंने अपना वादा निभाते 2019 में हिन्दुओं को उनका ड्रीम टेम्पल दिलवा भी दिया जो इन दिनों चढ़ावा चोरी के कारण सुर्ख़ियों में है

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