आपने चर्चित वेब सीरीज सेक्रेड गेम्स तो देखी होगी. सेक्रेड गेम्स के पहले सीजन में गायतोंडे की भूमिका निभा रहे अभिनेता नवाजुद्दीन सिद्दकी सैफ अली खान से कहता है कि सब मरेंगे केवल त्रिवेदी ही बचेगा. बहुत ही चर्चित डौयलाग था. लगता है कांग्रेस के साथ भी कुछ ऐसा ही होने जा रहा है. कांग्रेस के तमाम बड़े नेता जांच एजेंसियों के रडार पर हैं. पहले ईडी और सीबीआई ने पूर्व गृहमंत्री पी चिदंबरम को गिरफ्तार किया. पूरे देश ने देखा होगा कि कैसे चिदंबरम को गिरफ्तार किया गया. 24 घंटे के नाटक के बाद सीबीआई के अधिकारी उनके घर की दीवार लांघ कर अंदर दाखिल हुए और फिर चिदंबरम को गिरफ्तार किया गया.

चिदंबरम की पेशी ही चल रही थी कि कांग्रेस का एक और बड़ा नेता जांच एजेंसियों के रडार पर आ गया. इस नेता का नाम है डीके शिवकुमार. कांग्रेस के वरिष्ठ नेता डीके शिवकुमार को मनी लौन्ड्रिंग के मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने मंगलवार को गिरफ्तार कर लिया. ईडी ने चार दिन तक उनसे पूछताछ की उसके बाद उनको गिरफ्तार कर लिया. उनकी गिरफ्तारी के बाद कांग्रेस पार्टी में हलचल मच गई. आनन-फानन में कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला का ट्वीट आया. इसके बाद सुरजेवाला की मीडिया पर प्रतिक्रिया भी आई. कांग्रेस कह रही है कि सरकार बदले की भावना से काम कर रही है. राष्ट्रीय मुद्दों से ध्यान भटकाना चाहती है.

अब आपके लिए ये जानना बहुत जरूरी है कि आखिरकार डीके शिवकुमार कौन हैं. क्यों कांग्रेस इनकी गिरफ्तारी से इतनी ज्यादा हमलावर हो गई.

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कौन हैं डीके शिवकुमार

डीके शिवकुमार कांग्रेस के वरिष्ठ नेता तो है कि इसके अलावा उनको कांग्रेस का संकट मोचक भी कहा जाता है. कर्नाटक में इन्होंने एचडी कुमारस्वामी को फ्लोर टेस्ट पास करवाया था. इसके बाद दोबारा भी काफी प्रयास किए लेकिन सरकार बचाने में सफल नहीं हो पाए. बताया जाता है कि जब भी सरकार पर कोई संकट आता था तो कांग्रेसी नेताओं को इन्ही के आलीशान रिसौर्ट में ठहराया जाता था. खास बात ये है कि रिसौर्ट राजनीति का जनक भी इन्हीं को कहा जाता है. जिसका पालन हल पार्टी कर रही है.

कुछ महीने पहले आपने कर्नाटक का सियासी नाटक बाखूबी देखा होगा. यहां पर बागी विधायकों को मनाने और कांग्रेस-जेडीएस का गठबंधन टूटने से बचाने की जिम्मेदारी भी इन्हीं के कंधों पर सौंपी गई थी. रिसौर्ट राजनीति के जनक इस नेता ने अपने सभी विधायकों को अपने ही रिसौर्ट में ठहरवा दिया. तमाम कोशिशों को ग्रहण लग गया और भाजपा इस खेल में बाजी मार गई और कर्नाटक भाजपा के अध्यक्ष बीएस येदियुरप्पा चौथी बार मुख्यमंत्री बन गए. हालांकि येदियुरप्पा पर भी ग्रहण लगा हुआ है. वो आज तक कभी भी अपना पांच साल का कार्यकाल पूरा नहीं कर पाए.

ऐसा पहली बार नहीं हो रहा था कि जब डीकेएस का रिसौर्ट कांग्रेस के लिए रक्षा कवच बना है. 2002 में जब महाराष्ट्र में विलासराव देशमुख की सरकार पर खतरा आया तब वहां के विधायकों को कांग्रेस शासित कर्नाटक भेज दिया गया था. ये विधायक कर्नाटक के शहरी विकास मंत्री डीके शिवकुमार के रिसौर्ट में रुके थे और विलासराव देशमुख की सरकार बच गई थी. इस बार फिर से डीकेएस का ईगलटन रिसौर्ट कांग्रेस के लिए लकी साबित हुआ. कांग्रेस के सभी विधायकों को यहीं रखा गया था. जब विधायकों को बस से हैदराबाद ले जाया गया तो उस बस में सबसे आगे डीकेएस खुद बैठे थे.

खास बात तो यह है कि इस नेता के बारे में कहा जाता है कि ये बेहद चतुर और तेज बुद्धि वाला नेता है. डीकेएस के पास करोड़ों की संपत्ति है. 2019 के हलफनामे में डीके शिवकुमार ने अपने पास 70 करोड़ की चल संपत्ति और 548 करोड़ की अचल संपत्ति की जानकारी दी थी. जबकि इसके पहले 2013 में उनके पास 46 करोड़ की चल संपत्ति और 169 करोड़ की अचल संपत्ति थी. 2019 में दी गई जानकारी के मुताबिक डीके शिवकुमार के परिवार के ऊपर 220 करोड़ की देनदारी है. इसमें उनकी बेटी ऐश्वर्या के ऊपर 46 करोड़ की देनदारी है जबकि उनके पास 107 करोड़ की संपत्ति है.

डीकेएस का नाम राजनीतिक गलियारों पर तब जाना जाने लगा जब उन्होंने निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर चुनाव पर लड़ा और इतिहास भी रचा. वोक्कालिगा समुदाय के मजबूत दावेदार देवेगौड़ा हार गए. फिर दस साल बाद, शिवकुमार ने विधानसभा में देवेगौड़ा के बेटे एचडी कुमारस्वामी को हराया था.

उस समय की सबसे बड़ी राजनीतिक हलचल मचाते हुए उन्होंने 2004 के लोकसभा चुनाव में कनकपुरा लोकसभा सीट से अनुभवहीन तेजस्विनी को खड़ा कराकर देवगौड़ा को मात दी. लेकिन इसके बाद भी जब पार्टी ने जेडीएस और देवगौड़ा परिवार से हाथ मिलाकर कर्नाटक में गठबंधन सरकार बनाने का फैसला किया तो उन्होंने एक अनुशासित कार्यकर्ता की तरह पार्टी के फैसले को स्वीकार कर लिया.

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