उत्तर प्रदेश की योगी सरकार बारबार इस बात का दावा करती थी कि उनके कार्यकाल में प्रदेश में एक भी दंगा नहीं हुआ. नागरिकता संशोधन कानून यानि सीएए का विरोध करते प्रदर्शनकारी अचानक फसाद पर उतर आये. फसाद भी ऐसा कि वह दंगा बन गया. जिस प्रदर्शन का उददेश्य नागरिकता संशोधन कानून का विरोध था वह साम्प्रदायिक दंगे की तरह उभरा और ‘लखनवी संस्कृति’ का कत्ल कर बैठी. जब दंगे का गुबार छंटा तो लोग यह समझ ही नहीं पा रहे थे कि यह उनके लखनऊ के लोग थे. लखनऊ ‘पहले आप’ की संस्कृति वाला शहर माना जाता है. नागरिकता संशोधन कानून विरोधी फसाद के बाद कैसे कह सकेगे ‘मुस्कराये कि आप लखनऊ में है‘. राजनीति को ऐसे दंगों से मजबूती मिलती है. पक्ष और विपक्ष को दोनों को लाभ मिल सकता है पर लखनवी तहजीब का जो नुकसान हुआ है उसकी जगह नहीं भरेगी.

Tags:
COMMENT