Substance Abuse Awareness :

जब किसी दोस्त को नशे की गिरफ्त में जाते देखते हैं तो सब से पहले झटका, गुस्सा और बेबसी महसूस होती है. समझ नहीं आता कि उसे डांटें, दूरी बना लें या मदद करें. लेकिन सच यह है कि ऐसे समय में सही प्रतिक्रिया बहुत मायने रखती है. धैर्य, समझ और सही मार्गदर्शन से ही हम अपने दोस्त को इस खतरनाक लत से बाहर आने में मदद कर सकते हैं.

अक्षत का दोस्त मिथुन महीनों बाद जब उसे मार्केट में दिखा तो उसे देख कर वह हैरान रह गया. उसे लगा जैसे वह अपने दोस्त को नहीं, किसी और ही इंसान को देख रहा है. उस का वजन बहुत कम हो गया था, बातों में भी उस की लड़खड़ाहट थी. ठीक से वह ध्यान भी केंद्रित नहीं कर पा रहा था. जब उस ने उस से हाथ मिलाया तो पाया कि उस का हाथ कांप रहा है और उस की पकड़ कमजोर थी.

“और बता, सब बढ़िया तो है?” अक्षत ने मिथुन का चेहरा पढ़ते हुए कहा.

“सब बढ़िया. तू बता, तेरा क्या चल रहा है?” मिथुन की बातों में लड़खड़ाहट थी. सीधे खड़े भी नहीं हो पा रहा था वह ठीक से, “चल, मिलते हैं फिर” बोल कर वह जाने के लिए मुड़ा ही कि लड़खड़ा कर वहीं जमीन पर गिर पड़ा.

उसे यों जमीन पर बेहोश होते देख अक्षत स्तब्ध रह गया!

“अरे, मिथुन, मिथुन, क्या हुआ तुझे?” वह उसे हिलाते हुए बोला. तब तक सड़क पर आतेजाते लोगों की भीड़ लग गई और सब ‘क्या हुआ, क्या हुआ’ करने लगे. तभी वहां खड़े लोगों में से किसी ने 108 नंबर पर फोन कर दिया तो कुछ ही मिनटों में एम्बुलैंस आ गई.

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