17 दिसम्बर को जब देश भर में लोग ‘नागरिकता बिल’ और ‘जेएनयू में पुलिस की बर्बरता‘ के खिलाफ सडको पर विरोध प्रदर्शन कर रहे थे उसी समय उत्तर प्रदेश की विधानसभा में भाजपा के ही एक सौ से अधिक विधायक अपनी ही सरकार के खिलाफ आवाज उठा रहे थे. इससे साफ पता चलता है कि पार्टी और देश में लोकतंत्र की बात करने वाली भाजपा कितना लोकतांत्रिक रह गई है. सत्ता के दबाव में आवाज को कमजोर किया जा सकता है पर दबाया नहीं जा सकता.

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