संसद में सवर्णों के लिए 10 प्रतिशत आरक्षण का बिल पारित करा कर वर्णव्यवस्था की समर्थक भाजपा सनातनी जाति व्यवस्था के रूप को कायम रखने में कामयाब रही है.

‘आरक्षण हटाओ, देश बचाओ’ का नारा लगाने वाले सवर्ण अचानक इस निर्णय से खुशी से झूम उठे हैं पर असल में यह फैसला पहले से विभाजित समाज में एक और सामाजिक वर्गीकरण है. अब सवर्णों में गरीबों की एक दलित जाति बना दी गई है. तय है कि सवर्णों में भेदभाव की एक और दीवार खड़ी दिखाई देगी.

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