त्रेतायुग में अयोध्या के राजाराम को सियासी षडयंत्र का शिकार होकर जब वनवास पर जंगल जाना पड़ा तो उनको शबरी के जूठे बेर खाकर समाज में बराबरी का संदेश देना पड़ा. कलयुग में प्रधानमंत्री भी राजा का प्रतीक होता है. प्रधानमंत्री और भाजपा नेता नरेन्द्र मोदी ने उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में कुंभ में 5 सफाई कर्मचारियों के पैर धो कर त्रेतायुग के संदेश को दोहराने का काम किया. त्रेतायुग से कलयुग तक समाज के वंचित वर्ग को ऐसे प्रतीक सम्मान के ही हकदार हो रहे है. जिस तरह से रामायण में शबरी का महिमामंडन कर वंचित समाज को सम्मान का संदेश देने की कोशिश की गई उस तरह से कलयुग में 5 सफाई कर्मचारियों के पैर धेने पोछने से बराबरी का संदेश देने की कोशिश की जा रही है.

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