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पति की चाह पर आप की न क्यों

हिंदी फिल्म ‘की एंड का’ में गृहिणी की भूमिका निभा रहा नायक पति की भूमिका निभा रही नायिका से रात में बिस्तर पर कहता है कि आज नहीं डार्लिंग, आज मेरे सिर में दर्द है. तात्पर्य यह कि यदि लड़का पत्नी की भूमिका निभाएगा, तो सैक्स के नाम पर उस के भी सिर में दर्द उठेगा. ऐसा क्यों होता है कि पति की तुलना में पत्नी को संभोग के प्रति थोड़ा ठंडा माना जाता है? सिरदर्द की बात चाहे बहाने के रूप में हो या सचाई, निकलती पत्नी के मुख से ही है. क्या वाकई सहवास का जिक्र पत्नियों के सिर में दर्द कर देता है? यदि पत्नी के मन में अपने पति के प्रति आकर्षण या प्रेम में कुछ कमी है, तो रोमांटिक होना कष्टदाई हो सकता है. लेकिन जब नानुकुर बिना किसी ठोस कारण हो तब?

मर्द और औरत की सोच का फर्क

सैक्स के मामले में मर्द और औरत भिन्न हैं. एक ओर जहां मर्द का मन स्त्री की शारीरिक संरचना के ध्यान मात्र से उत्तेजित हो उठता है, वहीं एक स्त्री को भावनात्मक जुड़ाव तथा अपने पार्टनर पर विश्वास सहवास की ओर ले जाता है. एक स्त्री के लिए संभोग केवल शारीरिक नहीं अपितु मानसिक और भावनात्मक स्तर पर होता है. पुरानी हिंदी फिल्म ‘अनामिका’ का गाना ‘बांहों में चले आओ…’ हो या नई फिल्म ‘रामलीला’ का गाना ‘अंग लगा दे…’ ऐसे कितने ही गाने इस विषय को उजागर करते हैं. जो पत्नियां अपने पति से प्यार करती हैं और उन पर विश्वास रखती हैं, उन के लिए संभोग तीव्र अंतरंगता और खुशी को अनुभव करने का जरीया बन जाता है. किंतु जिन पतिपत्नी का रिश्ता द्वेष, ईर्ष्या और अनबन का शिकार होता है वहां सहवास को अनैच्छिक रूप में या बदले के तौर पर महसूस किया जाता है. लेकिन कई बार हमारी अपनी मानसिकता, हमारे संस्कार, हमारी धारणाएं सैक्स को गलत रूप दे डालती हैं और हम अनजाने ही उसे नकारने लगते हैं. इस का इलाज संभव है और आसान भी.

क्या कहता है शोध

ब्रिटिश कोलंबिया विश्वविद्यालय के यौन चिकित्सा कार्यक्रम की निर्देशिका डा. रोसमैरी बेसन कहती हैं कि स्त्रियों में यौनसंतुष्टि से जुड़ी सब से बड़ी शिकायत उन में इच्छा, उत्तेजना और यौन संतुष्टि की कमी होती है.

एक और खास मुद्दा लैंगिक विभिन्नता का है. जहां एक ओर एकतिहाई औरतों में मर्दों से अधिक कामुकता होती है, वहीं दूसरी ओर दोतिहाई जोड़ों में मर्दों की कामप्रवृत्ति औरतों से ज्यादा होती है. इसी कारण ऐसे जोड़े में एक स्त्री को कामोत्तेजित पुरुष की वजह से अपनी कामेच्छा को अनुभव करने का मौका नहीं मिल पाता है.

फ्लोरिडा विश्वविद्यालय की डा. लौरी  मिंज अपनी पुस्तक ‘अ टायर्ड विमंस गाइड टु पैशिनेट सैक्स,’ में बताती हैं कि जहां औरतों  की कामप्रवृत्ति अधिक होती है, वहां भी रोजमर्रा की गृहस्थी संबंधी जिम्मेदारियों के कारण वे कामोत्तेजना तथा यौनसंतुष्टि नहीं भोग पाती हैं.

भारतीय कानून का नजरिया

जो पत्नी बिना कारण अपने पति को लगातार सैक्स से वंचित रखती है या सिर्फ अपनी मरजी से ही संबंध स्थापित करना चाहती है, उसे खुदगर्ज कहना अनुचित न होगा. भारतीय कोर्ट पति या पत्नी द्वारा बिना कारण लंबे समय तक अपने पार्टनर को सैक्स से वंचित रखने को मानसिक क्रूरता की श्रेणी में रखते हैं. ऐसे कई उदाहरण हैं जहां कोर्ट ने सुनवाई में इस दलील पर तलाक तक की मंजूरी दे दी. अप्रैल, 2005 में पति केशव ने मद्रास हाई कोर्ट में पत्नी सविता के खिलाफ लंबे समय तक अंतरंग संबंध स्थापित न करने देने पर तलाक की मांग की, जिस की उसे मंजूरी मिल गई. मद्रास हाई कोर्ट के इस निर्णय के खिलाफ पत्नी सविता सुप्रीम कोर्ट पहुंची जहां न्यायाधीश ज्योति मुखोपाध्याय एवं न्यायाधीश प्रफुल पंत ने मद्रास हाई कोर्ट के निर्णय को सही बताते हुए कहा कि बिना किसी ठोस कारण तथा बिना किसी शारीरिक दुर्बलता के यदि कोई अपने पति या पत्नी को लंबे समय तक संबंध स्थापित नहीं करने देता है तो यह मानसिक क्रूरता की श्रेणी में गिना जाता है. उन के शब्दों में, मानसिक क्रूरता शरीरिक चोट से अधिक आघात पहुंचा सकती है.

अतीत में झांक लें

मालिनी के एक रिश्तेदार ने उस के साथ दुष्कर्म करते समय उस का बाल उम्र का लिहाज नहीं किया. नतीजा यह रहा कि आज भी अपने पति के निकट जाते हुए उसे लगता है जैसे उस के शरीर पर वही लिजलिजे हाथ जबरदस्ती कर रहे हों. सैक्स को वह अपने पत्नी फर्ज की तरह निभाती है न कि अपने पति के साथ बिताए उन प्रेमालाप पलों को पूर्णरूप से जीती है. क्या आप के अतीत में ऐसा कुछ हुआ था, जिस की छाया आप के वर्तमान पर गहरी छाई है? हो सकता है पुराने किसी बुरे अनुभव के कारण आप आज संभोग से घबराती हों. यदि आप के अतीत में हनन या दुर्व्यवहार का ऐसा कोई अनुभव है, जिस से संबंध बनाते समय आप खुश नहीं रह पाती हैं तो आप को जल्द से जल्द प्रोफैशनल मदद लेनी चाहिए और स्वयं को अपने उस बुरे अतीत से मुक्त करना चाहिए.

शारीरिक समस्याओं से छुटकारा पाएं

कभीकभी शारीरिक समस्या जैसे हारमोनल इंबैलैंस के कारण भी स्त्री का मन सैक्स से उचट सकता है. यदि आप को स्वयं में सैक्स के प्रति अरुचि का कारण भावना से अधिक शारीरिक जवाबदेही की कमी लगती है तो आप को

यौनरोग विशेषज्ञ से मिलना चाहिए. वे और भी परेशानियों से मुक्ति दिला सकते हैं जैसे चरमोत्कर्ष पर न पहुंच पाना, स्नेह की कमी, पीडा़दायक सहवास, आप के द्वारा खाई गई कुछ ऐसी दवाएं, जिन के कारण आप में यौन ड्राइव की कमी आई हो इत्यादि.

हमसफर के साथ को करें ऐंजौय

‘‘तुम्हारे साथ होते हुए मुझे ऐसा लगता है जैसे मैं एक लाश के साथ हूं,’’ अंतरंग क्षणों में कभी पत्नी की तरह से कोई रिस्पौंस न मिलने पर अमित के मुंह से निकल गया. यदि पत्नी कभी प्यार में पहल नहीं करेगी तो पति को ही पहल करनी पड़ेगी. इस का परिणाम यह होगा कि पति असुरक्षित भावना का शिकार हो जरूरत से अधिक पहल करने लगेगा और इस का नतीजा यह हो सकता है कि पत्नी, पति की आवश्यकता से अधिक पहल पर उस से और दूर होती जाए. यदि पति को आश्वासन हो कि पत्नी भी पहल करेगी या उस की पहल पर पौजिटिव रिस्पौंस देगी तो वह धैर्य के साथ पत्नी के तैयार होने का इंतजार कर सकता है.

जब एक पत्नी सिर्फ ग्रहण नहीं करती, बल्कि शुरुआत भी करती है तो वह सैक्स

को एक जबरदस्ती, जिम्मेदारी या दबाव के रूप में न देख कर आपसी मेल के रूप में देख पाती है.

किताबें काफी मददगार

अधिकतर परिवारों से मिले संस्कार ऐसे होते हैं, जिन के कारण लड़कियां संभोग को गलत या वर्जित मानती हैं और इसी कारण विवाहोपरांत भी वे इस विषय पर खुल नहीं पातीं. अपनी इस हिचक को दूर करने के लिए ‘गाइड टु गैटिंग इट औन, ‘द गुड गर्ल्स गाइड टू ग्रेट सैक्स’ आदि किताबें पढ़ सकती हैं.

सैक्सुअल थेरैपी भी लाभकारी

कई बार केवल स्वयं कदम उठाना  काफी नहीं होता. यदि आप को स्वस्थ वैवाहिक जीवन जीने में असुविधा हो रही है तो आप प्रोफैशनल मदद के बारे में सोच सकती हैं. सैक्सुअल थेरैपी में एकदम शुरू से आरंभ किया जाता है. जैसे आप दोनों पहली बार मिल रहे हैं. जोड़ों में धीरधीरे रिश्ता कायम कराया जाता है. स्टैप बाई स्टैप सैक्स की ओर ले जाते हैं. हो सकता है कि आप के पति ऐसे प्रोग्राम में जाने को तैयार न हों. ऐसे में आप अकेले भी ऐसे प्रोग्राम का लाभ उठा सकती हैं. आप देखेंगी कि काउंसलर की मदद से आप न केवल सैक्स से संबंधित कितनी ही समस्याओं का समाधान खोज पाएंगी, बल्कि अपने पति से इस विषय में बात करना भी आप के लिए आसान हो जाएगा.

समाज में आ रहे लगातार बदलाव से लिंग भूमिका व कामुकता में भी बदलाव आ रहे हैं. संभोग कोई ऐसा कार्य नहीं जो मर्द औरत के लिए करेगा या औरत मर्द के लिए. संभोग में समान रूप से भागीदारी करें.

वैवाहिक सुख की ओर मिल कर बढ़ाएं कदम

यदि हर बार आप को अपने पति का अंतरंग साथ बेचैनी की भावना की ओर धकेलता है, तो आप को कुछ ऐसे कदम उठाने चाहिए जिन से आप दोनों को वैवाहिक सुख की प्राप्ति हो सके. यह समस्या संवेदनशील अवश्य है, किंतु इसे सुलझाना कठिन नहीं. आइए जानते हैं कुछ ऐसे स्टैप्स जिन्हें आप आसानी से फौलो कर सकती हैं और इस में आप के पति भी यकीनन आप का साथ देंगे:

– हो सकता है कि रिश्ते की शुरुआत में कुछ समय के लिए आप वैवाहिक सुख के लिए तैयार न हों, लेकिन यदि आप के पति यह जानते हैं कि आप का उद्देश्य कम सैक्स नहीं, अपितु पूरे जीवन के लिए ज्यादा व बेहतर सैक्स है, तो वे आप की बात से सहमत होंगे. उन्हें आप के साथ इस विषय पर बातचीत करने, किताबें पढ़ने या किसी काउंसलर से मिलने में भी आपत्ति नहीं होगी. लेकिन यदि उन्हें आपत्ति हो तो आप अकेली ही काउंसलर से मिल कर इस समस्या का हल खोजने का प्रयास करें.

– कोई ऐसी बात या कोई ऐसी चीज जिस के कारण आप का अपने पति के निकट आना मुश्किल हो जाता हो जैसे उन के शरीर से आ रही पसीने की बू, उन के मुंह से आ रही गंध आदि के बारे में उन्हें अवश्य अवगत कराएं, क्योंकि ये छोटीछोटी बातें भी अंतरंग क्षणों पर असर डालती हैं.

जब बदलना हो फ्लैट

अगर आप नए फ्लैट में शिफ्ट होने का प्लान बना रही हैं, तो कुछ बातों का ध्यान रखें. फिर आप इस प्रक्रिया में होने वाली आपाधापी और असुविधाओं से बच जाएंगी:

– फ्लैट ऐसी जगह खोजें, जो आप के दफ्तर या व्यावसायिक स्थल से नजदीक हो.

– अपने बच्चों के दाखिले की व्यवस्था भी यथासंभव फ्लैट के आसपास के ही किसी अच्छे स्कूल में कराएं. फ्लैट से बच्चों का स्कूल और दफ्तर नजदीक होने पर आप आनेजाने में होने वाले व्यर्थ खर्चे से तो बचेंगी ही, साथ ही समय की बचत भी होगी.

– अपने गैस के कनैक्शन का पता परिवर्तित करने के लिए पहले से ही आवेदन कर दें.

– सामान्यतया लैंडलाइन फोन स्थानांतरित करवाने में काफी समय लग जाता है. अत: अच्छा हो फ्लैट बदलने की योजना बनते ही आप फोन स्थानांतरण के लिए आवेदन कर दें. जल्दी काररवाई के लिए हफ्ते भर के अंतराल से स्मरणपत्र अथवा व्यक्तिगत रूप से संबंधित अधिकारी से मिल कर निवेदन करें, तो काम जल्दी हो जाएगा.

– अगर आप को अकसर तबादले या अन्य पारिवारिक कारणों से फ्लैट बदलते रहना पड़ता हो, तो सूटकेस, लकड़ी की पेटियां, प्लास्टिक के कैरेट आदि संभाल कर रखें. अकसर लोग लकड़ी की पेटियों को फेंक देते हैं और फिर जरूरत पड़ने पर बारबार खरीदते हैं. इस से आप व्यर्थ खर्च से बच जाएंगी. सामान पैक करने के लिए लकड़ी की पेटियां बहुत उपयोगी होती हैं.

– सामान की पैकिंग अच्छी तरह करें ताकि टूटफूट न हो.

– अगर आप का सामान ट्रक से जा रहा है, तो तिरपाल अवश्य लगवा दें ताकि बरसात, धूप से सामान का बचाव हो सके. सामान अच्छी और प्रतिष्ठित ट्रांसपोर्ट कंपनी के माध्यम से ही भेजें. सामान का बीमा करवा लें, तो ज्यादा अच्छा होगा.

– यथासंभव सभी संदूकों, पलंगों, फ्रिज, लकड़ी की पेटियों, सूटकेसों आदि पर अपने नए पते के लेबल चिपका दें. साथ ही वहां जिस कंपनी या उस की शाखा में कार्य करने आप जा रहे हैं उस का फोन नंबर भी लिख दें. अगर किसी कारणवश आप काकोई सामान छूट या गिर गया हो तो किसी सज्जन को मिल जाने पर वह आप को सूचित कर सकता है.

– फ्लैट के निकटस्थ डाक्टर, अस्पताल, बैंक, सब्जी बाजार, किराने की दुकान, बिजली मेकैनिक, ड्राइक्लीनर, दूध, मंडी आदि की जानकारी ले लें.

– अपने महल्ले या क्षेत्र के पुलिस स्टेशन का नाम, पता व फोन नंबर अवश्य जानकारी में रखें.

– अपने परिचितों, व्यावसायिक पार्टियों, जीवन बीमा निगम, बैंक, डाकघर, क्रैडिट कार्ड की कंपनी, शेयर कंपनियों आदि को अपना पता बदलने की सूचना अवश्य दे दें.

– जिस कालोनी या महल्ले में आप जा रही हैं वहां अगर कोई रिश्तेदार या परिचित रहता है, तो उस का फोन नंबर पता आदि अवश्य रखें ताकि आपातकालीन स्थिति में उन से मदद ली जा सके.

– अपने पड़ोसियों से अच्छे संपर्क रखें तथा उन के फोन नंबर भी रखें. एक तो वे दुखसुख में काम आएंगे, दूसरा अगर आप का पता बदल गया है और आप किसी को सूचना देना भूल गई हैं तो पड़ोसी ही आप का नया पता बताएंगे या आप की चिट्ठीपत्री ले कर आप तक भेज देंगे.

– जब एक फ्लैट बिकाऊ होता है तो वहां के एजेंट्स से ले कर मैंटीनेंस कर्मियों तक के पास भी उस फ्लैट की चाबी होती है. आप से पहले यह फ्लैट बहुत से लोगों ने देखा होगा और हो सकता है कि उन में से किसी के पास इस की डुप्लीकेट चाबी हो. पिछले मालिक के पास भी इस की अतिरिक्त चाबी हो सकती है. अत: लौक बदलवा लें. यदि घर में कोई अलार्म सिस्टम लगा है तो उस का कोड भी बदल लें.

– आप को पता होना चाहिए कि पूरे घर की बिजली कहां से बंद होगी. इस के अलावा स्विच पर मार्क नहीं तो कौन सा स्विच किस का है, मार्क कर दें. इसी तरह फ्यूज बदलने के लिए आप को मेन स्विच तक जाना पड़ता है. इसलिए मेन स्विच की जानकारी होनी बहुत जरूरी है.

– अगर आप के घर में स्मोक अलार्म और कार्बन मोनोऔक्साइड डिटैक्टर्स लगे हुए हैं तो इन्हें शिफ्ट करने से पहले जरूर चैक करें. आप से पहले भी कई लोगों ने फ्लैट देखा होगा और उन्हें चैक करने की कोशिश की होगी, ऐसे में हो सकता है कि उन की बैटरी खत्म हो गई हो. ऐसे में घर शिफ्ट करने से पहले बैटरी जरूर बदल लें ताकि जरूरत के वक्त आप के काम आ सके.

– सामान शिफ्ट करने के बाद कोई भी टूटफूट कराना मुश्किल होगा. इसलिए घर में शिफ्ट करने से पहले दीवारों पर किसी भी तरह की सीलन के निशान चैक करना न भूलें ताकि सामान वहां ले जाने से पहले आप मरम्मत का जरूरी काम करवा सकें.

– घर में शिफ्ट करने से पहले पेंट जरूर करवाएं. इस से आप को घर अपना सा लगेगा. खाली घर को पेंट करवाना हमेशा आसान होता है. सामान इधरउधर करने का झंझट नहीं होता.

लमहों को सहेजने का अवसर है झारखंड

झारखंड में पर्यटन क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए कई महत्त्वपूर्ण फैसले लिए गए हैं. इन फैसलों से वहां टूरिज्म की संभावनाओं को कितना बल मिलेगा, इस के लिए पेश हैं, पर्यटन विभाग की निदेशक सुचित्रा सिन्हा से की गई बातचीत के खास अंश:

झारखंड की मौजूदा पर्यटन नीति के आधारस्तंभ क्या हैं?

झारखंड पर्यटन विभाग सक्रिय रूप से 7-‘स’ की रणनीति पर काम कर रहा है यानी यह पूरी तरह से स्वागत, सहयोग, सूचना, संरचना, सुविधा, सफाई और सुरक्षा पर केंद्रित है. हमारी नीति इन्हीं मूल्यों पर आधारित है.

तीर्थस्थल पारसनाथ में क्या कुछ नई सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं?

पारसनाथ को अंतर्राष्ट्रीय पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने के लिए तेजी से काम किया जा रहा है. वहां हेलिपैड बनाया जाएगा, जिस की स्वीकृति दे दी गई है और जमीन का भी चयन कर लिया गया है. निर्माण की प्रक्रिया जल्दी शुरू की जाएगी. माननीय मुख्यमंत्री रघुवर दासजी ने कुछ समय पहले पारसनाथ के विकास की समीक्षा की थी. इस दौरान कई महत्त्वपूर्ण फैसले लिए गए हैं. उन्हीं के तहत डोली मजदूरों के आश्रयणी का कार्य शुरू करने का भी फैसला लिया गया है. इस के अलावा यात्री सुविधाओं के लिए भी प्राथमिकता के आधार पर विकास कार्य किए जाने की योजना है.

पर्यटन स्थलों पर सुरक्षा को ले कर हमेशा ही सवाल खड़े होते रहे हैं. इस दिशा में विभाग की ओर से क्या प्रयास किए जा रहे हैं?

पर्यटन विभाग पर्यटकों और पर्यटन स्थलों की सुरक्षा को ले कर गंभीर है. विभाग ने पर्यटन स्थलों की सुरक्षा और पर्यटकों के सहयोग के लिए स्थानीय लोगों को पर्यटन मित्र के रूप में नियुक्त किया गया है. हाल ही में निजी सुरक्षा एजेंसी से भी सुरक्षा को ले कर करार किया गया है. सरकार पर्यटकों की सुरक्षा को ले कर प्रतिबद्ध है. पर्यटक बेझिझक झारखंड आएं. यहां के लोग अतिथिसत्कार के लिए सदियों से जाने जाते हैं. यहां घूमने आने वाले पर्यटक अब यकीनन अपने अनुभव में यादगार लमहे जोड़ कर जाएंगे.

पतरातू घाटी को पर्यटन क्षेत्र के रूप में विकसित करने के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं?

पतरातू की मनोरम घाटियों को देखने आने वाले पर्यटकों की संख्या बढ़ी है. पर्यटकों को और अधिक आकर्षित करने के लिए पतरातू को सरकार द्वारा वाटर स्पोर्ट्स, ऐडवैंचर स्पोर्ट्स और ईकोटूरिज्म के रूप में विकसित किया जाएगा.

झारखंड की थाली अन्य राज्यों में भी लोकप्रिय हो चुकी है. क्या दूसरे राज्यों में झारखंड की थाली को स्थाई रूप से उपलब्ध कराने की कोई योजना है?

हां, यह सच है कि झारखंड की थाली देश भर में लोकप्रिय हो रही है. दिल्ली में हाल ही में आयोजित भारत पर्व में विदेशी पर्यटक झारखंड के जायके के मुरीद होते दिखे. इन संकेतों से भविष्य के लिए संभावनाओं के द्वार खुले नजर आते हैं. आने वाले दिनों में अन्य राज्यों में झारखंड की थाली को स्थाई रूप से उपलब्ध कराने पर भी विचार किया जा सकता है.

विभाग ने हुनर से रोजगार योजना को बेहतर ढंग से संचालित किया है. क्या इस योजना को आगामी वित्तीय वर्ष में भी जारी रखना है?

राज्य सरकार का यह संकल्प है कि स्थानीय युवाओं को कौशल विकास से जोड़ कर उन्हें रोजगार दिया जाएगा. इस हेतु माननीय मुख्यमंत्री रघुवर दासजी का स्पष्ट निर्देश है कि हमें ज्यादा से ज्यादा युवाओं को दक्ष करना है. मौजूदा वित्तीय वर्ष में हुनर से रोजगार योजना को विभाग ने बेहतर ढंग से क्रियान्वित किया है. आगामी वित्तीय वर्ष में भी यह प्रयास होगा.

क्या विभाग अपनी नई वैबसाइट का निर्माण करने जा रहा है?

विभाग की नई वैबसाइट लगभग तैयार है. जल्द ही कई सुविधाओं के साथ एक आकर्षक वैबसाइट आम लोगों के लिए उपलब्ध होगी. विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के अवलोकन एवं स्वीकृति के बाद इसे जारी कर दिया जाएगा.

क्या मोबाइल ऐप्स के माध्यम से भी विभाग ऐंड्रौयड या आईओएस प्लेटफौर्म पर मौजूद रहने की योजना बना रहा है?

मोबाइल ऐप्स मौजूदा दौर की एक बड़ी जरूरत के रूप में उभर कर सामने आए हैं. पर्यटन विभाग ऐंड्रौयड या दूसरे प्लेटफौर्म पर ऐप्लिकेशन की उपयोगिता के बारे में आंतरिक विवेचना कर रहा है. शीघ्र ही इस मसले पर कोई सकारात्मक निर्णय लिया जाएगा.                                     

महिलाओं में दिल की बीमारी का जोखिम

दिल की बीमारी का जोखिम महिलाओंपुरुषों में बराबर ही रहता है. हालांकि पुरुषों और महिलाओं में कार्डियोलौजी अलग तरह से काम करता है. पुरुषों और महिलाओं में कार्डियोवैस्क्युलर बीमारियों के साझे जोखिम कारकों (डायबिटीज, उच्च रक्तचाप, खून में कोलैस्ट्रौल का बढ़ा स्तर और धूम्रपान) के अलावा और भी ऐसे कारक हैं, जो महिलाओं में कार्डियोवैस्क्युलर बीमारी का जोखिम बढ़ा देते हैं.

ऐसे में महिलाओं के लिए यह जानना जरूरी है कि किनकिन कारणों से हार्ट डिजीज होने का खतरा रहता है.

रजोनिवृत्ति और ऐस्ट्रोजन की हानि

महिलाओं के शरीर में बनने वाला हारमोन ऐस्ट्रोजन हृदय की बीमारियों से प्राकृतिक सुरक्षा मुहैया कराता है. उम्र बढ़ने के साथसाथ प्राकृतिक ऐस्ट्रोजन की कमी से उन में रजोनिवृत्ति के बाद हृदय की बीमारी का जोखिम बढ़ सकता है. अगर रजोनिवृत्ति का कारण गर्भाशय या अंडाशय निकालने की सर्जरी की गई हो, तो जोखिम और बढ़ जाता है.

गर्भनिरोधक गोलियां

खाने वाली कुछ गोलियां हृदय की बीमारी का जोखिम पैदा कर सकती हैं खासकर उन महिलाओं में जो धूम्रपान करती हैं या जिन्हें उच्च रक्तचाप रहता है.

तनाव, मोटापा और अवसाद अच्छेखासे जोखिम कारणों में हैं, जो तुलनात्मक रूप से महिलाओं को ज्यादा प्रभावित करते हैं.

डायबिटीज की शिकार महिलाओं की कार्डियोवैस्क्युलर बीमारी से मौत का जोखिम डायबिटीज वाले पुरुषों की तुलना में ज्यादा होता है. गर्भावस्था के दौरान अस्थायी डायबिटीज भी महिलाओं में जोखिम बढ़ा देती है.

हृदय की कई तरह की बीमारियां महिलाओं में पुरुषों की तुलना में ज्यादा आम हैं. जैसे स्ट्रोक, हाइपरटैंशन, ऐंडोथेलियल डिसफंक्शन और कंजैस्टिव हार्ट फेल्योर.

आज हैल्थकेयर समाज में सब से चर्चित विषय है. अत: महिलाओं को इस बात के लिए प्रेरित किया जाना चाहिए कि वे अपने लक्षणों पर ध्यान दें और समय पर रोगनिदान हेतु उपचार का चुनाव करें.

 

( डा. नीति चड्ढा, मैट्रो हौस्पिटल, फरीदाबाद )

मेकअप में भी जरूरी हाइजीन

मेकअप करते समय भी सावधानी हटने से दुर्घटना घट सकती है. इस की बानगी आप को अपने फ्रैंडसर्कल व नातेरिश्तेदारों में मिल जाएगी. कंघी, लिपस्टिक, मसकारा, काजल, ब्लशर, फाउंडेशन, आईशैडो की शेयरिंग बहुत आम है. अपनी इस आदत को सुधारें वरना देर करने पर दाग सेहत पर पड़ेगा. ऐसी छोटीछोटी आदतें, जिन्हें हम नजरअंदाज करते हैं वही त्वचा संबंधी रोगों का कारण बनती हैं. लापरवाही बरतने पर यही फुजूल आदतें गंभीर बीमारी का रूप इख्तियार कर लेती हैं.

नमी की पहुंच नहीं

जहां नमी पहुंची वहीं कीटाणु पनपने शुरू हो जाते हैं, जो बीमारियों को खुला न्योता देते हैं. यही बात आप के वैनिटी बौक्स में शामिल हर एक कौस्मैटिक पर लागू होती है. इस्तेमाल के बाद प्रत्येक कौस्मैटिक को कस कर बंद करें. कौस्मैटिक्स को नमीरहित अंधेरी जगह रखें. याद रहे नमी पहुंचते ही कीटाणु को कहीं भी पहुंचने में ज्यादा वक्त नहीं लगता. इसलिए अपने मेकअप कंटेनर को अच्छी तरह बंद करना न भूलें. अगर मेकअप के सामान तक मौइश्चर पहुंच गया, तो कीटाणुओं को उस में घर बनाने में समय नहीं लगेगा और यह त्वचा के कैंसर का कारण भी बन सकता है.

वैनिटी की सफाई

अपनी वैनिटी का इस्तेमाल सिर्फ सजनेसंवरने तक ही सीमित न रखें. सप्ताह में एक दिन वैनिटी की सफाई जरूर करें. खासतौर से मेकअप में प्रयोग होने वाले ब्रशेज की. पानी और डिटर्जैंट से ब्रश साफ कर रही हैं, तो उन्हें साफ, सूखे कपड़े से पोंछने के बाद धूप में जरूर सुखाएं. मेकअप ब्रश की ब्रिसल टूट गई है या ब्रश पुराना हो गया है, तो उस की जगह नया ब्रश इस्तेमाल करें. समयसमय पर मेकअप ब्रश बदलती रहें. याद रहे मेकअप ब्रश के प्रति लापरवाही आप को महंगी पड़ सकती है यानी नमी का एक कण भी फंगल इन्फैक्शन से गंभीर त्वचा रोग दे सकता है.

स्पौंज से मोह है गलत

सजनेसंवरने के लिए सिर्फ वैनिटी का प्रयोग अहम नहीं है. नियमित अंतराल पर उस की सफाई भी बहुत जरूरी है. मेकअप के लिए ब्रश के बाद स्पौंज का इस्तेमाल आप जरूर करती होंगी. याद रहे स्पौंज की सफाई को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता. कौंपैक्ट के लिए इस्तेमाल होने वाले स्पौंज और पाउडर के लिए प्रयोग होने वाले पफ को नियमित अंतराल पर बदलती रहें. ऐसा न करने से चेहरे पर मौजूद गंदगी स्पौंज या पफ पर चिपक जाती है. इन्हें बिना बदले या धोए प्रयोग में लाने से फंगल इन्फैक्शन का खतरा हो सकता है. अगर आप इन्हें धो रही हैं, तो तेज धूप में सुखाना न भूलें.

ऐसे करें फेस क्लीन

फंगल इन्फैक्शन या त्वचा संबंधी रोगों से बचने के लिए चेहरे की डीप सफाई बहुत जरूरी है. आप की त्वचा नौर्मल या तैलीय है, तो कोल्ड वाइपअप करें. ठंडे या बर्फ के पानी में नैपकिन डुबो कर रखें. इस नैपकिन से रात को मेकअप वाले चेहरे को साफ करें. इस तरह पोर साफ हो जाएंगे और इन में गंदगी भी नहीं जमेगी. आप की त्वचा रूखी है, तो रोजाना चेहरे को मौइश्चराइजरयुक्त क्लींजर से साफ करें. इस से चेहरा रूखा नहीं रहेगा. यदि चेहरे पर खुले रोमछिद्र हैं, तो भी चेहरे को स्टरलाइज करें. इस के लिए चेहरे को ठंडे पानी से स्टरलाइज करें. नमी वाले मौसम में खुले पोरों में तेल और गंदगी जमा हो जाती है, जिस से दाने आने लगते हैं.

यह भी जानें

– इस्तेमाल के बाद कौस्मैटिक अच्छी तरह पैक करें.

– कौस्मैटिक शेयरिंग न करें.

– चेहरे को वाइप टिशू से साफ करने के बाद उसे फेंक दें, क्योंकि वाइप टिशू का दोबारा इस्तेमाल त्वचा के लिए घातक हो सकता है.

– हाल ही में आई अमेरिकन औप्टोमैटिरक ऐसोसिएशन की रिपोर्ट के अनुसार प्रत्येक कौस्मैटिक की ऐक्सपाइरी डेट होती है. एक तय सीमा के बाद कौस्मैटिक का प्रयोग घातक होता है.

– कौस्मैटिक की ऐक्सपाइरी डेट जान कर ही उसे वैनिटी केस में जगह दें.

– कोई भी कौस्मैटिक खरीदने से पहले उस पर लिखी बैस्ट बिफोर डेट जरूर पढें.

– लिपस्टिक की आयु 1-2 साल होती है. आयुसीमा के बाद लिपस्टिक का प्रयोग सेहत पर नकारात्मक प्रभाव डालना शुरू कर देता है.

– नेल पेंट की आयुसीमा सिर्फ 12 महीने होती है.

– 3 साल तक बेफिक्र हो कर आईशैडो का प्रयोग किया जा सकता है.

– वाटरबेस्ड फाउंडेशन 12 महीने और औयलबेस्ड फाउंडेशन 18 महीने तक त्वचा पर नकारात्मक प्रभाव नहीं छोड़ता.

– सभी कौस्मैटिक्स में सब से कम आयु मसकारा की होती है. सिर्फ 8 महीने.

– 12 महीने के बाद हेयरस्प्रे का प्रयोग नहीं करना चाहिए.

– पाउडर 2 साल, कंसीलर 12 महीने, क्रीम व जैल क्लींजर 1 साल, पैंसिल आईलाइनर 3 साल व लिपलाइनर 3 साल के बाद प्रयोग नहीं करना चाहिए.

शिक्षा कोरी व्यावसायिकता

दिल्ली सरकार ने प्राइवेट स्कूलों में फीस बढ़ाने पर रोक लगाने का हक जमा कर पेरैंट्स को राहत दी है. चाहे यह सही हो कि बढ़ते खर्च और बढ़ते वेतन के कारण फीस बढ़ाना आवश्यकता बन गई हो पर यह भी सच है कि शिक्षा अब कोरी व्यावसायिकता हो गई है और इस गंदगी को फैलाने में स्कूल और पेरैंट्स दोनों बराबर के साझेदार हैं. सरकारी कदम से स्पीडबे्रकर लगेंगे. असल में स्कूलों में होड़ लग गई थी कि कौन ज्यादा सुविधाएं देता है. स्कूल मल्टीप्लैक्स और मौल्स की तरह चमचमाने लगे हैं. एयरकंडीशनिंग तो आवश्यकता बनने लगी है. कंप्यूटर, ऐक्टिविटीज, घर से कहीं मीलों दूर स्कूल, बढि़या ड्रैस, कोचिंग आदि के भंवर में स्कूल और पेरैंट्स फंस गए और अब इस से निकलना कठिन हो रहा है.

चूंकि इस धंधे में मुनाफा दिखने लगा, ज्यादातर नए स्कूल केवल धंधे के कारण खुलने लगे. सेवा तो समाप्त हो गई. किसी तरह बच्चों को आकर्षित किया जाए, यही जुगाड़ होने लगे. एक के बाद एक ब्रांच खुलने लगी. चूंकि पेरैंट्स के पास ज्यादा पैसा आने लगा है, उन्होंने भी लाड़लोंलाडलियों को सुविधाएं देनी शुरू कर दी हैं. पेट और सुविधाएं काट कर साधारण परिवार भी अपने बच्चों को महंगे स्कूलों में भेज रहे हैं और सिलसिला थम नहीं रहा. उधर सरकार उन संस्थानों की भी फीस बढ़ा रही है जहां जनता के टैक्स से वसूले अरबों रुपए खर्च किए जाते हैं. आईआईटी, आईआईएम, जेएनयू, मैडिकल कालेजों की फीस बढ़ रही है तो स्कूल वालों को लगता है कि वे भी क्यों न इस बहती गंगा में हाथ धो डालें.

पढ़ाई की क्वालिटी सुधरे या न सुधरे, स्कूलों का रंगरोगन जरूर सुधर रहा है पर जेबें पेरैंट्स की खाली हो रही हैं. यह भयावह स्थिति है, क्योंकि इस का मतलब है कि केवल अमीरों के बच्चे पढ़ पाएंगे और गरीबों के बच्चे अधपढ़े रह कर उसी आर्थिक स्तर पर रह जाएंगे. यह भेदभाव समाज को फिर से राजशाही युग में ले जाएगा जिस में कौरवपांडव तो शिक्षा पाएंगे और एकलव्य अपना अंगूठा कटवाएंगे. दिल्ली सरकार जो कर रही है वह स्कूलों द्वारा व अदालतों द्वारा माना जाएगा, इस के चांस नहीं हैं, पर फिर भी प्रयास तो किया जा रहा है. कम से कम स्कूली शिक्षा तो बराबर की होनी चाहिए, लगभग मुफ्त. चाहे स्कूल भव्य हों या खंडहर. बच्चों को प्रारंभ से ही सिखाना चाहिए कि सब बराबर हैं और शिक्षा मेहनत पर निर्भर है पैसे पर नहीं.

महिलाओं के लिए जरूरी है जीवन बीमा

आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में भावनात्मक एवं शारीरिक सुरक्षा के साथ ही आर्थिक सुरक्षा भी बेहद जरूरी है. खासतौर पर महिलाओं का आर्थिक रूप से मजबूत होना बहुत जरूरी है. इस की बड़ी वजह है, आजकल की महिलाओं का पुरुषों के साथ कंधे से कंधा मिला कर चलना. जी हां, आज की सशक्त महिलाएं न केवल घर की चारदीवारी से बाहर निकल कर अपना अस्तित्व निखार रही हैं, बल्कि अपने घर की आर्थिक जिम्मेदारियों को भी पूरा कर रही हैं. ऐसे में उन की अनुपस्थिति में परिवार को होने वाले आर्थिक नुकसान को पूरा करने के लिए उन का बीमित होना अनिवार्य है.

बचत से ज्यादा जरूरत

वैसे जीवन बीमा को अधिकतर महिलाएं बचत समझती हैं लेकिन जीवन बीमा बचत से ज्यादा जरूरत है, क्योंकि इस से बड़े होते बच्चों की शिक्षा, रोजगार व शादी सहित जीवन की कई महत्त्वपूर्ण जिम्मेदारियों को पूरा करने में मदद मिलती है. इस के और भी कई लाभ हैं, जो महिलाओं में आत्मनिर्भरता और आत्मविश्वास का समावेश करते हैं.

आइए, कुछ लाभों के बारे में हम बताते हैं:

– ‘मेरे जाने के बाद मेरे बच्चों का क्या होगा?’, ‘क्या पति अकेले सभी बड़ी जिम्मेदारियां उठा लेंगे?’ यह सवाल अकसर आप को परेशान करते होंगे. जायज भी है, बढ़ती हुई महंगाई में घर एक कमाने वाले की कमाई से नहीं चल सकता, बल्कि जरूरी है कि घर की कुछ आर्थिक जिम्मेदारियां आप भी उठाएं. हो सकता है कि आप की सैलरी घर की बड़ी जिम्मेदारियां उठाने में मददगार न हो लेकिन आप की छोटीछोटी बचत इस में आप की मदद कर सकती है. इस में जीवन बीमा की अहम भूमिका है क्योंकि यह आप को एकमुश्त बड़ी रकम देता है, जिस से आप अपने दायित्वों को पूरा कर सकती हैं.

– आजकल ऐसी इंश्योरैंस पौलिसी भी आ गई है जिस में जीवन बीमा के साथ ही सेविंग और क्रिटिकल इलनैस (बीमारियां एवं प्रैगनैंसी) को भी कवर किया जाता है. यह पौलिसी खासतौर पर उन महिलाओं के लिए बेहद लाभकारी है जो घर और बाहर दोनों जगह की जिम्मेदारियों को निभा रही हैं, क्योंकि ऐसे में सेहत पर विपरीत असर तो पड़ता ही है, तब इस तरह की पौलिसियां आर्थिक रूप से मददगार बनती हैं.

– यदि आप का परिवार पूरी तरह आप की आय पर निर्भर है तो आप को टर्म इंश्योरैंस पौलिसी लेनी चाहिए. इस में परिपक्वता पर तो कोई राशि प्राप्त नहीं होती लेकिन बहुत कम प्रीमियम पर बड़ा सुरक्षा कवर मिल जाता है.

– कुछ जीवन बीमा योजनाओं में विशेष बीमारी होने पर कुछ बीमा कंपनियों द्वारा इलाज हेतु अग्रिम राशि दे दी जाती है.

– यदि आप की आय, आयकर में महिलाओं को दी गई छूट से अधिक है, तो बीमा पौलिसी पर आप को आयकर की छूट भी प्राप्त होगी.

कैसे चुनें बीमा पौलिसी

बीमा पौलिसी कराने से पहले यह देखना जरूरी है कि बीमाधारक अपनी आर्थिक स्थिति के मुताबिक कितनी रकम का प्रीमियम भर सकता है. दरअसल, अधिक प्रीमियम वाली बीमा पौलिसी लेने के बाद, जब प्रीमियम भरने में कठिनाई महसूस होती है, तब कई बीमाधारक तय समय से पहले ही बीमा अनुबंध तोड़ देते हैं. इस से बीमाधारक को फायदे की जगह नुकसान ही उठाना पड़ता है. पौलिसी चलती रहे, यही कोशिश करनी चाहिए.

इन टिप्स पर गौर करें, बीमा पौलिसी चुनते समय मदद मिल सकती है:

– बीमाधारक पर कितने लोग आश्रित हैं और वह उन्हें कैसी जीवनशैली देना चाहता है.

– बीमाधारक को अपने रोजमर्रा के खर्चे और अपने दायित्वों को भी समझना चाहिए.

– किस तरह की इंश्योरैंस पौलिसी आप के लिए मददगार है, इस बात का भी खयाल रखें.

– आप अपना प्रीमियम समय पर भर सकते हैं या नहीं इस बात का भी ध्यान रखें.    

EXCLUSIVE: ‘सरबजीत’ पर पहली बार बोले रणदीप हुड्डा

बौलीवुड में रणदीप हुड्डा की अपनी एक अलग पहचान है. वह विवादों से हमेशा दूर रहते हैं. वह एक बेहतरीन अभिनेता होने के साथ साथ एक पोलो टीम व कई घोड़ों के मालिक होने के साथ ही बेहतरीन घुड़सवार हैं. अभिनेत्री रिचा चड्ढा उन्हें एक मूड़ी कलाकार मानती हैं. बौलीवुड में फिल्म के असफल होते ही फिल्म से जुड़े लोग एक दूसरे पर आरोप प्रत्यारोप की झड़ी लगा देते हैं.

20 मई को प्रदर्शित फिल्म ‘‘सरबजीत’’ की असफलता के लिए ऐश्वर्या राय बच्चन व फिल्म के निर्देशक के साथ साथ निर्माता तक पर कई आरोप लग चुके हैं. मगर  फिल्म ‘सरबजीत’ के लिए सर्वाधिक मेहनत करने वाले तथा फिल्म में सरबजीत का मुख्य किरदार निभाने वाले अभिनेता रणदीप हुड्डा ने चुप्पी साधे रखी. यहां तक कि ‘सरबजीत’ की सफलता की पार्टी में जब कुछ पत्रकारों ने रणदीप से ऐश्वर्या राय बच्चन व फिल्म के बारे में सवाल किया, तो वह चुप रहे. बार बार सवाल पूछे जाने पर वह पत्रकारों पर ही भड़क उठे. उसके बाद पत्रकारों के बीच आम धारणा बन गयी कि रणदीप हुड्डा फिल्म ‘सरबजीत’ को लेकर कोई बात नहीं करना चाहते.

लेकिन फिल्म ‘‘दो लफ्जों की कहानी’’ के प्रमोशन के दौरान ‘‘सरिता’’ पत्रिका से एक्सक्लूसिव बात करते हुए रणदीप हुड्डा ने फिल्म ‘‘सरबजीत’’ को लेकर  खुलकर बात की. जब मैंने उनसे पूछा कि, ‘‘फिल्म ‘सरबजीत’ को बाक्स आफिस पर जो सफलता मिलनी चाहिए थी, वह नहीं मिली. आपको नहीं लगता कि फिल्म को सही ढंग से प्रमोट नही किया गया?’’ तब रणदीप हुड्डा ने एक समझदार इंसान व एक प्रोफेशनल कलाकार की तरह मेरे इस सवाल का जवाब देते हुए कहा-‘‘इस बारे में मैं कुछ नहीं कह सकता. फिल्म को प्रमोट करने का जिम्मा किसी और का है. उसे जज करना मेरा काम नहीं है. मेरा काम अभिनय करना है और वह मैं जी जान लगाकर कर लेता हूं. फिल्म को किस तरह से रिलीज किया जाए, यह मेरा काम नही है. फिल्म को कैसे प्रमोट किया जाए, यह भी मेरा काम नहीं है. मैं सिर्फ अपनी फिल्म के बारे में ज्यादा से ज्यादा मीडिया से बात कर सकता हूं, वह मैं करता रहता हूं. मैं अपनी तरफ से किसी भी फिल्म को प्रमोट करने में कोई कसर नहीं छोड़ता हूं. ’’

रणदीप हुड्डा ने अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए कहा-‘‘सच कहूं तो मैं कोई भी फिल्म प्रोडक्शन हाउस का नाम देखकर स्वीकार नहीं करता हूं. मैं सबसे पहले फिल्म की पटकथा, उसके बाद किरदार और फिर निर्देशक के नाम पर गौर करता हूं. प्रोडक्शन हाउस तो सबसे अंत में आता है. फिल्म ‘सरबजीत’ के जो निर्माता हैं, उनमें अनुभव की कमी है. उनके पास वह ताकत नही है, जिससे वह फिल्म को सही प्लेटफार्म दे सकें. नए लोग होने की वजह से सही लोगों के साथ उनका जुड़ाव कम है. पर मेरा अपना मानना है कि हर फिल्म अपने दर्शक ढूंढ़ ही लेती है. कभी वह आसानी से जल्दी ढूंढ़ लेती है, तो कभी लंबा समय लेकर. लेकिन हर फिल्म अपने दर्षकों तक पहुंच जाती है.

फिल्म सिर्फ सिनेमा घर नहीं,बल्कि डीवीडी, कभी टीवी,तो कभी इंटरनेट के द्वारा अपने दर्शक तक पहुंच जाती है. इस तरह से मेरा काम भी लोगों तक पहुंच जाता है. तो मुझे इस बात का अफसोस नहीं होता कि मैंने मेहनत की और मेरा काम लोगों तक नहीं पहुंचा. यदि कोई फिल्म बाक्स आफिस पर सुपर डुपर हिट हो जाए, तो भी एक कलाकार के तौर पर मुझे कोई पैसे मिलने वाले नहीं होते हैं. मेरे लिए सिर्फ इतना जरूरी होता है कि मेरा काम दर्शकों तक पहुंच जाए. पर अब वह किसी न किसी माध्यम से पहुंच जाता है. मैं आज दावे के साथ कह सकता हूं कि पचास साल बाद भी यदि किसी ने रणदीप हुड्डा के बारे में जानना चाहा, तो उसे मेरे बारे में, मेरी फिल्मों के बारे में जरूर पता चल जाएगा. अब तो इंटरनेट का जमाना है, एक बटन दबाया, सब कुछ सामने होता है. मेरी राय में जिस तरह की फिल्म ‘सरबजीत’ बनी है,उस हिसाब से वह अच्छा बिजनेस कर रही है.’’

अब रणदीप हुड्डा ने फिल्म ‘‘सरबजीत’’ की असफलता के लिए अपरोक्ष रूप से किसे दोषी ठहराया, किसे नहीं, इसका अंदाजा तो लगाया ही जा सकता है.  

‘ए गर्ल इन द रिवर’ : फिल्म नहीं, समाज का आईना भी

‘‘मलाला यूसुफजई को मिले नोबेल पुरस्कार से उत्साहित पाकिस्तानी महिलाओं में अपने अधिकारों को ले कर चेतना आई है. अब वे रूढिवादी रीतिरिवाजों से पल्ला झाड़ कर खुली हवा में सांस लेने को बेताब हैं, भले ही इस का जो अंजाम हो. पाकिस्तान में अब फिजा बदल रही है और इस के लिए पढ़ीलिखी महिलाएं बड़ी तादाद में आगे आ रही हैं,’’ यह कहना है औस्कर पुरस्कार प्राप्त पाकिस्तानी महिला फिल्मकार शरमीन ओबेद चिनौय का. पाकिस्तान में प्रेमविवाह गुनाह है. इसलाम के नाम पर वर्षों से चली आ रही इस प्रथा के खिलाफ परिवार की रजामंदी के बिना विवाह को पाप समझा जाता है. ऐसी स्थिति में लड़की का पिता, भाई और चाचा ही उस के खून के प्यासे बन जाते हैं. पाकिस्तान में इस झूठी आनबानशान अर्थात ओनर किलिंग के नाम पर हर साल 1 हजार से भी ज्यादा युवतियों को बेरहमी से मौत के घाट उतार दिया जाता है.

सामाजिक पहलू को दिखाती फिल्म

दूसरी बार औस्कर पुरस्कार लेने आईं शरमीन जैसे ही सभागार में पहुंचीं, उन का तालियों की गड़गड़ाहट से स्वागत हुआ. अमेरिका का शायद ही ऐसा कोई मीडिया रहा होगा, जिसे पुरस्कार से पहले और बाद में इस तेजतर्रार महिला शरमीन की तलाश न रही हो. मंच से जैसे ही शरमीन ओबेद चिनौय और उन की लघु फिल्म ‘ए गर्ल इन द रिवर’ का नाम पुकारा गया, सभागार में दुनिया भर से आए सिने अभिनेताओं और निर्माताओं को ऐसे लगा कि इस फिल्म को तो अवार्ड मिलना ही चाहिए था. वह क्यों? इस का जवाब दूसरी बार औस्कर अवार्ड लेने वाली पाकिस्तानी फिल्मकार ने इन शब्दों में दिया, ‘‘मुझे इस अवार्ड से ज्यादा खुशी तब होगी जब मेरे देश पाकिस्तान में ओनर किलिंग के नाम पर आए दिन होने वाली हत्याएं बंद होंगी, पारस्परिक प्रेमविवाह करने वाले युवकयुवतियों को बिना रोकटोक विवाह करने की आजादी होगी, उन्हें परिवार की झूठी आनबान के लिए मौत के घाट नहीं उतारा जाएगा. ऐसा तभी होगा जब पाकिस्तान में ओनर किलिंग के लिए कानून में कड़ी से कड़ी सजा का प्रावधान किया जाए.’’

शरमीन कहती हैं कि हम जैसी महिलाएं मन में ठान लें, तो फिर क्या नहीं हो सकता. शरमीन नवाज शरीफ के उस कथन का उल्लेख करना भी नहीं भूलीं कि उन्होंने 1 सप्ताह पहले ही यह फिल्म देखने के बाद भरोसा दिलाया था कि वे इस संदर्भ में कानून बनाने के लिए जरूर अपेक्षित कदम उठाएंगे.

अपनों द्वारा ही जुल्म

दुनिया भर में पाकिस्तान सहित ऐसे 1 दर्जन इसलामिक देश हैं जहां घर वालों की मरजी के बिना हर साल प्रेमविवाह करने वाली 1 हजार से भी ज्यादा युवतियों को और कहींकहीं युवकों को भी पारिवारिक आनबान के लिए बेरहमी से मौत के घाट उतार दिया जाता है और सरकारें इसलाम तथा सामाजिक दबाव के कारण इस जघन्य अपराध का संज्ञान लेने को तैयार ही नहीं होतीं. पाकिस्तान में 2014 में 1005 युवतियों को प्रेमविवाह अथवा घर से भाग कर अपनी पसंद के युवक से विवाह करने के कारण मौत के घाट उतारा गया था. इस अपराध में कोई और नहीं उस के पिता, भाई और चाचा ही शामिल होते हैं.

औस्कर अवार्ड के बाद प्रैस कौन्फ्रैंस में अमेरिकी पत्रकारों के ढेरों सवालों के जवाब में शरमीन कहती हैं कि पारिवारिक आनबान के नाम पर अपनी बहूबेटियों को बेरहमी से मौत के घाट उतारे जाने का इसलाम में या उन की संस्कृति में कहीं कोई उल्लेख नहीं है. इस का एक ही रास्ता है कि इसलामिक देश पहले यह स्वीकार करें कि ओनर किलिंग एक सामाजिक बुराई है. उन के समाज में यह एक गंभीर समस्या है. इस पर घरघर में एक कड़ा संदेश देने और परिवारजनों को शिक्षित किए जाने की जरूरत है. इस के बाद ही सरकार की जिम्मेदारी आती है कि वह कड़ा कानून बनाए.

एक आईना है

शरमीन बताती हैं कि ऐंटीओनर किलिंग ला बिल 2014 में सीनेट में रखा गया था, पर देश की संसद में पारित नहीं हो सका. यहां जरूरत इस बात की है कि इस जघन्य अपराध की सजा मात्र माफीनामा तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि कानून में सजा के लिए कड़े से कड़े प्रावधान होने जरूरी हैं. शरमीन दावे के साथ कहना चाहती हैं कि इस फिल्म से बेहतर कोई संदेश नहीं हो सकता. उन्होंने यही पक्ष इस फिल्म में बड़ी मजबूती के साथ पेश किया है. उन्हें इस बात का फख्र है कि इस दायित्व को निभाने में उन के पिता और पति ने साथ दिया. शरमीन को 2012 में भी ‘सेविंग फेस’ पर औस्कर अवार्ड मिल चुका है.

‘ए गर्ल इन द रिवर’ सबा काइजर नामक एक 18 वर्षीय ऐसी युवती की सच्ची प्रेम कथा है, जो पंजाब के एक ग्रामीण इलाके में एक निर्धन लड़के से प्रेम करती थी. इस में सबा का कुसूर यह था कि उस ने परिवार वालों की मरजी के खिलाफ प्रेमविवाह कर लिया. इस पर उस के पिता और चाचा ने उसे मौत के घाट उतारने के लिए उस के सिर पर गोली चला कर घायल कर दिया और फिर उसे एक बोरी में डाल कर नदी में फेंक दिया. होता यह है कि गोली सीधे सिर में लगने के बजाय सबा के कान और आंख के पास से उसे घायल कर निकल जाती है. बाद में इस लड़की को किसी ने नदी से निकाल कर अस्पताल में दाखिल करा दिया. इस घटना के बारे में अगले दिन अखबारों से जब शरमीन को पता चला, तो वे अपनी कैमरा टीम के साथ अस्पताल पहुंच जाती हैं. इस तरह कहानी आगे बढ़ती है. लेकिन सबा अपने पिता और चाचा को माफ नहीं करती और न ही उस के पिता को अपनी बेटी पर जानलेवा हमला करने पर कोई रंज होता है.

नवाज शरीफ ने शरमीन को औस्कर अवार्ड जीतने पर बधाई दी है और कहा है कि देश को उन पर नाज है.

सही ब्रेक नहीं मिलने से आप संघर्ष करते रहते हैं: लिसा हेडन

अपने बोल्ड अंदाज़ के लिए जानी जाने वाली अभिनेत्री लिसा हेडन एक मॉडल और प्रशिक्षित भरतनाट्यम डांसर भी हैं. उन्होंने अपने फ़िल्मी कैरियर की शुरुआत मूवी ‘आयशा’ से की, जिसका ऑफर अनिल कपूर ने उन्हें एक रेस्तरां में देखकर दिया था. फिल्म औसतन रही पर लिसा इस फिल्म के बाद तीन महीने की अभिनय प्रशिक्षण के लिए अमेरिका गई. वहां से आकर उन्होंने फिल्म ‘क्वीन’ में सिंगल मदर की भूमिका निभाई. फिल्म में उनके अभिनय की खूब प्रशंसा की गई. उसके बाद उन्होंने ‘शौक़ीन’ फिल्म में काम किया और अब हाउसफुल-3 में वह दिखाई देंगी. वह अपने किरदार को लेकर बहुत खुश हैं. उनसे बात करना रोचक था. पेश है इसके कुछ खास अंश.

इतनी बड़ी कास्ट के साथ काम करने का अनुभव कैसा रहा? कैसे ऑफर मिला?

बहुत अच्छा था, क्योंकि पहली बार इतनी बड़ी कास्ट के साथ एक कॉमेडी फिल्म में काम करना मेरे लिए बड़ी बात थी. मेरा दायित्व इसमें अधिक था, क्योंकि मुझे सबके साथ सही तालमेल के साथ अभिनय करना था. मैंने नर्गिस और जैकलीन के साथ अच्छा समय बिताया है, उन दोनों का ‘सेन्स ऑफ़ ह्यूमर’ काफी अच्छा है. जैकलीन काम के दौरान मुझे हमेशा ‘हेल्दी डाइट’ पर टिप्स देती थी, जिसे आज भी मैं फोलो कर रही हूँ.

पिछले साल मेरी बर्थडे के लिए मैं हॉलीडे पर थी. एक इवेंट पर मैं साजिद नाडियाडवाला से मिली और उन्हें  ‘हैलो’ कहा. उसके कुछ दिनों बाद मेरी एजेंसी में फ़ोन आया कि वे मुझे अपनी फिल्म में लेना चाहते हैं, मुझे ख़ुशी हुई, क्योंकि यह एक ऐसी फिल्म है, जिसे लोग पहले से ही प्यार करते हें और मैं इसका हिस्सा बनने जा रही थी. मैं इसमें एक अमीर अंग्रेज बिजनेस मैन की बेटी बनने जा रही हूँ ,जो आर्टिस्ट है. इसमें मैं एक संस्कारी लड़की के साथ-साथ एक नॉर्मल लड़की की भी भूमिका निभा रही हूँ, जिसे मौज मस्ती सब पसंद है.

आपको ऐसा नहीं लगा कि इतनी सारी स्टार कास्ट में आप कही छिप न जाये?

मुझे फिल्म की सारी बातें पता है, सारे कलाकारों के लिए इसमें करने के लिए कुछ न कुछ है, क्योंकि यह 6 कलाकारों की फिल्म है. यह एक टीम की फिल्म है,कोई अधिक या कोई कम नहीं.

कॉमेडी आपको कितनी पसंद है?

मुझे कॉमेडी बहुत पसंद है, इसे करने में मजा आता है. मेरे लिए यह एक नया जोनर है. मेरे हिसाब से कॉमेडी हर दुखी इंसान को सुकून देती है, हंसा सकती है. आज के परिवेश में यह बहुत जरुरी है.

ये फिल्म आपको आगे बढ़ने मैं कितना सहयोग देगी ?

उम्मीद है कि ये सफल फिल्म होगी. जब तक आपको कोई बड़ी फिल्म नहीं मिलती, आपको अच्छा ब्रेक नहीं मिलजा, आप संघर्ष करते रहते हैं. ’क्वीन’ से पहले लोग ये नहीं समझ पाते थे कि मैं एक्टिंग कर पाऊँगी, क्वीन मेरे लिए एक मौका था यह दिखाने का कि मैं केवल एक मॉडल ही नहीं, बल्कि अभिनेत्री भी हूँ. आयशा में मेरा चरित्र बहुत छोटा था. मुझे अपना अभिनय दिखने का मौका नहीं मिला. ‘क्वीन’ ही मेरी पहली फिल्म थी, जिसमें मैं अपने आप को प्रूव कर पाई, उसके बाद लोगों ने यह सोचना बंद कर दिया कि मैं उनकी फिल्म में काम कर पाऊँगी या नहीं. आज मैं यह सोचती हूँ कि मुझे कोई भी चरित्र मिले, मैं अच्छा करूँ.

आप बॉलीवुड के कौन-कौन से डायरेक्टर  के साथ काम करने की इच्छा रखती हैं?

लिस्ट बहुत बड़ी है, मेरे हिसाब से एक अच्छा डायरेक्टर एक अच्छे कलाकार को जन्म देता है. करन जौहर, साजिद एंड फरहाद, विशाल भारद्वाज, ज़ोया अख्तर आदि के साथ काम करना चाहती हूँ.

इस फिल्म का कठिन काम कौन सा था?

सुबह 5 बजे उठना, क्योंकि सूरज ‘यूके’ में जल्दी डूब जाता है और सबको सूरज डूबने से पहले शूटिंग खत्म करनी पड़ती थी. उसमें एक गाने की शूटिंग इंडियन ऑउटफिट में करना था, जो मैं पहली बार पहन रही थी. वही मुश्किल था, लेकिन मैंने दृश्य को काफी एन्जॉय किया.

क्या मॉडलिंग भी कर रही हैं? 

अभी मॉडलिंग नहीं करना चाहती. कुछ एंडोर्स करती हूं, अभी मैं पूरी तरह से अभिनय को समय देना चाहती हूँ.

बॉलीवुड में गॉड फ़ादर न होने पर काम का मिलना कितना कठिन होता है?

मेरे हिसाब से अगर आप अच्छा काम करते हैं और अगर वह चरित्र आपके ऊपर फिट बैठता है, तो कोई और उस भूमिका को नहीं कर सकता. कोई दूसरी लिसा हेडन नहीं बन सकती.

क्या आप हॉलीवुड टीवी में काम करना चाहती हैं?

जरुर मैं हॉलीवुड की टीवी देखती हूँ और पसंद भी करती हूँ. अगर काम करने का मौका मिलेगा, तो अवश्य करुँगी. मुझे रौमकॉम, कॉमेडी सब पसंद है.

आपका ब्यूटी सीक्रेट क्या है?

जल्दी सो जाना और खूब पानी पीना. मेरे जीवन का सिद्दांत है कि माइंड को फ्री कर काम करें.

आपका स्टाइल स्टेटमेंट क्या है?

मैं बहुत ‘लेजी’ हूँ. मैं ‘कूल’ टीशर्ट जीन्स और हाई हील्स पहनना पसंद करती हूँ.

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