मेरी बहन और उस का 5 वर्षीय बेटा मेरे पास आए हुए थे. उन दिनों आम का मौसम लगभग समाप्ति पर था. मेरे पति आम ले कर आए थे जिन में से एक आम, जो सब से बड़ा था, मैं ने बचा कर रख दिया ताकि खाने के समय काट कर सब को दे सकूं. बहन का लड़का बारबार फ्रिज के पास जाता, उसे खोल कर देखता और फिर बंद कर देता. यह क्रम वह लगभग हर 5 मिनट बाद दोहरा रहा था. मैं उस की इस हरकत को देख रही थी. आखिर मैं ने पूछ ही लिया, ‘‘फ्रिज में से कुछ चाहिए, बेटा?’’ बच्चे ने तपाक से कहा, ‘‘बड़ी मम्मी, क्या इस आम का झाड़ उगाओगी?’’ बच्चे द्वारा मासूमी से कही बात पर मेरी हंसी छूट गई. बात 18 साल पुरानी हो चुकी है लेकिन आज भी फ्रिज में आम रखे देखती हूं तो घटना ताजी हो जाती है.
- विमला ठाकुर, महेंद्रगढ़ (हरि.)
*
मैं मायके गई हुई थी. मेरा बड़ा बेटा तब ढाई साल का था. उसे हिंदी, इंगलिश का फर्क भी नहीं मालूम था. छोटी बहन दीवार पर कील ठोंकने का काम कर रही थी. उस ने मेरे बेटे से कहा कि अनुज, जरा वह हथौड़ी मुझे पकड़ा दो. बेटे ने पास ही पड़ी हथौड़ी बहन को दी और कहने लगा, ‘‘मौसी, आप लोग तो बड़े अंगरेज हो, हम लोग तो इसे हैमर कहते हैं.’’ यह सुन कर हम सब खूब हंसे.
- कीर्ति सक्सेना, बेंगलुरु (कर्नाटक)
*
मेरी भतीजी की 4 साल की बेटी है. वह बहुत ही चंचल है. एक दिन उस की मौसी की शादी में लेडीज संगीत हो रहा था. वह भी डांस करने के लिए तैयार हो कर आ गई. फिर उस ने डांस किया. उस के डांस को सब लोगों ने बहुत पसंद किया. डांस कर के उस ने आ कर हम लोगों से पूछा, ‘‘बताइए, मैं ने कैसा डांस किया?’’ फिर थोड़ी देर बाद अपनी मम्मी से बोली, ‘‘मैं ने तो वह वाला पोज ही नहीं किया, मैं फिर से जा कर कर लूं?’’ यह सुन कर सभी हंसे बिना न रह सके.
आगे की कहानी पढ़ने के लिए सब्सक्राइब करें
डिजिटल
सरिता सब्सक्रिप्शन से जुड़ेें और पाएं
- सरिता मैगजीन का सारा कंटेंट
- देश विदेश के राजनैतिक मुद्दे
- 7000 से ज्यादा कहानियां
- समाजिक समस्याओं पर चोट करते लेख
डिजिटल + 24 प्रिंट मैगजीन
सरिता सब्सक्रिप्शन से जुड़ेें और पाएं
- सरिता मैगजीन का सारा कंटेंट
- देश विदेश के राजनैतिक मुद्दे
- 7000 से ज्यादा कहानियां
- समाजिक समस्याओं पर चोट करते लेख
- 24 प्रिंट मैगजीन





