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काजल अग्रवाल के लिए क्या अंगूर खट्टे हैं…?

काजल अग्रवाल ने 19 साल की उम्र में फिल्म ‘‘क्यों हो गया ना’’ से अपने अभिनय करियर की शुरूआत की थी. लेकिन इस फिल्म के बाद उन्हे हिंदी फिल्मों में कोई काम नहीं मिला. तीन साल तक इंतजार करने के बाद काजल अग्रवाल ने दक्षिण भारत की तरफ रूख किया और 2007 में तेलगू फिल्म ‘‘लक्ष्मी काल्यणम’’ की. तब से दक्षिण भारत में तमिल व तेलगू की ‘‘मगधीरा’’ व ‘थुपाकी’ सहित चालीस फिल्मों में अभिनय कर चुकी हैं. वह बार बार हिंदी फिल्मों की तरफ रूख करती हैं, पर हिंदी फिल्मों में उनका करियर बन नहीं पा रहा है.

2004 के बाद काजल अग्रवाल ने अजय देवगन के  साथ 2011 की सफलतम हिंदी फिल्म ‘‘सिंघम’’ की. लेकिन ‘सिंघम’ की सफलता का सारा श्रेय अजय देवगन को मिल गया और फिर ‘सिंघम’ की सिक्वअल फिल्म ‘सिंघम रिटर्न’ से काजल अग्रवाल का पत्ता कट गया. इसके बाद वह 2013 में अक्षय कुमार के साथ फिल्म ‘‘स्पेशल 26’ में प्रिया चौहाण की एक छोटी सी भूमिका में नजर आयीं. इस फिल्म को बाक्स आफिस पर सफलता भी नहीं मिली.

अब पूरे तीन साल बाद वह फिल्म ‘दो लुफ्जों की कहानी’ में रणदीप हुड्डा के साथ नजर आने वाली हैं. यह फिल्म एक मशहूर कोरियन फिल्म ‘‘आलवेज’’ का हिंदी रूपांतरण है. एक बात समझ से परे है कि काजल अग्रवाल को दक्षिण में फिल्में मिल रही हैं, तो फिर हिंदी में उन्हे फिल्में क्यों नहीं मिल पा रही है?

जब एक मुलाकात में काजल अग्रवाल से हमने पूछा, ‘आपको नहीं लगता कि हिंदी फिल्मों में जिस तरह से आपका करियर आगे बढ़ना चाहिए, उस तरह से नहीं बढ़ रहा है?’’ मेरे इस सवाल पर उनके चेहरे पर ऐसे भाव आए, जैसे कि उन्हे यह सवाल पसंद नहीं आया हो. पर बहुत ही संयत होकर काजल अग्रवाल ने जवाब दिया-‘‘मुझे ऐसा नहीं लगता. यह मेरी अपनी पसंद की बात है कि मुझे किस भाषा की फिल्म करनी है. दक्षिण भारत की फिल्मों में मैं काफी व्यस्त हूं. देखिए, हिंदी,तमिल व तेलगू में से किस भाषा में मुझे फिल्म करनी है, यह मेरी अपनी पसंद व मेरे चयन की बात है. मैं दक्षिण में कई फिल्में कर रही हूं. यह कहना गलत होगा कि हिंदी फिल्मों में मेरा कैरियर अच्छा नहीं जा रहा है. जब मैं हिंदी फिल्म करना चाहती हूं, तब कर लेती हूं.’’

क्या बात है. यदि काजल अग्रवाल की बातों में सच्चाई है, तो फिर चालीस फिल्मों में से एक भी किसिंग सीन न करने वाली काजल अग्रवाल हिंदी फिल्म ‘‘दो लफ्जों की कहानी’’ में किंसिंग सीन करने के लिए कैसे तैयार हो गयीं. कहीं काजल अग्रवाल का यह जवाब ‘अंगूर खट्टे हैं’ वाला मसला तो नहीं.

सोशल ऐटिकेट्स हैं जरूरी

‘सोशल’ शब्द हमारी लाइफ का एक महत्त्वपूर्ण हिस्सा बन गया है. सोशल वर्ल्ड में हम खुद को अपडेट रखने के लिए हर छोटीबड़ी चीजों पर ध्यान देते हैं. पर क्या कभी आप ने अपने सोशल ऐटिकेट्स पर ध्यान दिया है? निश्चित रूप से नहीं दिया होगा. दरअसल हम चैटिंग, कमैंट, लाइक, फोटो अपलोड, स्टेटस अपलोड में इतने ज्यादा बिजी होते हैं कि सोशल ऐटिकेट्स पर हमारा ध्यान ही नहीं जाता. पर रीयल लाइफ की तरह सोशल साइट्स पर भी ऐटिकेट्स जरूरी है. इस से आप की पर्सनैलिटी का पता चलता है. ऐटिकेट्स का मतलब यह नही है कि आप रूल्स व रेगुलेशन फौलो करें, बल्कि ऐटिकेट्स का मतलब है कि आप चीजों को किस तरह से करते हैं. अपने फ्रैंड सर्कल में भी जब हम किसी को कुछ कह देते हैं तो उसे बुरा लगता है. जरा सोचिए यह तो एक ऐसा प्लेटफौर्म है जहां हमारे आप के अलाव और कई लोग हैं, जो प्रोफाइल को देखते हैं.

यहां अपडेट रहना और हर छोटीछोटी बात पर अपनी प्रतिक्रिया देना तो ठीक है लेकिन ऐटिकेट्स को ध्यान में रखना भी जरूरी है.

सोशल साइट्स पर इन ऐटिकेट्स का रखें ध्यान

फ्रैंड अनफ्रैंड करना

जब रीयल लाइफ में हमारी किसी से लड़ाई होती है या हम किसी बात से नाराज हो जाते हैं तो तुरंत उसे अपने फ्रैंडलिस्ट से अनफ्रैंड कर देते हैं और जब हमारे बीच सबकुछ ठीक हो जाता है तो फिर से फ्रैंड लिस्ट में शामिल कर लेते हैं, इस की वजह से लोगों पर निगेटिव इम्पैक्ट पड़ता है. वे देख कर कमैंट करते हैं कि इन का ड्रामा तो लगा रहता है.

बिना पूछे फोटो टैग करना

जब हम फोटो क्लिक करते हैं तो उसे तुरंत फेसबुक पर अपलोड करने की हड़बड़ी होती है. जल्दी से उसे अपलोड कर के सब को बताना चाहते हैं कि देखो हम ने कितनी मस्ती की है. लेकिन ग्रुप फोटो अपलोड और फ्रैंड्स को टैग करने से पहले फोटो में शामिल मैंबर से पूछना जरूरी है क्योंकि ऐसा भी हो सकता है कि आप फोटो अपलोड करना चाह रहे हों, पर फोटो में शामिल कोई एक मैंबर को अपलोड करने का मन ना हो.

उलटे सीधे स्टेटस अपलोड

आजकल ध्यान अपनी प्रोफाइल पर अट्रैक्ट करने के लिए उलटेसीधे स्टेटस अपलोड करने का फैशन है. जैसे किसी दोस्त ने आप को किसी काम के लिए मना कर दिया तो उसे टारगेट करते हुए स्टेटस डाल दिया, किसी ने कुछ कह दिया तो, किसी से लड़ाई हो गई तो स्टेटस डाल देते है. पर ऐसा कर के आप चीजों को ठीक करने के बजाय स्थिति को और भी ज्यादा खराब कर देते हैं और आप के बीच दूरियां बढ़ जाती है.

बार बार फ्रैंड रिक्वैस्ट भेजना

कुछ लोग ऐसे होते हैं जब तक आप उन का फ्रैंड रिक्वैस्ट एक्सैप्ट नहीं कर लेते, वे आप को रिक्वैस्ट भेजते रहते हैं. अगर आप उस का रिक्वैस्ट एक्सैप्ट नहीं करते और उसे ब्लौक कर देते हैं तो तुरंत दूसरी आईडी बना कर रिक्वैस्ट भेजना शुरू कर देते हैं. पर ऐसा व्यवहार करना गलत है, जब सामने वाला आप का रिक्वैस्ट स्वीकार नहीं करना चाहता तो बारबार भेज कर उसे परेशान ना करें.

किसी को टारगेट करना

ऐसा नहीं है कि सिर्फ रीयल लाइफ में ही टारगेट किया जाता है, आज लोग सोशल साइट्स पर भी एकदूसरे को टारगेट करने लगे हैं, निगेटिव कमैंट करते हैं. अगर आप ऐसा करते हैं तो बंद कर दें. ये सिर्फ आप दोनों की दुनिया नहीं है यहां कई लोग हैं जो आप की इस एक्टिविटी को देखते हैं.

रिलेशनशिप स्टेटस बदलना

रिलेशनशिप स्टेटस भी बारबार बदलना सोशल ऐटिकेट्स के अंदर नहीं आता. जैसे आप की लड़ाई हो गई तो आप ने तुरंत सिंगल का स्टेटस लगा दिया. जैसे ही सब कुछ ठीक हुआ आप ने फिर से ‘इन अ रिलेशनशिप’ का स्टेटस अपलोड कर दिया.

निगेटिव कमैंट करना: कई बार हम मजाकमजाक में ही निगेटिव कमैंट कर देते हैं पर ऐसा करने से बचें. क्योंकि आप का एक कमैंट सामने वाले को हंसी का पात्र बना सकता है. निगेटिव कमैंट से सामने वाले में भी आत्मविश्वास कम होने लगता है.

लाइक व कमैंट के लिए रिक्वैस्ट करनाः आज कल फोटो पर जितने ज्यादा लाइक व कमैंट, मतलब उतनी ज्यादा पौपुलैरिटी. इस की वजह से कुछ लोग पर्सनल आईडी पर लाइक व कमैंट करने के लिए भी कह देते हैं और फ्रैंड्स मजाक में यही बात फोटो के नीचे लिख देते हैं, जिस की वजह से सब आप का मजाक बनाते हैं.

पुरानी फोटो अपलोड करनाः कुछ लोग मस्ती के लिए पुरानी फोटो अपलोड कर देते हैं, पर ऐसा न करें. ऐसा भी हो सकता है कि उस फोटो का असर आज के व्यक्तित्व पर पड़े और वे गुस्से में आप को ब्लौक कर दे.

सोशल ग्रुप में बुराई करनाः कभी भी सोशल ग्रुप में किसी दोस्त की बुराई न करें, जब दोस्त को इस बात का पता चलेगा तो उसे बुरा लगेगा. ऐसा भ्री हो सकता है कि कोई इस चैट को सबूत के तौर पर इस्तेमाल करे.

कैंडी क्रश रिक्वैस्ट भेजना

कैंडी क्रश ने लोगों पर इस कदर जादू बिखेर दिया है कि लोग लाइफ खत्म होते ही परेशान हो जाते हैं कि कौन लाइफ दे सकता है, कहां से लाइक मिल सकता है. इसी वजह से रिक्वैस्ट भेजना शुरू कर देते हैं, उन के रिक्वैस्ट नोटिफिकेशन से हो न हो आप को गुस्सा जरूर आता होगा है कि यार क्या है ये, बारबार रिक्वैस्ट आता है.

इन बातों का भी ध्यान रखें

– अगर कोई रिप्लाई नहीं कर रहा हो तो उसे बारबार मैसेज कर के रिप्लाई करने के लिए ना कहें बल्कि उस के रिप्लाई का इंतजार करें.

– बातबात पर फ्रैंड्स को ब्लौक करना बंद करें.

– खुद ही ग्रुप में ऐड ना करें, बल्कि पहले पूछ लें कि वे ऐड होना चाहते हैं या नहीं.

– नौनवेज जौक्स भेजने से पहले सोचें जरूर.

– रात में चैट न भेजें, जरूरी नहीं कि सामने वाला भी लेट नाइट चैटिंग करता हो.

पाकिस्तान में ‘सरबजीत’ के रिलीज की संभावनाएं नहीं

उमंग कुमार अपनी फिल्म ‘‘सरबजीत’’ को पाकिस्तान में रिलीज करना चाहते थे, इसीलिए उन्होंने इस फिल्म का निर्माण करते समय पाकिस्तान की जेल में बीस साल तक बंद रहने व प्रताड़ना सहने वाले निर्दोष भारतीय सरबजीत की जिंदगी पर फिल्म बनाते समय पाकिस्तान के खिलाफ कोई बात नहीं की. इसके बावजूद यह फिल्म पाकिस्तान में अब तक रिलीज नहीं हो पायी है और आगे भी इसके रिलीज की कोई संभावना नजर नहीं आ रही है. इस बात का खुलासा पीटीआई से पाकिस्तान सेंसर बोर्ड के अध्यक्ष मोबाशिर हसन की हुई बातचीत से हुआ है.

हसन ने कहा है-‘‘अभी तक देश की किसी भी वितरक कंपनी ने संपर्क नहीं किया है. पाकिस्तान की व्यवस्था में जब कोई वितरक कंपनी भारतीय फिल्म का आयात या रिलीज करना चाहती है, तो वह सबसे पहले पाकिस्तान के सूचना प्रसारण मंत्रालय से संपर्क करती है. उसके बाद सेंसर बोर्ड से फिल्म की विषयवस्तु की समीक्षा करने के लिए कहा जाता है. जब सेंसर बार्ड अपनी समीक्षा सूचना प्रसारण मंत्रालय को दे देता है, तब सूचना प्रसारण मंत्रालय की तरफ से वाणिज्य मंत्रालय को सूचना दी जाती है, उसके बाद फिल्म का आयात होता है और वह रिलीज की जाती है. लेकिन अब तक किसी भी वितरक ने ‘सरबजीत’ को लेकर ऐसी कोई मांग नहीं की है.’’

हैदराबाद का आईपीएल जीतने का सपना हुआ पूरा

बैंगलोर के चिन्नास्वामी मैदान पर विराट कोहली की टीम रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर और डेविड वार्नर की टीम सनरॉइज़र्स हैदराबाद के बीच फाइनल मैच को देखने के लिए करीब 32 हजार दर्शक मौजूद थे. रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर अपने घरेलू मैदान पर खेल रहा था और दर्शक यह उम्मीद कर रहे थे कि बैंगलोर फाइनल मैच जीतेगा बैंगलोर यह मैच आठ रन से हार गया और उसका आईपीएल जीतने का सपना टूट गया. सनरॉइज़र्स हैदराबाद का आईपीएल जीतने का सपना पूरा हुआ. पहले बल्लेबाजी करते हुए हैदराबाद ने 208 रन बनाए. लक्ष्य का पीछा करते हुए बैंगलोर ने 20 ओवर में 200 रन बनाए.

पावर प्ले में दोनों टीमों का स्कोर समान

पावरप्ले  में दोनों टीमों ने शानदार प्रदर्शन किया. पावरप्ले हैदराबाद के लिए कप्तान डेविड वॉर्नर और शिखर धवन के बीच 59 रन की साझेदारी हुई. हैदराबाद ने पावरप्ले के पहले चार ओवर में सिर्फ 27 रन बनाए थे लेकिन पावरप्ले के आखिर दो ओवरों में हैदराबाद ने 32 रन बनाए. इसी तरह पहले छह ओवरों में हैदराबाद ने 59 रन बनाए. बैंगलोर के लिए भी कप्तान कोहली और क्रिस गेल ने पावरप्ले में शानदार बल्लेबाजी की. बैंगलोर ने भी हैदराबाद की तरह पावरप्ले में यानि पहले छह ओवर में 59 रन बनाए. इन 59 रन में से गेल ने 44 रन बनाए और कोहली ने दस रन. बाकी के रन अतिरिक्त थे.

क्रिस गेल पड़े डेविड वार्नर पर भारी

आज के मैच में हैदराबाद के सलामी बल्लेबाज और कप्तान डेविड वार्नर और बैंगलोर के सलामी बल्लेबाज क्रिस गेल ने शानदार खेल का प्रदर्शन किया. लेकिन क्रिस गेल की पारी डेविड वॉर्नर की पारी पर भारी पड़ी. वॉर्नर ने 24 गेंदों का सामना करते हुए चौके के जरिए अपना अर्धशतक पूरा किया जबकि गेल ने 25 गेंदों का सामना करते हुए छक्के के जरिए अपना अर्धशतक पूरा किया. वार्नर सिर्फ 38 गेंदों का सामना करते हुए 69 रन पर आउट हुए जिसमें आठ चौके ओर तीन छक्के शामिल थे. लेकिन गेल वॉर्नर से आगे निकल गए. गेल ने वॉर्नर की तरह 38 गेंदों का सामना तो किया लेकिन 76 रन बनाए जिसमें आठ छक्के और चार चौके शामिल थे.

बीच के ओवरों में बैंगलोर, हैदराबाद से आगे निकल गया

पावरप्ले में दोनों टीमों का स्कोर समान था लेकिन 11 से लेकर 16 तक यानि इस दस ओवरों में बैंगलोर ने हैदराबाद को पीछा छोड़ दिया. हैदराबाद ने इन दस ओवरों में करीब 8.8 के औसत से 88 रन बनाए और 16 ओवरों के बाद हैदराबाद का स्कोर 147 रन था. लेकिन बैंगलोर ने इन दस ओवरों में 10.3 औसत से 103 रन बनाए यानि 16 ओवरों के बाद बैंगलोर का स्कोर 162 रन था. 16 ओवर के बाद दोनों टीमों ने चार-चार विकेट गंवाए.

ऑस्ट्रेलिया के बेन कटिंग ने अपने देश के शेन वॉटसन की धुलाई की

हैदराबाद की तरफ से बेन कटिंग ने ताबड़तोड़ बल्लेबाजी करते हुए सिर्फ 15 गेंदों पर 39 रन ठोक डाले जिसमें चार विशाल छक्के और तीन चौके शामिल थे. बैंगलोर की तरफ से शेन वॉटसन ने आखिरी ओवर किया लेकिन बेन कटिंग ने शानदार बल्लेबाजी करते हुए इस ओवर में 23 रन ठोक डाले. इसमें तीन छक्के और एक चौका शामिल था. शेन वॉटसन के इस ओवर में कटिंग ने सबसे लंबा 117 मीटर का छक्का भी मारा. युवराज ने तेज खेलते हुए वार्नर का साथ दिया. वार्नर के आउट होने के बाद युवराज ने हैदराबाद की पारी को संभाला, लेकिन ज्यादा रन नहीं बना पाए. युवराज सिंह ने 23 गेंदों का सामना करते हुए 38 रन बनाए जिसमें चार चौके और दो छक्के शामिल थे.

आखिरी चार ओवर में हैदराबाद ने बैंगलोर को पछाड़ा

16 से लेकर 20 ओवर यानि आखिर चार ओवर में हैदराबाद ने बैंगलोर को पीछे छोड़ते हुए मैच जीत लिया और पहली बार आईपीएल जीतने का गौरव हासिल किया. आखिर चार ओवर में हैदराबाद ने 15.5 के औसत से  61 रन बनाए. इस तरह 20 ओवरों के बाद हैदराबाद का स्कोर 208 पर पहुंच गया. लेकिन बैंगलोर ने आखिर चार ओवर में सिर्फ 38 रन बन पाए और 20 ओवरों के बाद बैंगलोर का स्कोर 200 रन रहा. हैदराबाद इस मैच को आठ रन से हार गया.

किस्मत ने भी दिया हैदराबाद का साथ

आज किस्मत ने हैदराबाद का साथ दिया. डेविड वॉर्नर ने टॉस जीता जो हैदराबाद के लिए जरूरी था. फिर डेविड वॉर्नर जब 52 पर बल्लेबाजी कर रहे थे तब विकेटकीपर केएल राहुल ने वॉर्नर का कैच छोड़ दिया. हैदराबाद का स्कोर जब 115 था तब जॉर्डन के पास युवराज सिंह को रन आउट करने का एक मौका था, लेकिन जॉर्डन इस मौके का फायदा नहीं उठा पाए. गेंद स्टम्प पर नहीं लगी और युवराज सिंह रन आउट होने से बाल-बाल बच गए.

ये था वो एक ओवर, जिसने बैंगलोर को हरा दिया

रविवार को बैंगलोर के चिन्नास्वामी स्टेडियम पर रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर और सनरॉइज़र्स हैदराबाद अपना सपना पूरा करने के लिए मैदान पर उतरे थे, लेकिन इस सपने का सौदागर हैदराबाद ही रहा. बैंगलोर के मैदान पर सनरॉइजर्स का उदय हुआ और शानदार खेलते हुए डेविड वॉर्नर की टीम सनरॉइजर्स हैदराबाद ने विराट कोहली की टीम रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर को चार रन से हराया और पहली बार आईपीएल जीतने का गौरव हासिल किया.

पहले बल्लेबाजी करते हुए हैदराबाद ने निर्धारित 20 ओवर में 208 रन बनाए. हैदराबाद की तरफ से कप्तान डेविड वॉर्नर सर्वाधिक 69 रन बनाए जिसमें तीन छक्के और आठ चौके शामिल थे. 209 रन के लक्ष्य का पीछा करते हुए बैंगलोर ने निर्धारित 20 ओवर में सिर्फ 200 रन बनाए और आठ रन से यह मैच हार का मुंह देखना पड़ा. बैंगलोर की तरफ से कप्तान विराट कोहली ने 54 रन बनाए जबकि क्रिस गेल ने शानदार 76 रन की पारी खेली जिसमें आठ छक्के और चार चौके शामिल थे.

वह एक ओवर जो बैंगलोर पर पड़ा भारी

मैच में दोनों टीमों की बल्लेबाज़ों ने शानदार बल्लेबाजी की. बैंगलोर मैच ज़रुर हार गया हो, लेकिन बैंगलोर के बल्लेबाज़ों ने शानदार बल्लेबाजी करते हुए अपनी टीम को 200 रन तक पहुंचाया जो आसान बात नहीं थी. पावरप्ले में दोनों टीम बराबरी पर थीं. 11 से लेकर 16 ओवरों के बीच बैंगलोर का स्कोर हैदराबाद से आगे था लेकिन आखिर चार ओवरों में बैंगलोर अच्छा खेल नहीं पाया और मैच हार गया. वह एक ओवर जो बैंगलोर के ऊपर भारी पड़ा, वह है हैदराबाद की पारी का आखिर ओवर.

एक बना हीरो तो दूसरा जीरो…

ऑस्ट्रेलिया के गेंदबाज़ शेन वॉटसन आखिरी ओवर में गेंदबाज़ी कर रहे थे और सामने थे हैदराबाद की तरफ से खेलने वाले ऑस्ट्रेलिया के बल्लेबाज बेन कटिंग. बेन कटिंग ने इस ओवर में शानदार बल्लेबाजी करते हुए 23 रन ठोक डाले, जिसमें तीन छक्के, एक चौके और एक सिंगल शामिल था. इस ओवर में कुल मिलाकर 24 रन आए. 19 ओवरों के बाद हैदराबाद का स्कोर सात विकेट पर 184 रन का था और उम्मीद की जा रही थी कि हैदराबाद का स्कोर 200 की करीब पहुँच जायेगा लेकिन शेन वॉटसन के इस ओवर में 24 रन आने की वजह से हैदराबाद का स्कोर 208 तक पहुंच गया.

अगर बैंगलोर की बात की जाए तो 19 ओवरों के बाद बैंगलोर ने छह विकेट पर 191 रन बना लिए थे लेकिन आखिर ओवर में वह सिर्फ 9 रन बना पाया और बैंगलोर आठ रन से मैच हार गया. कटिंग की इस शानदार पारी के वजह से उन्हें “मैन ऑफ़ द मैच” का ख़िताब मिला. शेन वॉटसन ने चार ओवर में गेंदबाज़ी करते हुए 61 रन दे दिए जो बैंगलोर के लिए घातक साबित हुए.

डेविड वॉर्नर ने बनाए कई रिकॉर्ड

डेविड वॉर्नर ने शानदार खेलते हुए सिर्फ 24 गेंदों पर अपना अर्धशतक पूरा किया और इस अर्धशतक के साथ आईपीएल के इतिहास में किसी एक संस्करण में सबसे ज्यादा 9 अर्धशतक बनाने का रिकॉर्ड कायम कर लिया. आज तक आईपीएल के इतिहास में किसी भी खिलाड़ी ने इतने अर्धशतक नहीं मारे हैं. इससे पहले यह रिकॉर्ड क्रिस गेल के नाम था. गेल ने आईपीएल के 2012 के संस्करण में सात अर्धशतक मारे थे.

सिर्फ इतना नहीं आईपीएल के एक संस्करण में सबसे ज्यादा चौके मारने का रिकॉर्ड भी डेविड वॉर्नर के नाम हो गया है. वॉर्नर ने इस संस्करण में 88 चौके मारे. आईपीएल के इतिहास में किसी एक संस्करण में किसी भी खिलाड़ी ने इतने चौके नहीं मारे हैं. इससे पहले यह रिकॉर्ड सचिन तेंदुलकर के नाम था. 2012 के संस्करण में मुंबई इंडियन के तरफ से खेलते हुए सचिन ने 86 चौके मारे थे. डेविड वॉर्नर आईपीएल के इतिहास में किसी एक संस्करण में सबसे ज्यादा रन बनाने के मामले में दूसरे स्थान पर आ गए हैं. विराट कोहली इस संस्करण में 973 रन के साथ पहले स्थान पर हैं जबकि वॉर्नर 848 रन के साथ दूसरा स्थान पर. तीसरे स्थान पर क्रिस गेल हैं. गेल ने 2012 के संस्करण में 733 रन बनाए थे.

कोहली ने बनाए कितने रिकॉर्ड…

कोहली के रिकॉर्ड पर एक नज़र डालते हैं. कोहली के नाम एक संस्करण में सबसे ज्यादा 973 रन बनाने का रिकॉर्ड है. एक संस्करण में सबसे ज्यादा चार शतक मारने का रिकॉर्ड भी है और कप्तान के रूप में एक संस्करण में सबसे ज्यादा 38 छक्के मारने रिकॉर्ड भी उन्हीं के नाम है. विराट कोहली ही एक ऐसे खिलाड़ी हैं जो आईपीएल के इतिहास में सबसे ज्यादा यानी चार बार 500 से भी ज्यादा रन बना चुके हैं. विराट कोहली के नाम कप्तान के रूप में आईपीएल के संस्करण में सबसे ज्यादा औसत से रन बनाने का रिकॉर्ड भी है.

IPL 9: जानें किसे मिला कौन सा पुरस्कार

रविवार को आईपीएल का फाइनल मैच रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर और सनराइज़र्स हैदराबाद के बीच खेला गया. हैदराबाद ने शानदार खेलते हुए बैंगलोर को 8 रन से हराया और पहली बार आईपीएल जीतने का गौरव हासिल किया. पहले बल्लेबाजी करते हुए हैदराबाद ने 208 रन बनाए थे और बैंगलोर 20 ओवर में 200 तक ही पहुंच पाया और 8 रन से हार गया.

हैदराबाद की ओर से कप्तान डेविड वार्नर ने सबसे ज्यादा 69 रन बनाए, जबकि बैंगलोर की तरफ से क्रिस गेल ने 76 रन की पारी खेली. दोनों ने ही यह रन 38 गेंदों पर ठोके थे. हम सब जानते हैं कि आईपीएल में टीम के जीतने के अलावा भी कई पुरस्कार दिए जाते हैं. आइए जानते हैं इस आईपीएल सीजन में किस खिलाड़ी को कौन सा पुरस्कार मिला…

विराट कोहली को मिले सबसे ज्यादा अवार्ड

आईपीएल में शानदार प्रदर्शन की वजह से विराट कोहली को कई अवार्ड मिले. विराट कोहली ने इस संस्करण में सबसे ज्यादा 974 रन बनाए, जिसकी वजह से उन्हें सर्वश्रेष्ठ बल्लेबाज का पुरस्कार मिला और कोहली ऑरेंज कैप के हक़दार बन गए. कोहली को सर्वश्रेष्ठ मूल्यवान खिलाड़ी का अवार्ड भी मिला. इतना ही नहीं, टूर्नामेंट में सबसे ज्यादा 36 छक्के मारने की वजह से कोहली को 10 लाख रुपये देकर भी सम्मानित किया गया.

भुवनेश्वर  कुमार को मिली पर्पल कैप

पूरे टूर्नामेंट में शानदार गेंदबाज़ी की वजह से भुवनेश्वर कुमार को पर्पल कैप के साथ-साथ 10 लाख रुपये भी मिले. पर्पल कैप उस गेंदबाज़ को दी जाती है जिसने टूर्नामेंट में सबसे ज्यादा विकेट लेने का गौरव हासिल किया हो. भुवनेश्वर कुमार ने 17 मैच खेलते हुए सबसे ज्यादा 23 विकेट हासिल किए.

दूसरे खिलाड़ियों को भी कई अवार्ड मिले

सर्वश्रेष्ठ कैच का आवर्ड सुरेश रैना को मिला. इस संस्करण में इमर्जिंग खिलाड़ी का ख़िताब सनराइज़र्स हैदराबाद के गेंदबाज़ मुस्तफिजुर रहमान को मिला. वोडाफोन सुपरफ़ास्ट अर्द्धशतक के लिए क्रिस मॉरिस को सम्मानित किया गया. मॉरिस ने इस आईपीएल संस्करण में सबसे ज्यादा तेज़ अर्द्धशतक ठोके थे. गुजरात लायंस के खिलाफ मॉरिस ने सिर्फ 17 गेंदों पर अर्द्धशतक जमाया था. “फ्रीचार्ज बोल्ट सीजन” अवार्ड एबी डिविलियर्स को मिला. यह अवार्ड पूरे टूर्नामेंट में शानदार फील्डिंग के लिए दिया जाता है.

अपने रिकॉर्ड के बारे में क्या बोले कोहली

पुरस्कार वितरण समारोह के दौरान जब कमेंटेटर संजय मांजरेकर ने कोहली से पूछा कि क्या एक संस्करण में उनके द्वारा बनाए गए सबसे ज्यादा 974 रन का रिकॉर्ड कोई तोड़ पाएगा तो कोहली ने जवाब दिया क्यों नहीं. रिकॉर्ड तोड़ने के लिए बनाए जाते हैं, अगर कोई एक संस्करण में उनसे ज्यादा अच्छा खेला तो रिकॉर्ड टूट सकता है. कोहली का कहना था कि पहले 740 का रिकॉर्ड बहुत बड़ा लगता था, लेकिन अगर कोई सिर्फ अच्छा खेलते हुए अपनी टीम को जीताना चाहता है तो रन बनाने के साथ-साथ रिकॉर्ड भी बनते जाएंगे.

अपने चार शतक के बारे में क्या रहा कोहली का जवाब

संजय मांजेरकर ने जब एक संस्करण में सबसे ज्यादा चार शतक लगाए जाने के बारे में पूछा तो कोहली का कहना था कि इन चार शतकों को लेकर वह खुद आश्चर्य में है, कोहली ने कहा, उनका मुख्य मकसद था टीम के लिए एक अच्छा स्कोर खड़ा करना और इस प्रक्रिया में वह यह रिकॉर्ड बनाते गए. जाते-जाते कोहली यह भी बोलते गए कि यह भी ध्यान रखना चाहिए कि वह सलामी बल्लेबाज के रूप में बल्लेबाजी कर रहे थे और उन्हें ज्यादा गेंद खेलने का मौका मिल रहा था जो दूसरे या तीसरे नंबर पर बल्लेबाजी करने आए बल्लेबाजों को नहीं मिलता है.

क्या वास्तव में सफल हो गयी ‘‘सरबजीत’’…?

मुंबई के पांच सितारा होटल ‘‘जेडब्ल्यू मेरिएट’’ के ‘‘इंगिमा’’ में फिल्म ‘‘सरबजीत’’ के निर्माताओं की तरफ से फिल्म को बाक्स आफिस पर मिली सफलता का जश्न मनाने के लिए पार्टी का आयोजन किया गया. यह एक अलग बात है कि फिल्म इंडस्ट्री में लोग आज भी ही सवाल पूछ रहे हैं कि क्या वास्तव में बाक्स आफिस पर ‘‘सरबजीत’’ को सफलता मिल गयी? इस सवाल के पूछे जाने के पीछे कई वजहें हैं.

जब फिल्म को बाक्स आफिस पर सफलता मिलती है, तो फिल्म से जुड़े हर तकनीशियन व कलाकार के चेहरे पर खुशी के भाव छिपाए नहीं छिपते. लेकिन ‘सरबजीत’ के संग जुड़े लोगों के चेहरे पर यह भाव बनावटी ही नजर आई. इस सफलता की पार्टी में अभिनेत्री रिचा चड्ढा बहुत देर से पहुंची. सूत्रों की माने तो रिचा चड्ढा पार्टी में तब पहुंची थी, जब सभी फोटोग्राफर  व मीडिया वाले अपने घर वापस जा चुके थे. अब इसकी वजह क्या रही, पता नहीं.

दूसरी बात यदि फिल्म ‘‘सरबजीत’’ हिट है, तो फिर वितरकों के नुकसान की भरपाई की बात कहां से आ गयी? जी हॉ! फिल्म के सह निर्माता वासु भगनानी ने ‘‘सरबजीत’’ के फिल्म के भारतीय वितरण अधिकार 18 करोड़ रूपए में ‘बाय बैक’ किए थे और देश के सभी वितरकों को इस फिल्म के वितरण अधिकार काफी ऊंची कीमत पर बेचे थे. सूत्र बताते है कि बाक्स आफिस पर फिल्म के घटिया प्रदर्शन को देखते हुए वासु भगनानी ने सभी वितरकों को एक आधिकारिक ईमेल भेजकर उनके नुकसान की आधी भरपाई करने की बात लिखी.

सूत्रों की माने तो इस ईमेल में वासु भगनानी ने लिखा है कि फिल्म के रिलीज की तारीख से एक माह बाद सभी वितरकों के साथ बैठकर बैंलेंस सीट बनायी जाएगी और जिसका जितना नुकसान हुआ होगा, उसका आधा हिस्सा वह नगद लौटा देंगे. इसके बावजूद डंके की चोट पर फिल्म की सफलता की पार्टी का आयोजन के मायने…?

LGBT समुदाय के फिल्म फेस्टिवल ‘कशिश’ का उद्घाटन

एलजीबीटी समुदाय के 7वें फिल्म फेस्टिवल ‘कशिश” का उद्घाटन मुम्बई में किया गया. इसका उद्देश्श्य यह रहा कि एलजीबीटी समुदाय के लोग इस विषय पर बिना झिझक बड़े परदे पर आम लोगो के साथ बैठकर एलजीबीटी पर बनी फिल्मों को देख सकें. इसके अलावा आम लोगो में इस समुदाय को लेकर गलत अवधारणा है, उसका समाधान हो. लोगों मे इस समुदाय को अपनाने की जागरूकता बढ़े. इस बारे में समारोह के आयोजक श्रीधरन का कहना है कि बहुत कम लोग इस समुदाय को जानते हैं, लोग उनको अजीब समझते हैं, जबकि ये लोग आम इंसान की तरह ही होते हैं, आम घरों में रहते हैं, ऑफिस में जाते हैं, इनकी सोच सिर्फ अलग होती है. ये सेक्सुअल नहीं होते, न ही अपराधी होते है. समस्या ये है कि इन्हें धर्म, समाज, कानून और परिवार एक्सेप्ट नहीं करते. कुछ ही देशों में इन्हें मान्यता दी गई है.

पहले वर्ष बहुत कम लोग इस फेस्टिवल में आए थे. पिछले साल 10 हज़ार लोगों ने ऐसी फिल्में देखी. इस साल 53 देशों की 182 फिल्में, जिनमें 27 भारतीय फिल्म भी शामिल हैं उन्हें तीन स्थलों लिबर्टी सनेमा, अलाएंस फ्रेंकेस डे बोम्बे और मेक्स्मुलेर भवन में दिखाया जायेगा. ये क्राइम नहीं करते. लोग उनसे डरते हैं, जबकि कानून के हिसाब से अगर कोई क्राइम वे पब्लिक प्लेस में करें, तो गलत होता है, जैसा की आम लोगों के लिए भी है.

‘गे’ और ‘लेस्बियन’ को आप तब तक समझ नहीं सकते, जब तक कि वे खुद इस बारें में न बताएं. इसमें ट्रांसजेंडर सबसे अधिक प्रभावित होते हैं, वे पढे लिखे होते हैं, वे टेलीफोन ऑपरेटर, पुलिस, ऑफिस में,आदि सब जगह अच्छा काम कर सकते हैं, पर उन्हें काम नहीं मिलता, वे रास्ते पर भीख मांगकर गुजारा करते हैं. लोगों को लगता है कि वे कुछ गलत करेंगे. कंपनी उन्हें इसलिए काम नहीं देती, क्योंकि किसी कंपनी में अगर मेल या फीमेल टॉयलेट है, तो ट्रांसजेंडर कहा जायेंगे. इसलिए कई बड़ी कंपनिया आजकल यूनिसेक्स टॉयलेट्स बनवा रही हैं, ताकि ये समस्या न हो. ये एक अच्छी बात हो रही है.

माता-पिता फ्रेंड्स को इस फेस्टिवल में खास तौर पर बुलाया जाता है, ताकि उनकी सोच बदले, क्योंकि उन्हें ही अपने बच्चे को सबसे पहले समझाना पड़ता है. इस अवसर पर आई सोनम कपूर का कहना है कि मैं इस फेस्टिवल मैं आकर बहुत खुश हूँ. यहाँ प्रतिभावान फिल्म निर्माता और समाज एक साथ मंच पर आते और लोगों की मानसिकता में बदलाव को प्रोत्साहित करते हैं. प्रेम की भाषा फिल्मों में हमेशा ही अलग–अलग दिखाई जाती है, प्रेम कभी किसी से करना गलत नहीं, ये अपराध नहीं. उम्मीद है ऐसे फेस्टिवल से लोगों के विचार बदलेंगे और वे भी एक सम्मानपूर्वक जीवन बिता पाएंगे.

दुबई में पहला थ्रीडी औफिस

अभी तक आप ने थ्रीडी प्रिंटर्स, थ्रीडी मूवीज के बारे में सुना होगा, यहां तक कि अभी हाल ही में रिलीज हुई फिल्म ‘जंगल बुक’ को भी आप ने थ्रीडी में खूब ऐंजौय किया होगा और आगे भी इस तरह की मूवीज आती रहें, ताकि आप को खुद को अलग तरह से ऐंटरटेन करने का मौका मिल सके. ऐसी इच्छा आप मन ही मन रखते होंगे. लेकिन क्या कभी आप के दिमाग में थ्रीडी औफिस के बारे में खयाल आया है तो 100% आप का जवाब न में ही होगा, क्योंकि आप के दिमाग में वही पुराने प्लेटफार्म पर तैयार होने वाले औफिसों की इमेज जो बनी हुई है. जिस में बैठने के लिए वही फर्नीचर जो आमतौर पर आप को हर जगह देखने को मिल जाता है, दीवारों पर भी वही पुरानी डिजाइनिंग, जिसे देख कर कुछ भी नया नहीं लगता. औफिस में नया होता है तो सिर्फ हमारे आइडियाज से किसी प्रोजैक्ट को बेहतर दिशा मिल पाती है या फिर हमारे बेहतर कार्य से कंपनी प्रौफिट में चली जाती है लेकिन बाकी सब चीजें वही पुरानी.

लेकिन आप ही सोचिए अगर आप को थ्रीडी औफिस में काम करने का मौका मिले तो कैसा लगेगा. शायद आप यह बात सोच कर ही कल्पनाओं की दुनिया में चले जाओगे. आप सोचेंगे कि जब कल्पनाएं इतनी खूबसूरत हैं तो हकीकत में कितना अच्छा लगेगा ऐसे औफिस में काम करना. असल में अब यह कल्पना नहीं बल्कि हकीकत में बदल गया है. क्योंकि दुनिया का पहला थ्रीडी प्रिंटेड औफिस दुबई में खोला गया. जब इसे लोगों ने देखा तो उन की आंखें फटी की फटी रह गईं. क्योंकि औफिस दिखने में जितना खूबसूरत था उतनी ही इस की तकनीक भी काबीलेतारीफ थी.

आप को भले ही विश्वास न हो लेकिन यह भी सच है कि इसे महज 17 दिन में तैयार किया गया. अधिकतर औफिसों को बनाने में महीनों, सालों लग जाते हैं लेकिन इसे तो महज कुछ दिनों में, जो पलक झपकते ही बीत गए में बना कर अन्य देशों के सामने दुबई की मिसाल कायम की गई है. यूएई के पीएम शेख मोहम्मद बिन राशिद ने इस का शुभारंभ करते हुए कहा कि थ्रीडी तकनीक के क्षेत्र में दुबई एक कदम आगे निकल गया है और भविष्य में दुबई में इस तरह के और भी औफिस बनाने की कोशिश की जाएगी. इस औफिस को मुंबई फ्यूचर फाउंडेशन का औफिस बनाया गया है.

डिजाइन लाजवाब

थ्रीडी तकनीक से बने औफिस से दुबई की एक अलग ही इमेज दुनिया के सामने उभर कर आई है. क्योंकि इस में न सिर्फ बिल्डिंग बल्कि बिजली, वाटर सिस्टम भी थ्रीडी तकनीक पर आधारित है. यह औफिस 2,700 वर्ग फीट में बना है. इस का बाहरी डिजाइन फ्यूचर में काम करने का माहौल कैसा होगा इस को दर्शाता है. साथ ही इसे पुराने औफिसों से हट कर एक अलग प्लेटफार्म पर तैयार किया गया है जो हमें बेहतर सोचने के साथसाथ अच्छा कार्य करने के लिए भी पे्ररित करता है, जिस से हमारे आगे बढ़ने की संभावनाएं बढ़ेंगी.

इस को इस तरह डिजाइन कर के स्पेस छोड़ा गया है ताकि वहां ऐग्जिबिशन, वर्कशौप्स और इवैंट्स आदि भी आयोजित किए जा सकें. सब से बड़ी बात हैलदी और हैप्पी ऐंवायरमैंट में काम करने का मौका मिलेगा. इसे मामूली सीमेंट से नहीं बल्कि स्पैशल मिक्सर सीमेंट से बनाया गया है और इस में यूएस में बने सैटों का इस्तेमाल किया गया है. इन सैटों की विश्वसनीयता जांचने के लिए इन का टैस्ट चीन और युनाइटेड किंगडम दोनों जगह हुआ है. सुरक्षा कारणों और बिल्डिंग लंबे समय तक टिकी रहे, के लिए इस को आर्क शेप दी गई है.

ऊर्जा की खपत कम करने के लिए नए फीचर्स यूज किए गए हैं जैसे विंडो शैड्स ऐसे लगाए हैं जो सूर्य की किरणों को अंदर आने से रोकने के साथसाथ बिल्डिंग को भी ठंडा रखते हैं. इसी के साथ मैनेजमैंट का इंफौमेशन सिस्टम भी लेटैस्ट टैक्नोलौजी से लैस है. प्रिंटर के फीचर्स फुली औटोमैटिकली हैं. इस 3डी प्रिंटर की ऊंचाई 20 फीट, लंबाई 120 फीट और चौड़ाई 40 फीट है.

क्यों लागत में सस्ता

इस पूरे प्रिंटेड प्रोसैस में प्रिंटर को औपरेट करने के लिए एक थ्रीडी प्रिंटेड विशेषज्ञ, बिल्डिंग में सैटों को फिट करने के लिए 7 व्यक्ति और 10 व्यक्तियों की एक टीम ने विद्युत और यांत्रिक इंजीनियरिंग का कार्यभार संभाला यानी 17-18 लोगों की टीम ने इस औफिस को तैयार किया. जो परंपरागत औफिसों की तुलना में काफी सस्ता था. हम कह सकते हैं कि इसे बनाने में 50% कम लेबर कौस्ट आया.

क्या है 3डी टैक्नोलौजी

3डी टैक्नोलौजी असल में 3 डायमैंशियल टैक्नोलौजी है. यह हमारी आंखों के सामने भ्रम पैदा करती है जिस के कारण चीजें हमें हर तरफ से एक जैसी दिखाई देने के साथ साथ हम उसे गहराई व करीब से महसूस भी कर पाते हैं.

भाजपा यूपी में लागू नहीं करेगी ‘असम फामूर्ला’

वैसे तो भाजपा असम में मिली जीत से बहुत उत्साहित है. असम में जिन नेताओं की अगुवाई में चुनाव लडे गये, उत्तर प्रदेश में उनके नाम के होर्डिंग लग गये. भाजपा कार्यकर्ता न केवल उनको सम्मानित करने की तैयारी में हैं, बल्कि उनकी मांग है कि उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनावों में भी असम फामूर्ला लागू किया जाये. असम में भाजपा ने मुख्यमंत्री पद के अपने उम्मीदवार को सामने रखकर चुनाव लडा था. राजनीतिक जानकार मानते है कि इसका ही भाजपा को लाभ मिला और उसकी जीत हई.

राजनीति में जो सफल हो जाता है वही हिट फामूर्ला माना जाता है. मुख्यमंत्री के चेहरे के साथ भाजपा ने दिल्ली में चुनाव लडा था. इसके बाद भी दिल्ली में भाजपा की बुरी तरह से हार हुई. तब मुख्यमंत्री के चेहरे के फार्मूला को सारा दोष दे दिया गया था. इसके बाद भाजपा ने बिहार में बिना किसी चेहरे को आगे किये विधानसभा का चुनाव लडा पर जीत हासिल नहीं हुई. अब असम में विधानसभा चुनाव जीतने के बाद एक बार फिर से मुख्यमंत्री के चेहरे को आगे करके चुनाव लडने की तरफदारी की जा रही है.

भाजपा के कुछ रणनीतिकार मानते है कि उत्तर प्रदेश में भाजपा को मुख्यमंत्री पद के प्रत्याशी को आगे करके विधानसभा चुनाव लडना चाहिये. भाजपा में संगठन स्तर पर इस बारे में कई बार गंभीरता से विचार हुआ. दर्जन भर से ज्यादा नेताओं ने अपने अपने नाम की लाबिंग शुरू करा दी. जिसकी वजह से नेताओं में आपस में टकराव शुरू हो गया. उत्तर प्रदेश की जातीय अंकगणित में कोई एक जाति ऐसी नहीं है जिसको साधने से चुनाव जीता जा सके. ऐसे में किसी एक नेता पर भरोसा करना भाजपा को सही नहीं लग रहा था. भाजपा में उत्तर प्रदेश में नेताओं के अलग अलग गुट बने है. जिसके चलते ही भाजपा प्रदेश अध्यक्ष का चुनाव करने में तमाम परेशानियां आई थी. उत्तर प्रदेश में भाजपा दलित-पिछडो के साथ ही साथ अगडों को भी पार्टी के साथ जोड के रखना चाहती है.

ऐसे में भाजपा को उत्तर प्रदेश में असम फामूर्ला रास नही आ रहा है. अब भाजपा की रणनीति है कि प्रदेश में विधानसभा चुनाव लडने के लिये एक कमेटी बनाई जाये. कमेटी में कई नेताओं को एक साथ जिम्मेदारी दी जाये. जिससे सभी नेताओं के गुटों को खुश रखने में सफलता मिल सकेगी. कमेटी बनाना सरल है पर कमेटी के अध्यक्ष का नाम तय करना मुश्किल होगा. जनता की नजर में कमेटी का अध्यक्ष ही मुख्यमंत्री का चेहरा होगा. ऐसे में भाजपा के लिये चुनाव कमेटी का अध्यक्ष तय करना मुश्किल काम है. इस नाम के लिये केन्द्रीय स्तर पर डाक्टर महेश शर्मा और स्मृति ईरानी का नाम सबसे आगे है. भाजपा इन नामों को पहले मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार भी घोषित करना चाहती थी. अब भाजपा की रणनीति है उसे मुख्यमंत्री पद के प्रत्याशी का नाम भी घोषित न करना पडे और उस दौड में शामिल लोगों को आगे भी कर दिया जाये. इसके तहत भाजपा ने असम फामूर्ला नकार दिया है ओर उत्तर प्रदेश में चुनाव प्रचार कमेटी बनाकर विधानसभा चुनाव लडेगी. कमेटी के अध्यक्ष का नाम मुख्यमंत्री पद का सबसे प्रबल चेहरा बन सकता है.

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