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फेसबुक ने ढूंढा फास्ट इंटरनेट देने का तरीका

फेसबुक की कनेक्टिविटी लैब के वैज्ञानिकों ने लाइट की मदद से फास्ट इंटरनेट देने की दिशा में बड़ी कामयाबी हासिल की है. वायरलेस डेटा ट्रांसमिशन के लिए लैब ने लाइट सिग्नल को कलेक्ट करने का तरीका ढूंढ निकाला है. अगर इस दिशा में और सफलता मिलती है तो सीधे लाइट के जरिए ही कनेक्टिविटी का रास्ता खुल जाएगा. इससे दूर-दराज के इलाकों में आसानी से वायरलेस इंटरनेट सर्विस दी जा सकेगी.

अभी हाई-स्पीड वायर्ड कम्यूनिकेशन के लिए ऑप्टिकल फाइबर्स से लेजर के जरिए इन्फर्मेशन भेजी और रिसीव की जाती है और वायरलेस नेटवर्क रेडियो फ्रिक्वेंसी से काम करते हैं. मगर कनेक्टिविटी लैब ने वायुमंडल में मौजूद लाइट सिग्नल को डिटेक्ट करने का नया तरीका विकसित किया है. इससे लाइट सिग्नल को सीधे हवा से होकर ही भेजा जा सकता है और रिसीव भी किया जा सकता है.

वायुमंडल से लेजर लाइट के जरिए इन्फर्मेशन कैरी करने से हाई बैंडविड्थ और डेटा कैपैसिटी मिल सकती है, मगर अब तक चुनौती यह थी कि छोटी सी लेजर बीम को बहुत दूर स्थित लाइट डिटेक्टर पर कैसे फोकस किया जाए. इस काम के लिए रिसर्चर्स ने 126 वर्ग सेंटीमीटर की खास सतह बनाई गई, जो हर तरफ से आने वाली लाइट को रिसीव करती है.

रिसर्चर्स ने इस खास सतह को बनाने के लिए अभी इस्तेमाल हो रहे ऑप्टिक्स के बजाय फ्लॉरेसंट को इस्तेमाल किया. इस सरफेस पर लाइट सिग्नल कलेक्ट किए गए और फिर उन्हें छोटे से फोटोडिटेक्टर पर फोकस किया. इस टेक्नॉलजी की मदद से 2 गीगाबिट प्रति सेकंड की रफ्तार से डेटा ट्रांसमिट किया जा सकता है.

लाइट आधारित इस वायरलेस कम्यूनिकेशन को फ्री-स्पेस ऑप्टिकल कम्यूनिकेशंस भी कहते हैं. इससे उन जगहों पर इंटरनेट देने की संभावना दिख रही है, जहां पर ऑप्टिकल फाइबर और सेल टावर लगाना मुश्किल या महंगा है.

कनेक्टिविटी लैब में इस तकनीक को विकसित करने वाली रिसर्च टीम को लीड करने वाले टॉबियस टाइके ने कहा, 'दुनिया का एक बड़ा हिस्सा इंटरनेट से इसलिए कटा हुआ है, क्योंकि उनके यहां वायरलेस इन्फ्रास्ट्रक्चर नहीं है. यह समस्या ग्रामीण इलाकों में ज्यादा है. यह तकनीक ऐसे इलाकों को कनेक्ट करने में मददगार हो सकती है.'

अब सिर्फ 3 दिन में बनेगा पैन कार्ड

अब सिर्फ 3 दिन के भीतर ही आपका पैन कार्ड बन जाएगा. कॉरपोरेट्स को यह सिर्फ एक दिन में जारी हो जाएगा. ज्‍यादा से ज्‍यादा लोगों को टैक्‍स के दायरे में लाने की कोशिश के तहत सेंट्रल बोर्ड ऑफ डायरेक्ट टैक्स (सीबीडीटी) ने यह कदम उठाया है. इस सुविधा के बाद पैन कार्ड बनवाना बेहद आसान हो जाएगा जिसमें काफी कम वक्त लगेगा.

सीबीडीटी के चेयरमैन अतुलेश जिंदल के मुताबिक कारोबारियों को अब एक दिन में टैन नंबर लेने में कोई दिक्कत नहीं आएगी. कारोबारी अब डिजिटल सिग्‍नेचर के जरिए टैन के लिए आवेदन कर सकते हैं. आम लोगों का पैन कार्ड आधार नंबर के जरिए तुरंत वेरिफाई कर लिया जाएगा, जिसके बाद आम लोगों को यह सिर्फ 3 से 4 दिन के भीतर मिल जाएगा.

अभी पैन कार्ड बनवाने में 15 से 20 दिन का वक्त लगता है. अब एनएसडीएल और यूटीआईएसएल की वेबसाइट पर पैन नंबर के लिए आवेदन देने पर उसे आधार नंबर के जरिए वेरिफाई किया जा सकेगा.  ऐसा करने से समय की बचत होगी और आवेदकों को उनका पैन नंबर जल्द से जल्द मिल सकेगा. रिपोर्ट के मुताबिक गौर हो कि देश भर के लाखों लोगों ने एक से ज्यादा पैन कार्ड बनवा रखे हैं. एक अभियान के तहत पूरे देश में अब तक में 11 लाख फर्जी पैन कार्ड रद्द किए जा चुके हैं.

 

नहीं रहें ड्रिबलिंग के जादूगर

काफी अर्से से लीवर की बीमारी से जूझने के बाद दुनिया को अलविदा कहने वाले हॉकी स्टार मोहम्मद शाहिद ड्रिबलिंग के मास्टर थे. उनके इसी हुनर के कारण भारत को 1980 के मॉस्को ओलंपिक में स्वर्ण पदक मिला था.

यूं तो शाहिद ने तीन ओलंपिक में भारत का प्रतिनिधित्व किया लेकिन 1980 में स्वर्ण पदक जीतनेवाली टीम का शाहिद अहम हिस्सा थे. हॉकी के जादूगर ध्यानचंद के बाद अगर किसी को इस खेल का पर्याय कहा गया तो वह शाहिद ही थे.

कला और संगीत के सिरमौर बनारस में मोहम्मद शाहिद ने खेल पताका फहरायी. उनके नायाब प्रदर्शन की बदौलत कुछ ही दिनों में बनारस उस्ताद बिस्मिल्लाह खां, रविशंकर, किशन महाराज, सितारा देवी, गिरिजा देवी के साथ शाहिद के शहर के रूप में जाना जाने लगा.

वर्ष 1982 और 1986 में देश को एशियाई खेलों में पदक दिलाने वाले शाहिद का जन्म वर्ष 1960 में 14 अप्रैल को उत्तर प्रदेश के वाराणसी में हुआ था. उन्होंने मात्र 19 वर्ष की आयु में ही वर्ष 1979 में अंतरराष्ट्रीय हॉकी में पदार्पण कर लिया था.

वे पहली बार जूनियर विश्व कप में फ्रांस के खिलाफ उतरे. इसके बाद उन्होंने मलेशिया में चार राष्ट्रों के टूर्नामेंट के दौरान वाहवाही बटोरी. शाहिद के साथ टीम के अन्य खिलाड़ी जफर इकबाल को बेहतरीन जोड़ी माना जाता था. खासतौर पर एशियाई खेलों के दौरान दोनों खिलाड़ियों का प्रदर्शन काबिलेतारीफ रहा था.

जफर ने इस खबर पर गहरा शोक व्यक्त किया है. उन्होंने कहा, “मैं शाहिद के निधन की खबर से बहुत दुखी हूं. वे मेरे सबसे करीबी टीम साथी थे और हमने मिलकर कई वर्ष साथ खेला है.“

भारतीय टीम का रियो ओलंपिक में नेतृत्व करने जा रहे गोलकीपर पीआर श्रीजेश, राष्ट्रीय बैडमिंटन टीम के कोच पुलेला गोपीचंद और देश के खिलाड़ियों ने शाहिद के निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया है.

गोपीचंद ने कहा कि “मुझे यह खबर सुनकर गहरा झटका लगा है. यह हमारे लिए ही नहीं बल्कि पूरे खेल जगत के लिए बड़ी क्षति है. शाहिद हॉकी के बेहतरीन खिलाड़ियों में से एक थे और उन्होंने अपने खेल से देश को गौरवान्वित किया था.“

श्रीजेश ने कहा, “मेरे पास तो शब्द ही नहीं है. हमने हाल ही में उनसे मुलाकात की थी और उस समय उनकी हालत बहुत गंभीर थी. भारतीय हॉकी के लिए बड़ी क्षति है.“

गीत और गजल के थे शौकीन

फुरसत के क्षणों में मुहम्मद शाहिद मुहम्मद रफी के गाने सुनते और गुनगुनाते थे. साथ गुलाम अली की शायरी के भी दीवाने थे. वह अपने खास मित्रों के साथ महफिल में खुद ही रफी के गाने गाते थे और गुलाम अली की गजल सुनाते थे. पूर्व रणजी क्रिकेटर अरविंद श्रीवास्तव ने बताया कि शाहिद भाई अपने से मिलने वालों को बिना खिलाए नहीं भेजते थे. अक्सर वह दोस्तों के साथ दावत का आयोजन करते थे.

प्रमुख खिलाड़ियों की यादें

आरपी सिंह, अंतर्राष्ट्रीय खिलाड़ी

मोहम्मद शाहिद बड़े भाई की तरह थे. उनके निधन की खबर से हतप्रभ हूं. इन द फील्ड और ऑफ द फील्ड बड़े भाई की तरह थे. मुझे उनका स्नेह भी मिला. बहुत कुछ सीखा मैने शाहिद भाई से. सबसे बड़ी बात तो यह कि वह मैच के दौरान बहुत कूल रहते थे.

राहुल सिंह, पूर्व ओलंपियन

शाहिद भाई, विवेक भइया जैसे खिलाडि़यों को यूपी कालेज के मैदान पर अभ्यास करते देखकर हॉकी सीखी. कभी शाहिद सर कभी कोच तो कभी बड़े भाई की भूमिका में रहते थे. उनकी ड्रिब्लिंग की तकनीक पर बहुत रियाज किया, लेकिन सफल नहीं हुआ.

प्रवीण सिंह, अंतर्राष्ट्रीय खिलाड़ी

दिल्ली में लगे भारतीय टीम के कैंप के दौरान शाहिद भाई साहब भी पहुंचे थे. उन्होंने टीम को कुछ आवश्यक टिप्स दिये जिसका लाभ में हॉलैंड दौरे में मिला था. अपनी एक स्टिक उन्होंने मुझे दी थी, जो आज भी मेरे लिए किसी प्रसाद से कम नहीं.

ललित उपाध्याय, अंतर्राष्ट्रीय खिलाड़ी

शाहिद सर को खेलते तो नहीं देखा, लेकिन उनके वीडियो फुटेज को देखर उनकी ड्रिब्लिंग सीखने की कोशिश की. मैंने उनकी फ्लिक और हाफ हिट भी बेहतरीन थी. उनका जाना वाकई भारतीय हॉकी के लिए बड़ी क्षति है.

खेल उपलब्धि

1979- पेरिस: हॉकी वर्ल्डकप  

1979-80- मलेशिया: अजलान शाह हॉकी (बेस्ट फारवर्ड)

1980- मास्को ओलंपिक: स्वर्ण पदक

1982- एशियाई खेल: नई दिल्ली- रजत

1982- मुंबई:  वर्ल्डकप

1984- अमेरिका: ओलंपिक

1986- लॉस एंजिल्स लंदन: वर्ल्डकप हॉकी

1988- सियोल: ओलंपिक

1981-83-85: चैंपियंस ट्राफी में भारतीय टीम का प्रतिनिधित्व

सम्मान

अर्जुन अवार्ड: 1982

पद्मश्री: 1986

यशभारती: 1995

लक्ष्मण पुरस्कार: 2006

VIDEO: बार में महिला वेट्रेस को गलत तरीके से छुआ और फिर हुआ ये…

रूस के एक होटल में एक शख्स को वेट्रेस को छेड़ना महंगा पड़ गया. हुआ ये कि बार में बैठे इस शख्स ने वेट्रेस को ऑर्डर देने के लिए अपने पास बुलाया और फिर गलत तरीके से छूने की कोशिश की. इस पर महिला वेट्रेस भड़क उठी और उसके बाद जो हुआ, वो हैरान कर देने वाला था.

नीचे लिंक पर क्लिक कर आप देखिए ये वायरल वीडियो…

http://www.sarita.in/web-exclusive/cctv-shows-waitress-fight-customer-after-he-gropes-her 

प्लेन से कम होगा बुलेट ट्रेन का किराया

मुंबई और अहमदाबाद के बीच चलने वाली पहली बुलेट ट्रेन में सफर करने के लिए पैसेंजर्स को प्लेन से कम किराया देना होगा.  ये जानकारी रेल मंत्री सुरेश प्रभु ने लोकसभा में प्रश्‍न काल के दौरान दी. इस हाईस्पीड ट्रेन से 508 किलोमीटर की दूरी सिर्फ 2 घंटे में पूरी हो जाएगी. यह प्रोजेक्ट 6 साल में पूरा कर लिया जाएगा.

जापान देगा प्रोजेक्ट की 81% रकम

– मुंबई से अहमदाबाद के बीच प्लेन का नॉर्मल किराया 1600 से 2000 रुपए के बीच है.

– बुलेट ट्रेन प्रोजेक्‍ट की अनुमानित लागत 97,636 करोड़ रुपए है.

– भारत को 81 फीसदी रकम जापान से लोन के रूप में प्राप्‍त होगी.

– बुलेट ट्रेन की मैक्सिमम स्पीड 350 किलोमीटर प्रति घंटे होगी, जबकि इसकी ऑपरेटिंग स्पीड 320 kmph होगी.

– मौजूदा समय में मुंबई-अहमदाबाद रूट पर दुुरंतो को 508 किलोमीटर तय करने में 7 घंटे लगते हैं.

– गतिमान एक्सप्रेस की अधिकतम रफ्तार 160 किलोमीटर प्रति घंटा है, जो वर्तमान में देश में चलने वाली सबसे तेज ट्रेन है.

 50 साल के लिए जापान से मिलेगा लोन

– इस प्रोजेक्‍ट के लिए जापान 0.1 फीसदी सालाना इंटरेस्ट रेट पर 50 साल के लिए लोन देगा.

– लोन एग्रीमेंट के तहत रोलिंग स्‍टॉक और अन्‍य उपकरण जैसे सिग्‍नल और पावर सिस्‍टम का जापान से इम्पोर्ट किया जाएगा.

– लोन एग्रीमेंट पर इस साल के अंत तक साइन हो सकते है.

 सरकार 200 करोड़ सेंक्शन कर चुकी है

– सरकार अब तक बुलेट ट्रेन प्रोजेक्‍ट में 200 करोड़ रुपए सेंक्शन चुकी है.

– प्रभु ने इसके पहले भी भारत के अन्‍य मेट्रो सिटीज को भी हाईस्‍पीड रेल नेटवर्क से जोड़ने की बात कही थी.

 21 किलोमीटर अंडर वाटर टनल

– जैपनीज इंटरनेशनल कॉर्पोरेशन एजेंसी (जेआइसीए) ने बुलेट ट्रेन की प्रोजेक्‍ट रिपोर्ट भारत को सौंप चुकी है.

– रिपोर्ट के मुताबिक, 508 किलोमीटर के इस रूट के बीच 21 किलोमीटर की अंडर वाटर टनल भी बनाई जाएगी. इस ट्रैक का अधिकतर हिस्‍सा एलीवेटेड होगा.

न्यायालय बनाम सरकार

नशे की बढ़ती आदत पर आंख मूंद लेने से काम नहीं चलेगा. शाहिद कपूर, आलिया भट्ट अभिनीत अनुराग कश्यप की फिल्म ‘उड़ता पंजाब’ चाहे अच्छी हो या बुरी, इस समस्या को उठाती है, तो पंजाब की भाजपा समर्थक सरकार को आलोचना से बचाने के लिए इसे काटनेछांटने की सर्टिफिकेशन बोर्ड के अध्यक्ष पहलाज निहलानी की कोशिशों को मुंबई उच्च न्यायालय ने रोक कर चिंतकों को राहत दी है. जब से देश का धार्मिक माहौल गरमाया है, संस्कृति, संस्कार, परंपरा का व्यापार चमक रहा है और जो भी इस के खिलाफ कुछ बोलता या करता है या इस की पोल खोलता है उस का जबरन मुंह बंद करने की कोशिश की जा रही है. न्यायालय आमतौर पर सरकारों पर कंट्रोल कर रहे हैं पर न्यायिक प्रक्रिया महंगी और समय लेने वाली है और इस की बड़ी कीमत देनी पड़ती है.

‘उड़ता पंजाब’ पर चली लगभग 70 कैंचियों में से केवल एक को रख कर मुंबई उच्च न्यायालय ने भले ही सरकार को जताने की कोशिश की हो कि देश पर एक सोच का राज नहीं है, पर सच यह है कि यह सरकार और सरकार द्वारा नियंत्रित संस्थाएं इस प्रकार के काम करती रहेंगी, क्योंकि यह स्पष्ट है कि आम नागरिक सही होते हुए भी सरकार से हर बार पूरी तरह टक्कर नहीं ले सकता. हर छोटे मामले पर उच्च न्यायालय में जाना और पूरे मीडिया को अपनी तरफ कर लेना संभव नहीं है. नशे के खिलाफ फिल्म ‘उड़ता पंजाब’ बनी तो है पर फिल्म वाले भी दूध के धुले नहीं हैं. आजकल फिल्मों में धड़ल्ले से शराब पीने की आदत डलवाई जा रही है. पक्की बात है कि शराब के 4-5 बड़े निर्माता करोड़ों रुपए इन फिल्म निर्माताओं को दे रहे हैं ताकि फिल्मों में शराब पीते ऐसे दिखाया जाए मानो पानी पिया जा रहा हो. पहले भी पार्टियों में शराब पीते दिखाया जाता था पर केवल खलनायक कैरेक्टरों द्वारा. अब हीरोइनें पीती हैं और कुछ मामलों में मांएं भी पीती दिखाई जा रही हैं.

नशा शराब का हो या मादक दवाओं का शुरुआत तो वहीं से होती है. पंजाब तो वह राज्य है जहां हमेशा से 6 नदियां बहती हैं, छठी शराब की. अब शराब की जगह मादक दवाओं ने ले ली है और पंजाब का हर घर ही नहीं, हर बच्चा इस का आदी हो गया है. जैसे अंगरेजों ने चीनियों को अफीमची बनाया था (हालांकि वे मात्र 5-6 फीसदी को अफीम बेच पाए थे) वैसे ही पंजाब की पूरी सरकारी फौज मादक दवाओं के लेनदेन की गंगा में नहा रही है और अपने अगले सात जन्मों के लायक पैसा जमा कर रही है. पंजाब जिस पर देश को पहले गर्व होता था आज बीमार है और इस बीमारी पर अच्छी, बुरी बकवास कैसी भी फिल्में बननी चाहिए, कहानियां लिखी जानी चाहिए.

उच्च न्यायालय ने पंजाब सरकार की इज्जत बचाने की कोशिश पर पानी फेर कुछ तो दवा गटर में डाली है.

कृषि पर कर लगाने का पीएम का इरादा नहीं

पिछले दिनों कृषि पर कर लगाए जाने की खबरों से किसानों में खलबली सी मच गई थी, मगर अब इन खबरों पर विराम लगाते हुए कृषि मंत्री राधामोहन सिंह ने कहा है कि ऐसा करने का प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का कतई कोई इरादा नहीं है. किसानों के हितों को सब से महत्त्वपूर्ण बताते हुए राधामोहन सिंह ने कहा कि फसलों का न्यूनतम समर्थन मूल्य उम्मीदों से भी ज्यादा बढ़ाया जाएगा.

प्रधानमंत्री की मृदा (मिट्टी) परीक्षण योजना को कामयाबी का जामा पहनाने में जुटे राधामोहन सिंह ने कहा कि ऐसी मशीन बनाई गई है, जिस के जरीए किसान खुद अपनी मिट्टी की जांच कर सकेंगे. यह कारगर मशीन अगले साल से किसानों को मिलनी शुरू हो जाएगी.

दलहन का उत्पादन बढ़ाने की कोशिश के तहत एक खास ऐलान करते हुए राधामोहन सिंह ने कहा कि देश में 100 से ज्यादा जगहों पर दलहन के बीज हब बनाए जाएंगे. कृषि मंत्री ने बताया कि खेती की बेहतरी के लिए इस साल देश भर में 50 नए ‘कृषि विज्ञान केंद्र’ खोलने का लक्ष्य रखा गया है.

सूखे की मार के बावजूद खेती की पैदावार में कमी न होने पर खुशी जाहिर करते हुए राधामोहन सिंह ने किसानों का शुक्रिया अदा किया. इस के लिए उन्होंने देश के कृषि वैज्ञानिकों का भी आभार जताया. उन्होंने कहा कि देश के माहिर कृषि वैज्ञानिकों ने उन्नत किस्म के उम्दा बीज तैयार किए हैं, जो कम पानी और सूखे वाले इलाकों में भी अच्छी पैदावार दे रहे हैं.

राधामोहन सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना एक बेहद महत्त्वकांक्षी योजना है. पंजाब को छोड़ कर देश के 20 खास सूबों ने प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना को लागू कर दिया है.

राधामोहन सिंह ने कहा कि इनसानों द्वारा पैदा की गई मुसीबतों और कुदरती आपदाओं के असर को कम करने की खातिर कई कदम उठाए गए हैं. उम्मीद है कि इन कदमों का बेहतर नतीजा जल्द ही सामने आएगा.

बीते 2 साल की कारगुजारियों का खुलासा करते हुए राधामोहन सिंह ने कहा कि कामकाज की रफ्तार और सरकार का मिशन काबिलेगौर है. विकास की नईनई योजनाएं बनाई गई हैं. कृषि उत्पाद का लागत मूल्य घटाना और किसानों की आमदनी बढ़ाना, सरकार के लिए बड़ी चुनौतियां थीं. इन से निबटने के लिए सरकार ने कारगर कोशिशें की हैं.

किसानों की आमदनी दोगुनी करने के लिए सरकार कृषि के साथ उस से जुड़े उद्यमों को खास तरजीह दे रही है. कृषि मंत्री का कहना है कि अपनी आमदनी बढ़ाने के लिए किसान खेती के साथसाथ पशुपालन, मधुमक्खीपालन और मत्स्यपालन जैसे काम भी कर सकते हैं. किसानों को रियायती दरों पर पर्याप्त कर्ज भी मुहैया कराया जा रहा है.        

 

ड्रौप करें तो टौप करें

आज के प्रतियोगी युग में अमूमन विद्यार्थी पहले से ही अपना लक्ष्य निर्धारित कर के चलते हैं और उसी के अनुसार कोर्स का चयन भी करते हैं, लेकिन मनचाहे कोर्स में ऐडमिशन के लिए, प्रतियोगी परीक्षा में अच्छी रैंक न आने के चलते वांछित कोर्स में ऐडमिशन से वंचित रह जाते हैं. ऐसे में अधिकतर विद्यार्थी अपना मन बदल कर किसी दूसरे कोर्स या क्षेत्र का रुख कर लेते हैं, लेकिन कुछ इरादे के पक्के या अपनी राह न बदलने की चाह रखने वाले विद्यार्थी एक साल ड्रौप कर मनचाहा कोर्स पाना चाहते हैं. उन का मानना है कि वे इस बार ड्रौप कर 12वीं में अगले वर्ष जरूरत अनुसार अच्छे अंक लाएंगे तो उन्हें मनचाहा कोर्स अवश्य मिल जाएगा.

मन बना कर किसी कोर्स के लिए तैयार होना व अपना लक्ष्य निर्धारित करना बुरा नहीं. उस के लिए एक बार असफल रहने पर दोबारा प्रयास भी सराहनीय कदम है, लेकिन तभी जब विद्यार्थी लगन व मेहनत से पिछले वर्ष से भी अधिक पढ़ाई करें. देखने में आता है कि अधिकतर इस तरह के विद्यार्थी ड्रौप तो कर लेते हैं पर अगले वर्ष फिर उसी लचीलेपन से तैयारी करते हैं व पूरे वर्ष का समय मिलने के बावजूद आज नहीं कल जैसी बातों पर चलते हुए आखिर में उसी स्तर की तैयारी तक सीमित रह जाते हैं जैसी पिछले वर्ष की थी. नतीजा वही ढाक के तीन पात. कभीकभी तो वे पिछले वर्ष से भी कम अंक ला कर अपना माथा पीट लेते हैं. ऐसे में उन के पास सिवा पछतावे के कुछ नहीं रहता. ऐसे विद्यार्थी जो साल ड्रौप कर रहे हैं उन के सामने पिछले वर्ष वाला वही कोर्स है, उन्होंने तैयारी भी कर रखी है. नोट्स भी उन के पास हैं, टीचर्स, पढ़ाई व ऐग्जाम के पैटर्न से भी वे वाकिफ हैं, तो फिर कमी क्यों, बल्कि उन्हें तो ड्रौप कर टौप करना चाहिए.

ड्रौप करना साल की बरबादी न बने

जब विद्यार्थी यह सोच कर ड्रौप करते हैं कि अगले वर्ष हम इस से भी अच्छा प्रदर्शन कर के दिखाएंगे ताकि अपने मनचाहे लक्ष्य को पा सकें, तो उन्हें पिछले वर्ष से अच्छी तैयारी करनी होगी ताकि ड्रौप करने का फायदा हो. ऐसा न हो कि पिछले वर्ष की भांति फिर वैसी ही तैयारी करें और अपना मनचाहा लक्ष्य पाने से वंचित रह जाएं. ऐसे में ड्रौप करना उज्ज्वल भविष्य की राह खोलने के बजाय साल बरबादी का ही कारण बनेगा, जिस का आप को हमेशा मलाल रहेगा.

कमियों को पहचानें

अगर आप ने ड्रौप किया है तो यह तो आप जानते ही हैं कि उस का कारण क्या है. किस विषय में आप पिछड़ गए थे या किस कारण आप को मनचाहा कोर्स या रिजल्ट नहीं मिल पाया, तो आप को अपना ध्यान उस विषय पर केंद्रित करने की ज्यादा जरूरत है. साथ ही उस विषय में आप के अंक किस कारण कम आए यह भी जानने की आवश्यकता है. इस के साथ यह भी जरूरी है कि उस विषय की कमियां दूर करते हुए कहीं आप अन्य विषयों में यह सोच कर लापरवाह न हो जाएं कि इन में तो पिछले वर्ष अच्छे अंक आए थे, इसलिए इन में कम तैयारी भी चलेगी. आप का ऐसा सोचना घातक सिद्ध हो सकता है. कहीं ऐसा न हो जिस विषय में आप के कम अंक आए थे उस में तो टौप पर पहुंच जाएं और बाकियों में फिसड्डी बन जाएं. ऐसे में ड्रौप का क्या फायदा? अत: पिछले वर्ष की अपनी कमियों को पहचानें और इस वर्ष तैयारी करते हुए उन कमियों को दूर करें व ड्रौप को टौप में बदलें.

कोर्स पुराना तैयारी नई

अमूमन पहले तो मनचाहा पाने की चाह में अधिक मेहनत व पढ़ाई का संकल्प ले विद्यार्थी ड्रौप कर लेते हैं, फिर यह सोच कर कि वही कोर्स, वही किताबें तैयारी से मुंह मोड़ यह सोचते हैं कि पढ़ा हुआ ही तो है कर लेंगे, जबकि भले कोर्स वही पुराना है लेकिन तैयारी तो आप नए सिरे से कर रहे हैं, तभी तो पिछले वर्ष रह गई कमियों को दूर कर अच्छे अंक ला पाएंगे. अब तो आप हर चीज से अवगत हैं, कोर्स की हर बारीकी आप के सामने है, तो क्यों न पुराने कोर्स की नए सिरे से तैयारी करें. नोट्स बनाएं और उन बिंदुओं को भी समझें जिन्हें पिछली बार छोड़ बैठे थे. तभी तो होगा ड्रौप का फायदा.

प्रिपरेशन पैटर्न बदलें

पिछले वर्ष ऐग्जाम की तैयारी का आप का पैटर्न कैसा था इस पर गौर करें और उस के कमजोर बिंदुओं को दूर करने की सोचें. पिछले वर्ष आप को प्रिपरेशन का समय ऐग्जाम के समय ही मिला, जबकि अब आप ऐग्जाम व उस के पैटर्न से भलीभांतिपरिचित हैं. इसलिए शुरू से ही प्रिपरेशन करें व पिछले वर्ष के पैटर्न को बदल, टाइमटेबल को इस तरह बनाएं कि खेलने, खाने के साथसाथ पढ़ाई व प्रिपरेशन भी होती रहे और अंत में आप टौपर बन कर निकलें.

फेलियर नहीं हैं आप

ड्रौप कर पुरानी कक्षा में दोबारा बैठने का मतलब यह कतई नहीं कि आप फेल हो कक्षा में बैठे हैं, बल्कि अपने रिजल्ट के सुधार से है. अत: इस बात का खयाल रखें कि भले आप को अपने जूनियर्स के साथ कक्षा में बैठना है लेकिन आप किसी रूप में फेलियर नहीं हैं. इस से आप का मनोबल ऊंचा रहेगा. ऐग्जाम पैटर्न या तैयारी संबंधी बातों पर अगर नए सहपाठी आप से चर्चा करें तो बेहिचक उन्हें गाइड करें. इस से आप का भी परीक्षा में नतीजे को बेहतर करने के प्रति रुझान बढ़ेगा. ध्यान रहे इस समय आप के उत्साह में कमी नहीं आनी चाहिए.           

ड्रौप करने पर निम्न बातों का भी ध्यान रखें :

–       अपनी पिछले वर्ष की पढ़ाई व तैयारी पर गौर करें व पिछली कमियां दूर कर तैयारी करें.

–       आप के जिस विषय में कम अंक आए उस में क्या कमी रही, इस बार उसे दूर करने का प्रयास करें.

–       हर प्रश्न का उत्तर लिख कर याद करें. प्रिपरेशन के बाद ऐसा समझें कि आप परीक्षा दे रहे हैं. अत: किताब, नोट्स आदि बंद कर कोरे कागज पर प्रश्न लिखें और खुद उस का उत्तर लिखें. इस से जहां लिखने की प्रैक्टिस होगी वहीं तैयारी भी होगी.

–       हर विषय की तैयारी टाइमटेबल के अनुसार करें.

–       ड्रौप करने में सीधे ऐग्जाम की तैयारी ही शुरू हो जाती है. इस हिसाब से आप के पास पढ़ाई के बजाय परीक्षा की तैयारी का ही पूरा वर्ष है, तो जम कर तैयारी कर सकते हैं.

–       यह सोच कर तैयारी न करें कि पिछले वर्ष सब पढ़ लिया है, बल्कि नए सिरे से तैयारी करें.

इस प्रकार कुछ बातों का खयाल रख अगर आप ड्रौप ईयर में तैयारी करेंगे तो न केवल अपने वांछित विषय के अंकों में सुधार कर पाएंगे बल्कि अन्य विषयों में भी अच्छा प्रदर्शन कर पाएंगे. इस प्रकार आप ड्रौप को टौप में बदलने में कामयाब होंगे.

मिस्ड कौल में फंस न जाना

आरती के मोबाइल की घंटी बजी, अनजान नंबर देख कर उस ने सोचा कि हो सकता है कोई जानकार हो, अत: कौल अटैंड की, ‘‘हैलो.’’ दूसरी तरफ से एक मर्दाना आवाज आई ‘‘हैलो. मुझे आकाश से बात करनी है.’’ आरती के लिए फोनकर्ता बिलकुल अनजान था. वह किसी आकाश को नहीं जानती थी. लिहाजा, उसे कहना पड़ा, ‘‘सौरी, रौंग नंबर.’’

‘‘कोई बात नहीं, हम आप से ही बात कर लेते हैं. हमें आप का नाम तो नहीं पता पर आप की आवाज बहुत मधुर है. प्लीज, फोन मत रखिएगा.’’

‘‘यह क्या बदतमीजी है, कहा न रौंग नंबर है,’’ आरती सकपकाई.

‘‘प्लीज, आप इसे राइट नंबर बना दीजिए न,’’ उधर से आवाज आई. इस पर गुस्से से आरती ने फोन काट दिया. इस के बाद उस के पास अकसर इसी नंबर से फोन आने लगे. फोनकर्ता उस की तारीफ करता और उस के सामने दोस्ती का प्रस्ताव भी रखता. आरती ने तंग आ कर इस बात से अपने परिजनों को अवगत कराया. आरती के परिजनों ने उसे आड़े हाथों लिया और पुलिस की धमकी दी, तब कहीं छुटकारा मिला. आरती समझदार थी जो उस ने पहले ही अपने कदमों को संभाल लिया. टैक्नोलौजी के इस युग में कुछ शातिरों ने मिस्ड कौल को हथियार बना लिया है. ऐसे गिरोह सक्रिय हैं जो मिस्ड व रौंग कौल दे कर भोलीभाली लड़कियों को पहले अपने जाल में फंसाते हैं फिर उन का गलत इस्तेमाल करते हैं.

उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जिले के शिक्षित परिवार की पूजा को मिस्ड कौल के जाल में फंसने की कीमत अपनी जान दे कर चुकानी पड़ी. बीए की पढ़ाई कर रही पूजा के मोबाइल पर रौंग कौल आई. कौल कोई युवक कर रहा था. इस के बाद अकसर उसे ऐसी कौल्स आने लगीं. अब पूजा को भी युवक से बातें करना अच्छा लगने लगा. यह सिलसिला दोस्ती से शुरू हो कर प्यार तक जा पहुंचा. पूजा ने आंखें बंद कर उस युवक पर विश्वास कर लिया.

युवक मेरठ का रहने वाला था. उस की बातों में आ कर एक दिन पूजा अपना घर छोड़ कर उस के पास चली आई. युवक ने उसे एक होटल में ठहराया और शादी का वादा कर के उस का शारीरिक शोषण किया, लेकिन ऐनवक्त पर विवाह करने से मना कर दिया. पूजा को एहसास हो गया कि वह बुरी तरह छली गई है. पूजा के परिजन भी उसे ढूंढ़ते हुए वहां पहुंच गए. परिवार को धोखा देने का उसे काफी पछतावा हुआ तो उस ने जहरीला पदार्थ खा कर आत्महत्या कर ली. हालांकि उस का यह कदम गलत था, इस कायरता के बजाय उसे युवक को सबक सिखाना चाहिए था.

गाजियाबाद की रहने वाली 9वीं की छात्रा दीपा बमुश्किल ऐसे गैंग के चंगुल से निकली. दीपा अकेले ट्यूशन आतीजाती थी. बेटी संपर्क में रहे इसलिए परिजनों ने उसे मोबाइल दे दिया. दीपा के मोबाइल पर अज्ञात नंबर से मिस्ड कौल आई. 2-3 बार ऐसा हुआ, तो दीपा ने पलट कर कौल कर दी. यही दीपा की सब से बड़ी गलती थी. एक युवक ने उसे अपनी दिलकश बातों के जाल में उलझा लिया. उस युवक ने दीपा को रंगीन सपने दिखाए और वह उन में खोती चली गई. फोन पर ही दोस्ती व प्यारभरी बातें हुईं. 2 महीने के इस खेल के बाद जब उस शातिर युवक को पूरा विश्वास हो गया कि दीपा अब उस के कहे अनुसार चलेगी, तो उस ने उसे घर छोड़ कर आगरा आने को कहा. यह उस की नादानी ही थी कि वह ऐसा करने के लिए तैयार हो गई.

आगरा पहुंच कर उसे पता चला कि वह छली गई है. वह जिस युवक के पास गई थी उस का नाम संजय था. उस ने अपने दोस्तों के सामने दीपा को पेश करने की कोशिश की. दीपा अपनी नादानी पर बहुत पछता रही थी. उस ने मौका पा कर अपने परिजनों को पूरी बात बताई, दीपा की बात सुनते ही परिजनों ने पुलिस को सूचित किया, पुलिस और उस के परिजनों ने उस की बताई जगह पर पहुंच कर संजय को हिरासत में ले कर दीपा को मुक्त कराया. गाजियाबाद के तत्कालीन एसपी शिव हरि मीणा के अनुसार संजय व उस के 3 दोस्त ऐसी ही नादान लड़कियों को फंसा कर उन का शोषण कर के छोड़ देते थे. इस से पहले मथुरा की एक युवती को भी वे अपने जाल में फंसा चुके थे. दरअसल, इस तरह के लोग पहले मिस्ड कौल करते हैं फिर बैक कौल का इंतजार करते हैं. यदि कोई लड़की फोन पर होती है तो चालाकी से उस से बातें करने लगते हैं और फिर उसे अपने जाल में उलझाते हैं, लेकिन अगर कोई पुरुष फोन पर होता है, तो रौंग नंबर बता कर सौरी बोलते हुए बात खत्म कर देते हैं.

ऐसा करने वाले बेहद शातिर किस्म के लोग होते हैं. बातोंबातों में युवतियों से उन के घरपरिवार की पूरी जानकारी हासिल कर लेते हैं. ऐसा वे इसलिए करते हैं ताकि पकड़े जाने का खतरा कम रहे. दूसरा मकसद उन से नकदी व आभूषण हासिल करना भी होता है. युवतियां आसानी से उस अजनबी पर विश्वास कर लेती हैं जिसे उन्होंने कभी देखा तक नहीं होता. उम्र के इस नाजुक दौर में उन्हें वह अपने सपनों का राजकुमार नजर आने लगता है. मुरादाबाद जिले में रौंग नंबर से शुरू हुई दोस्ती लव, सैक्स और धोखे में बदल गई. पुलिस ने ऐसे 2 युवकों को गिरफ्तार किया जो रौंग नंबर के जरिए युवतियों को अपने जाल में फंसाते थे, उन्हें सपने दिखा कर उन का गलत इस्तेमाल करते थे. युवक तब पकड़ में आए जब एकसाथ 4 युवतियां लापता हुईं. जांचपड़ताल में उन युवकों के कमरे से युवतियों को भी बरामद किया गया. उन की कोशिश उन्हें बेचने की थी. दोनों शातिरों ने मोबाइल के जरिए ही चारों युवतियों को प्रेमजाल में फंसाया था. यदि पुलिस समय पर नहीं पहुंचती तो पता नहीं उन युवतियों का क्या हश्र होता.

राधा अपने बुरे दिनों को याद कर के सहम जाती है जब वह रौंग नंबर के चक्कर में एक युवक के चंगुल में फंस गई थी. अकसर फोन पर लंबीलंबी बातें होतीं. जब राधा उस शातिर के प्यार में पूरी तरह फंस गई तब उस ने उसे मिलने के लिए बुलाया. दोनों एक होटल में रुके, अगले दिन वह उसे स्टेशन पर छोड़ कर लापता हो गया. राधा ने परिजनों का विश्वास और इज्जत दोनों गंवा दी थीं. रौंग कौल करने वाले अपने शिकार को जाल में फांसने के सारे हथकंडे जानते हैं, इसलिए बेहतर यही है कि मिस्ड व रौंग कौल को नजरअंदाज कर देना चाहिए.                               

ऐसे बोलते हैं डायलौग

–       मुझे आप से बात करनी है.

–       आप की आवाज तो बहुत मधुर है.

–       काश, आप मेरी दोस्त होतीं तो कितना अच्छा होता.

–       आवाज इतनी मीठी है, तो आप कितनी सुंदर होंगी.

–       आप की आवाज पर तो कोई भी मोहित हो जाए.

–       एक बार हम से दोस्ती कर के देखिए, बहुत खुश रखेंगे आप को.

–       मेरी कोई दोस्त नहीं है, एकदम अकेला हूं, प्लीज आप मेरी दोस्त बन जाएं.

–       मैं बदनसीब हूं जो आप मुझ से दोस्ती करने से इनकार कर रही हैं.

–       आप से बात कर के बहुत खुशी हो रही है.

जानकारों की राय

युवतियों को फंसाने वाले कई बार पकडे़ जाते हैं. अगर कोई बारबार मिस्ड कौल करता है या फोन कर के परेशान करता है, तो मामले को खुद सुलझाने के बजाय इस की सूचना समय रहते पुलिस को देनी चाहिए.

– रुचिता चौधरी, पुलिस अधीक्षक

जरा सी लापरवाही युवतियों पर भारी पड़ जाती है. उन्हें अपने अभिभावकों से ऐसी बातें छिपानी नहीं चाहिए. अभिभावक भी अपने बच्चों पर विशेष नजर रखें, क्योंकि सिर्फ मोबाइल दे देने से ही उन की जिम्मेदारी खत्म नहीं हो जाती.

– अतुल शर्मा, समाजसेविका

उम्र के नाजुक दौर में छोटीछोटी बातें हमें अपनी ओर आकर्षित करती हैं. भावनात्मक रूप से युवतियों को बहलाना आसान होता है, इसी का फायदा ऐसे लोग उठाते हैं. लकीर पीटने से अच्छा है कि लड़कियों से अभिभावकों को खुल कर बात करनी चाहिए.

– डा. सुभाष सिंह, चिकित्सा अधीक्षक

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