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नरसिंह की जगह प्रवीण को ओलंपिक का टिकट

अगले महीने से ब्राजील के रियो में होने वाले ओलंपिक से पहले ही भारतीय दल के नरसिंह यादव के डोप टेस्ट में फंसने की वजह से बड़ा झटका लगा है. डोपिंग एजेंसी नाडा की अनुशासन समिति के सामने पेश होने से पहले ही प्रतिबंधित दवाएं लेने के आरोपी पहलवान नरसिंह यादव का पत्ता कट गया है.

रेसलिंग फेडरेशन ने नरसिंह की जगह प्रवीण राणा को ओलंपिक का टिकट दे दिया है. ये सब तब हुआ जब नाडा में नरसिंह के केस की सुनवाई होनी है.

ओलंपिक रिंग में उतरने से पहले ही देश के सुल्तान नरसिंह यादव का रियो ओलंपिक में जाने का सपना टूट गया है. डोपिंग की जांच करने वाली एजेंसी ‘नाडा’ नरसिंह यादव के मामले की सुनवाई करने वाली है.

डोप टेस्ट में फेल नरसिंह यादव के पास अनुशासन समिति के सामने बेगुनाही साबित करने का मौका है लेकिन उससे पहले ही रेसलिंग फेडरेशन ने प्रवीण राना को नरसिंह यादव की जगह ओलंपिक का टिकट दे दिया है.

राष्ट्रीय डोपिंग निरोधक एजेंसी यानि नाडा की जांच में नरसिंह के ‘ए’ और ‘बी’ दोनों नमूनों में प्रतिबंधित मेथेंडाइनोन नाम का स्टेरॉयड मिला है. नरसिंह का आरोप है कि उनके खाने में साजिश के तहत किसी ने ये स्टेरॉयड मिला दिया था.

नरसिंह यादव का मामला बहुत जटिल है. नाडा ने अगर उनके साथ साजिश की बात मान भी ली तब भी नरसिंह यादव ओलंपिक में नहीं जा पाएंगे क्योंकि प्रतिबंधित दवाएं उनके शरीर के अंदर हैं और वो तब तक खेल नहीं पाएंगे जब तक शरीर दवा मुक्त न हो जाए.

वहीं डोपिंग के आरोपों में फंसे पहलवान नरसिंह यादव ने थाने में लिखित शिकायत भी दर्ज करा दी है. नरसिंह ने थाने में कहा, ‘मेरे खाने में कुछ मिलाया गया था इसकी जांच होनी चाहिए.’

नरसिंह की उम्मीद बरकरार

हालांकि प्रवीण राणा का नाम दिए जाने के बाद भी ऐसी उम्मीदें बनी हुई हैं कि अब भी नरसिंह ओलंपिक में जा सकते हैं. अगर नरसिंह डोपिंग के आरोप से बरी हुए तो उन्हें ओलंपिक में खेलने का मौका मिल सकता है. प्रवीण का नाम अभी इसलिए दिया गया है ताकि ओलंपिक में कोटा बना रहे.

कौन हैं प्रवीण राणा?

23 साल के प्रवीण राना फ्री स्टाइल रेसलर हैं. 66 से 74 किलोग्राम में दांव लगाते हैं. प्रवीण राणा को पहलवान सुशील कुमार का चेला भी माना जाता है.

2014 के एशियन एम्स में सुशील कुमार चोट के कारण नहीं खेल पाए थे तो उनकी जगह प्रवीण राना को मौका मिला था. प्रवीण राणा इससे पहले अमेरिका में 2014 में हुए रेसलिंग टूर्नामेंट में गोल्ड मेडल जीत चुके हैं. प्रवीण ने साल 2015 में 70 किलोग्राम में इटली में भी गोल्ड मेडल जीता था.

प्रवीण राणा की उपलब्धियां

2012 में नई दिल्ली में पहले हरी राम इंडियन ग्रां प्रि टूर्नामेंट में स्वर्ण पदक

2010 में रोहतक में जूनियर नेशनल कुश्ती चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक

2010 में रांची में 55वीं सीनियर कुश्ती चैंपियनशिप में कांस्य पदक

2008 में उबेकिस्तान में कैडेट एशियन कुश्ती चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक

2008 में पुणे में तीसरे राष्ट्रमंडल युवा खेलों में स्वर्ण पदक

नरसिंह मेरा अपना छोटा भाई: सुशील कुमार

इसी बीच पहलवान सुशील कुमार ने भी नरसिंह विवाद में पहली बार खुलकर बात करते हुए कहा कि वो नरसिंह को अपना छोटा भाई मानते हैं और उनपर लग रहे तमाम साजिश के आरोप पूरी तरह से गलत हैं.

ओलंपिक में जाने को लेकर सुशील और नरसिंह में था विवाद

74 किग्रा भार वर्ग में नरसिंह यादव ने क्वालीफाई किया था. जिसके बाद सुशील कुमार का रियो ओलंपिक में जाने का रास्ता रुक गया था. जिसके सुशील ने इस मामले को लेकर खेल मंत्रालय से लेकर डब्ल्यूएफआई और कोर्ट तक गुहार लगाई थी.

सुशील कुमार चाहते थे कि नरसिंह से उनका ट्रायल्स करा दिया जाए और जो इस मुकाबले को जीते उसे रियो ओलंपिक में भेज दिया जाए. अंत में सुशील कुमार को कोर्ट में हार का सामना करना पड़ा और नरसिंह को ओलंपिक का टिकट मिला था.

नरसिंह यादव के खाने में कथित दवाई मिलाने वाले आरोपी की पहचान

भारतीय कुश्ती संघ के अध्यक्ष ब्रजभूषण सिंह ने कहा कि सोनीपत कैंप में नरसिंह यादव के खाने में कथित दवाई मिलाने वाले आरोपी की पहचान कर ली गई है. भारतीय कुश्ती संघ के मुताबिक जिस आरोपी की पहचान की गई है, वह एक सीनियर अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी का भाई है और छत्रसाल अखाड़े में प्रैक्टिस करता है. हालांकि सुशील कुमार के मुद्दे पर उन्होंने कुछ भी नहीं कहा. साई सेंटर के रसोइये ने भी इस आरोपी की पहचान की है.

कुश्ती संघ के मुताबिक, पहचाने गए लड़के ने नरसिंह के खाने में दवाई मिलाने की बात भी मानी है. नरसिंह पहले दिन से ही कह रहे हैं कि उन्हें किसी साजिश के तहत फंसाया गया है.

ब्रजभूषण सिंह पहले ही पहलवान नरसिंह यादव के समर्थन में ऐलान कर चुके थे कि नरसिंह के खिलाफ साजिश हुई है. सिंह ने तो यहां तक आरोप लगाया कि सोनीपत के कैंप में नरसिंह के साथ कोई साजिश की गई.

सिंह ने नरसिंह की तारीफ करते हुए कहा था कि 50 से ज्यादा कुश्ती लड़ चुके नरसिंह ने कभी भी डोप टेस्ट देने से मना नहीं किया. कई खिलाड़ी यह टेस्ट देने से मना करते हैं.

उन्होंने कहा कि नरसिंह की इस बात की सभी जगह तारीफ होती है और यहां तक की खुद नाडा भी नरसिंह की इस बात के लिए तारीफ कर चुका है. फेडरेशन का आरोप था कि 5 जून को खाने में छौंक लगाते समय प्रतिबंधित दवा डाली गई.

ऐसे परिवार कैसे खुश रह सकता है

स्वास्थ्य में सुधार और लंबी आयु तक जीना अब नई समस्याएं पैदा कर रहा है. घर में पला बेटा बड़ा होने के बाद विवाह और बच्चों के बाद घर में और ज्यादा जगह चाहता है, तो मातापिता जिन्होंने अपने पैसे से मकान बनाया हो अपने क्षेत्र को खाली करने को तैयार नहीं होते. दिल्ली के तिलक नगर इलाके में पहली मंजिल पर रह रहे बेटेबहू के खिलाफ एक 65 वर्षीय मां को अदालत का दरवाजा खटखटाना पड़ा कि बेटे बहू को घर से निकालो. अदालत ने थोड़ा समय तो लिया पर फिर फैसला दिया कि बेटाबहू मकान खाली करें, पिछले सालों का किराया दें और आगे हर माह 10 हजार मां को दें. यह निर्णय निचली अदालत का है और हो सकता है कि अपील में बेटेबहू को रहने की अनुमति मिल ही जाए.

ऐसे मामले नए नहीं हैं. सदियों से चले आ रहे हैं जब बेटाबहू वृद्ध मातापिता या दादादादी को घर से बाहर निकालते रहे हैं. अब ऐसे मामले चौंकाने वाले बन रहे हैं, क्योंकि अब मिल्कीयत निकाले गए की होती है. हिंदू अविभाजित संपत्ति कानून में बेटे का पैतृक संपत्ति पर हक पैदा होते ही हो जाता था और पिता के मरने के बाद वह हक बेटों में बंट जाता था और तब न तो मां को कुछ मिलता था न ही बहनों को.

अब संपत्ति पर मां का भी हक है और बहनों का भी. बहुत मामलों में जो मकान, शेयर, जमापूंजी होती ही मां के नाम है और बेटाबहू लालच में सेवा करते हैं, फर्ज या प्यार में नहीं. मांबेटे का प्यार तो स्वाभाविक होना चाहिए पर कई बार बहू की जिद के तो कई बार मां के अहम के कारण मनमुटाव बहुत बढ़ जाता है. आज के युग में मांओं को अनपढ़ नहीं माना जा सकता. उन्हें ही समझना होगा कि व्यवहार ऐसा हो कि चाहे बेटाबहू उन के घर में रहते हों, वे मिल्कीयत का सवाल ही न उठाएं.

खानेपीने में, घूमने में, रीतिरिवाजों पर आदरसम्मान के सवालों को ले कर सवाल खड़ा करना गलत होगा. बड़ा होता बेटा एक बिछुड़े रिश्तेदार की तरह हो जाता है. उस की अपनी जिंदगी होती है, अपनी जिम्मेदारियां होती हैं, अपनी परेशानियां होती हैं. बेटे को मां और पत्नी की चक्की में न पीसा जाए, क्योंकि बेटा वैसे ही आर्थिक व सामाजिक चक्कियों का शिकार होता है. समर्थ मांओं को बेटेबेटियों पर सीमित ही विश्वास करना चाहिए, क्योंकि वे अपनी जिंदगी में क्या कर रहे हैं और कौन से जोखिम ले रहे हैं, यह आमतौर पर पता नहीं चलेगा.

आज आयु 85-90 साल तक की हो गई है और 60 के बाद प्लानिंग कर ली जानी चाहिए, केवल वृद्धों को ही नहीं, बच्चों को भी. बच्चों को यह नहीं भूलना चाहिए कि जब वे अपने बुढ़ा रहे मातापिता से झगडे़ंगे तब तक उन के अपने बेटे बेटियां भी समझदार हो गए होंगे और इतिहास दोहराया जा सकता है. परिवार में एक स्वस्थ परंपरा बनी रहे, उस की जिम्मेदारी सब की है.

मीटू ने भारत में लॉन्च किया ब्यूटीप्लस मी

विश्व के अग्रणी फोटो रीटच और वर्चुअल मेकअप एप डेवलपर्स में से एक मीटू ने आज भारत में गूगल प्ले पर ब्यूटीप्लस मी के लॉन्च की घोषणा की. ब्यूटीप्लस मी यूजर्स  को आसानी से खूबसूरत और नेचुरल दिखने वाली फोटो सेल्फी लेने की सुविधा देता है.

इस एप में यूजर्स  को अपने चेहरे के धब्बे मिटाने, त्वचा को चिकना बनाने, आंखों में चमक लाने, दांतों में सफेदी लाने, फिल्टर ऐड करने और स्पेशल इफेक्ट्स डालने सहित काफी कुछ करने की सुविधा मिलेगी.

यह ऐप एक ही स्थान पर ‘आपके पॉकेट में मेकअप’ के सभी साधन उपलब्ध कराएगा और हर लड़की का बेस्ट फ्रेंड साबित होगा. एंड्रॉयड यूजर्स  के लिए यह एप डाउनलोड के लिए उपलब्ध हो चुका है.

दुनिया भर में 120 मिलियन से अधिक मोबाइल उपकरणों पर इंस्टॉल किया जा चुका ब्यूटीप्लस, विश्व के सबसे मशहूर फ्री फोटो रीटच एप्स में शामिल हो चुका है. इसके लाइट वर्जन – ब्यूटीप्लस मी के लॉन्च होने के बाद मीटू को भारत में सेल्फी लेने वाले यूजर्स  के बड़े वर्ग से जुड़ने की उम्मीद है, जिनके लिए सीमित फोन मेमरी और मोबाइल कनेक्टिविटी से कई सारे एप्स डाउनलोड व इंस्टॉल करना अकसर मुश्किल हो जाता है.

इस लॉन्च पर टिप्पणी करते हुए भारत में मीटू के कंट्री मैनेजर रवीश जैन ने कहा, “स्मार्टफोन वृद्धि के मामले में भारत दुनिया के सबसे अधिक सक्रिय बाजारों में से एक है, फिर भी यहां के लाखों उपभोक्ता कई सारे अच्छे एप्स का अनुभव नहीं कर पाते. सिर्फ इसलिए क्योंकि उनके फोन इन एप्स को डाउनलोड करने के योग्य नहीं होते.

इस समस्या का हल करने के लिए, हमने फोन उपभोक्ताओं की मदद से कई महीनों तक काम किया और ब्यूटीप्लस मी तैयार किया. यह एक हल्का एप है जो हमारे बेहद लोकप्रिय सेल्फी एडिटिंग फीचर्स में बिना कोई समझौता किये पहले जैसा अनुभव प्रदान करेगा.”

ब्यूटीप्लस मी की सेल्फी को परफेक्ट बनाने वाली विशेषताओं में शामिल है:

एडवांस्ड फेशियल रिकग्निशन

ब्यूटीप्लस मी आपके चेहरे की बनावट के आधार पर खुद ही सबसे अच्छे फिल्टर और रीटच इफेक्ट डालता है, जिससे एक ही क्लिक में आपकी सेल्फी शानदार बन जाती है.

लाइव ऑटो रीटच (न्यू)

आधुनिक और विकसित रीयल्टी टूल्स के इस्तेमाल से ब्यूटीप्लस मी के यूजर्स अपनी फोटो खींचने से पहले विभिन्न रीटच टूल्स को आजमा कर देख सकते हैं.

स्किन रीटचिंग और स्मूथिंग

हमारे एक्सक्लुसिव स्मूथिंग मेकओवर टूल से अपनी स्किन टोन को रीटच करें, वहीं हमारे ब्लेमिश रीमूवर चेहरे पर मुंहासे व अन्य समस्याओं को एक ही टच से मिटा देंगे.

आई परफेक्टिंग

आंखों की सूजन, डार्क सर्कल को हटाए और आंखों में चमक लाते हुए सेल्फी में आकर्षण लाएं.

स्माईल एन्हान्सिंग

एप का टीथ वाइटनिंग टूल मुस्कान को प्राकृतिक सुंदरता प्रदान करता है, ताकि यूजर्स  एक साफ – सुथरी मुस्कान के साथ हर बार परफेक्ट सेल्फी ले सकें.

डायरेक्ट सोशल शेयर

यह एप इंस्टाग्राम, फेसबुक, ट्विटर और वॉट्सएप सहित अन्य कई सारी मशहूर सोशल मीडिया साइट्स पर सेल्फी को तुरंत शेयर करने की सुविधा देता है.

भाजपा के बूढ़े कर रहे नाक में दम

दरअसल में सक्रियता क्या होती है यह अब मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल गौर भाजपा संगठन और सरकार को दिखा रहे हैं, जिन्हें मंत्री मण्डल के हालिया फेरबदल में उम्र का हवाला देकर मंत्री पद से चलता कर दिया गया था. तब तो इस एकाएक ही हुये इस हमले के माने न समझते हुये पार्टी की साख रखने गौर ने बेमन से इस्तीफा दे दिया था, लेकिन अपनी बात रखने से चूके नहीं थे कि आखिर उम्र का सक्रियता से संबंध क्या मैं फिट हूँ और बेहतर तरीके से काम कर रहा हूँ, कमोबेश यही बात उनके साथ निकाले गए वरिष्ठ मंत्री सरताज सिंह ने भी मय दलीलों के कही थी लेकिन कोई सुनवाई आलाकमान ने नहीं की थी.

अब बाबूलाल गौर को समझ आ रहा है कि यह कोई नियम नहीं था, बल्कि सीएम शिवराज सिंह की इच्छा थी. इस बेइज्जती से तिलमिलाए गौर ने एक सधे और तजुर्बेकार नेता की तरह अक्ल से काम लिया और गुस्से में पार्टी से इस्तीफा नहीं दिया, बल्कि अब एक आम विधायक की तरह विधानसभा में बैठकर सरकार की चिंदियां तो उड़ा ही रहे हैं, साथ ही  दूसरे उपेक्षित बूढ़े नेताओं से पींगे बढ़ाकर भाजपा वेटर्न पार्टी भी अघोषित तौर पर बनाने में जुट गए हैं, जिसका मकसद शिवराज सिंह की जितनी हो सके सरदरदियां बढ़ाना है, फिर चाहे तो पार्टी उन्हे पार्टी विरोधी गतिविधियों का आरोप लगाकर पूरी तरह बाहर कर दे इसकी परवाह उन्हें नहीं.

एक सामाजिक कार्यक्रम में शिरकत करने वे विदिशा गए तो पूर्व वित्त मंत्री राघव जी भाई के घर खासतौर से मिलने गए, जिन्हें अपने नौकर राजकुमार के कथित यौन शोषण के आरोप के चलते बाहर का रास्ता दिखा दिया गया था, तब से भाजपा में राघव जी की हालत अछूतों सरीखी हो गई थी. गौर के उनके घर जाने से सूबे में यह चर्चा बड़े दिलचस्प तरीके से हो रही है कि ये बुजुर्ग अब भस्मासुर बनने वाले हैं, इन्हे रोकने अब कौन सा नया नियम लाया जाएगा यह शिवराज सिंह और भाजपा आलाकमान के लिए एक चुनौती वाली बात है.

इस का एहसास उस वक्त विधानसभा में हुआ जब गौर ने सरकार को घेरते कई मुद्दों पर कटघरे में खड़ा कर दिया. एक तेज तर्रार मंत्री माया सिंह को तो उन्होने लताड़ लगा दी कि आपके जबाब पर मुझे तरस आ रहा है. अपने प्रशासनिक अनुभव का इस्तेमाल करते उन्होने कहा कि प्रदेश की वित्तीय हालत खस्ता है, उस पर 1 लाख 40 हजार करोड़ रुपये का कर्ज है, उसका कुल बजट 1 लाख 58 हजार करोड़ रुपये का है, ऐसे में 15 करोड़ की नई गाडियां खरीदना कौन सी बुद्धिमानी की बात है. सस्ती गाडियां भी तो खरीदी जा सकती थीं, ऐसी फिजूलखर्ची के कई उदाहरण विस्तार से देते वे यह बताने में कामयाब रहे कि सरकार पैसा फूँक रही है खर्च नहीं कर रही.

गौर आरोप लगा रहे हैं या सुझाव दे रहे हैं यह तो वही जानें लेकिन उन्हे भाजपा के शिवराज पीड़ितों का प्रत्यक्ष/अप्रत्यक्ष समर्थन मिल रहा है. उधर कांग्रेसी भी खुश हैं कि चलो सरकार की बखिया उधेड़ने एक मजबूत सहारा और साथ तो मिला. अब प्रदेश की राजनीति का आकर्षण बनते जा रहे ये बूढ़े और कौन से नए गुल खिलाएँगे इसकी चर्चा पूरी शिद्दत और दिलचस्पी से सूबे में है.  

 

एक गलती से बंद हो सकता है फेसबुक, वॉट्सऐप

कई बार आपके एंड्रॉइड फोन में ऐप्स काम ना करने की समस्या सामने आती है. अक्सर देखा गया है कि फोन में वॉट्सऐप या फेसबुक या कोई अन्य सोशल मीडिया ऐप नहीं चलता है. ज्यादातर फोन में सेटिंग्स बिगड़ जाने के कारण ऐसा होता है.

कई बार वॉट्सऐप के नोटिफिकेशन नहीं आते, फोटोज उड़ जाती हैं या फेसबुक पर वीडियो नहीं चलते, ऐसी कॉमन समस्याओं को आप भी सेटिंग्स चेक कर ठीक कर सकते हैं.

हम आपको बताने जा रहे हैं कुछ ऐसी ही सेटिंग्स के बारे में जिनके बिगड़ जाने पर सोशल मीडिया ऐप्स या कोई भी कॉमन ऐप बंद हो सकता है.

कौन सी हैं वो सेटिंग्स…

सबसे कॉमन गलती जो लोग कर बैठते हैं वो है इंटरनेट से काम करने वाले ऐप्स का बैकग्राउंड डाटा ऑफ करना. इससे फायदा ये होता है कि डाटा पैक कम खर्च होता है, लेकिन नुकसान ये होता है की ऐप्स बैकग्राउंड में काम करना बंद कर देता है.

उदाहरण के तौर पर अगर आपने अपने फोन का बैकग्राउंड डाटा बंद कर दिया तो वॉट्सऐप का ना तो नोटिफिकेशन आएगा और ना ही कोई मैसेज. जब तक आप वॉट्सऐप को ओपन कर उसे 20 सेकंड तक खुला नहीं रखेंगे कोई मैसेज आपको डिलिवर नहीं होगा.

साथ ही अगर आपने कोई मैसेज किया है या कोई फोटो भेजी है जो सेंडिंग मोड पर है और आपने ऐप बंद कर दिया तो भी वो मैसेज आपकी तरफ से नहीं जाएगा.

कैसे करें ठीक

अगर आपने बैकग्राउंड डाटा बंद कर रखा है तो Settings>Data Usage> Whatsapp पर जाएं. यहां जाकर Restrict Background Data ऑप्शन को अनचेक कर दें. अगर ये पहले से ही अनचेक है तो Settings>Application settings> Whatsapp पर जाकर Show Notifications ऑप्शन देखें. अगर ये अनचेक है तो इसे चेक कर दें. ऐसा ही फेसबुक के साथ भी करें. 

अगर ऐप गलती से Disable हो गया तो

ऐसा अक्सर फेसबुक ऐप के साथ होता है. फेसबुक के अलावा भी जो भी ऐप फोन में पहले से ही इंस्टॉल होकर आया है उसे गलती से डिसएबल कर दिया गया तो वो काम नहीं करेगा.

कैसे करें ठीक

सबसे पहले Settings>Application Manager पर जाएं. इसके बाद मान लीजिए फेसबुक काम नहीं कर रहा है तो उसकी सेटिंग्स पर जाइए और Enable App ऑप्शन देखिए. अगर ये सेटिंग सही होगी तो Disable App ऑप्शन दिखाई देगा. अगर Enable का ऑप्शन आ रहा है मतलब आपने ऐप बंद करके रखा है. कुछ फोन्स में Disable और Enable की जगह Turn On, Turn Off ऑप्शन भी हो सकते हैं.

अगर गलती से सिलेक्ट कर दिया Clear Data

अगर आप नहीं चाहते की वॉट्सऐप की सारी फोटोज या फेसबुक की सारी सेटिंग्स चली जाएं और आपको ऐप दोबारा से इंस्टॉल करना पड़े तो Clear Data ऑप्शन पर कभी क्लिक ना करें. ये ऑप्शन Settings> Application Manager पर ऐप सेटिंग्स के अंदर मिलेगा.

इस ऑप्शन पर क्लिक करते ही ऐप का सारा डाटा डिलीट हो जाता है. इसके पहले एक वॉर्निंग मैसेज भी दिया जाता है. अगर आपने डाटा क्लियर कर दिया है तो वॉट्सऐप को रीइंस्टॉल करना होगा. इसके बाद इंस्टॉल बैकअप ऑप्शन पर क्लिक करना होगा. इससे पुराने मैसेज और फोटोज वापस मिल सकते हैं.

Force stop पर क्लिक कर दिया तो

अगर आपने फोर्स स्टॉप ऑप्शन पर गलती से क्लिक कर दिया है तो ऐप काम करना बंद कर देगा. इसके बाद उसे या तो फोर्स स्टार्ट करना होगा या फिर वो ऑटो अपडेट के बाद अपने आप स्टार्ट होगा.

इसे ठीक करने के लिए

Settings> Application Manager पर जाएं. जो ऐप काम नहीं कर रहा है उस ऐप पर क्लिक करें और फोर्स स्टार्ट ऑप्शन सिलेक्ट करें. ऐप काम करने लगेगा. अगर इसके बाद भी ऐप काम नहीं कर रहा है तो गूगल प्ले स्टोर पर जाकर उसके अपडेट्स इंस्टॉल करें. कई बार अपडेट इंस्टॉल ना करने के कारण भी ऐसा होता है.

अपडेट्स अनइंस्टॉल कर दिया तो

वॉट्सऐप और फेसबुक जैसे सोशल मीडिया ऐप्स के साथ ये दिक्कत होती है कि अगर उन ऐप्स की अपडेट्स आपने डाउनलोड नहीं की तो वो बंद हो जाते हैं. इसी के साथ, अगर गलती से आपने अपडेट्स अनइंस्टॉल कर दी है तो भी ये ऐप्स काम नहीं करेंगे.

इसलिए अगर आपका कोई ऐप काम नहीं कर रहा है तो सबसे पहले गूगल प्ले पर जाकर सेटिंग्स में जाएं और ऐप अपडेट्स देखें. अगर ऐप अपडेट करने को दिखा रहा है तो उसे अपडेट कर लें. नए अपडेट्स से बग्स भी दूर होते हैं और इससे ऐप्स सही से काम करते हैं. 

13 सरकारी तेल कंपनियां हो जायेंगी 1

केंद्र सरकार अपनी 13 ऑइल कंपनियों को मिलाकर एक विशाल कंपनी बनाने पर चर्चा शुरू करने जा रही है. अगर ऐसा हुआ तो इन कंपनियों के साथ आने के बाद जो कॉर्पोरेशन वजूद में आएगी, उसका रेवेन्यू ग्लोबल ऑइल दिग्गज शेवरॉन से भी अधिक होगा. यह कंपनी फॉर्च्यून 500 रैंकिंग में अमेरिका की दिग्गज फर्म जनरल इलेक्ट्रिक को टक्कर देगी.

सूत्रों ने बताया कि 13 सरकारी ऑइल कंपनियों को मिलाने के बाद बनने वाली फर्म का रेवेन्यू रूस की दिग्गज सरकारी ऑइल फर्म रोजनेफ्ट और रिलायंस इंडस्ट्रीज से अधिक होगा. उन्होंने कहा कि टर्नओवर, प्रॉफिट, कैपिटल एक्सपेंडिचर और मार्केट कैपिटलाइजेशन के लिहाज से मेगा कॉर्पोरेशन देश में सबसे आगे होगी. ऑइल मिनिस्ट्री ने इस बारे में कमेंट करने से मना कर दिया. ऐसे ही एक प्रपोजल पर पहले भी विचार हो चुका है.

सरकार की 13 ऑइल कंपनियों में ओएनजीसी सबसे बड़ी कंपनी है. प्रस्तावित मर्जर के लिए जिन कंपनियों के नाम के बारे में सोचा जा रहा है, उनमें आईओसी, बीपीसीएल, एचपीसीएल, गेल, मैंगलोर रिफाइनरी ऐंड पेट्रोकेमिकल्स, चेन्नई पेट्रोलियम, नुमालीगढ़ रिफाइनरी और ऑइल इंडिया शामिल हैं. भारत की टॉप 6 सरकारी ऑइल कंपनियों की मार्केट वैल्यू 77 अरब डॉलर है. अगर 13 कंपनियों को मिलाया गया तो उसका मार्केट कैप रूस की रोजनेफ्ट के 55 अरब डॉलर से अधिक होगा और 112 अरब डॉलर की ब्रिटेन की बीपी पीएलसी को भी यह कंपनी टक्कर देगी. भारत की सभी सरकारी ऑइल कंपनियों का मुनाफा 45,500 करोड़ रुपए और रेवेन्यू 9,32,000 करोड़ रुपए रहा था.

बजाज वी15 लॉन्च कर सकता है पॉवरफुल वर्जन

बजाज अपनी लेटेस्ट और बेहद कम वक्त में पॉप्युलर होने वाली नई बाइक बजाज वी15 की अबतक भारत में 1 लाख से ज्यादा यूनिट बेच चुकी है. सेल्स का यह आंकड़ा अपने आप में एक रिकॉर्ड है.

इस बाइक को बजाज ने भारत में कुछ ही महीने पहले लॉन्च किया था. बजाज को पूरे देश से इस बाइक के लिए ऐतिहासिक प्रतिक्रिया मिल रही है.

वी15 को मिलने वाला रेस्पॉन्स इस हद तक था कि इस बाइक की 20 हजार बुकिंग्स तो लॉन्चिंग के पहले सप्ताह में ही हो गई थीं. यह बाइक लॉन्चिंग से महज 2 महीनों में ही भारत की टॉप 10 बाइक में जगह बनाने में कामयाब रही.

इस बाइक को भारतीय बाजार में कम वक्त में पॉप्युलैरिटी मिलने के पीछे एक वजह यह भी है कि बजाज ने इसमें ऐतिहासिक युद्धपोत आईएनएस विक्रांत का स्टील लगाया है.

कंपनी ने इस विशेषता की ​लो​कप्रियता को भुनाया और इसने बिक्री में मदद की. आईएनएस विक्रांत भारत का पहला ऐसा एयरक्राफ्ट है जिससे बाइक बनाई गई है.

इसके अलावा जो दूसरा फैक्टर है, वह है इसकी किफायती प्राइसिंग यानी 62 हजार 2 रुपए दिल्ली एक्स शोरूम. यह 150सीसी बाइक के लिहाज से भारतीय कस्टमर्स के लिए अच्छा रहा.

बजाज वी15 में 149.5सीसी का सिंगल सिलिंडर लिक्विड कूल्ड इंजन लगा है जो कि 11.8 बीएचपी की ताकत के साथ 13 न्यूटन मीटर का टॉर्क जेनरेट करने में सक्षम है. इस बाइक में 5 स्पीड गियरबॉक्स लगा है.

बजाज वी15 बाइक की सफलता से उत्साहित होकर बजाज अब इस बाइक के और भी पॉवरफुल वर्जन बना सकती है. इन्हें भी जल्द ही भारत में लॉन्च किया जाएगा.

ऐसे बढ़ायें अपने कंप्यूटर की स्पीड

कंप्यूटर या लैपटॉप कुछ दिन पुराने होने के बाद इनकी स्पीड पर असर पड़ने लगता है. काफी समय बाद ये अपने आप हैंग होने लगते हैं. इनकी धीमी गति से छुटकारा पाने के लिए लोग अक्सर इन्हें फॉरमैट कर देते हैं. ऐसे में कई बार जरूरी डाटा भी नष्ट हो जाता है. कुछ सरल उपायों के जरिए बिना फॉरमैट किए भी कंप्यूटर की स्पीड बढ़ाई जा सकती है.

1.टेंपररी फाइल डिलीट करें

कंप्यूटर में वर्चुअल मेमोरी फुल हो जाने की वजह से धीमे हो जाते हैं. इससे बचने के लिए समय-समय पर टेंपररी फाइल डिलीट करते रहें. इसके लिए ‘प्रोग्राम’ विकल्प में दिए गए सर्च बॉक्स में %temp% लिखकर एंटर करें. इससे कंप्यूटर या लैपटॉप में मौजूद सभी टेंपररी फाइलें खुल जाएंगी. इन्हें सेलेक्ट कर के डिलीट कर दें.

2.स्टार्टअप प्रोग्राम बंद करें

कई प्रोग्राम ऐसे होते हैं जो कंप्यूटर स्टार्ट होते ही अपने आप चलने लगते हैं. इन्हें स्टार्टअप प्रोग्राम कहते हैं. ये कंप्यूटर के स्लो काम करने की सबसे बड़ी वजह होते हैं. स्टार्टअप प्रोग्राम में स्क्रीन न्यूज फीड, जी-टॉक, स्काइप, बिट टोरेंट जैसे प्रोग्राम भी शामिल हैं. इन्हें ‘स्टार्ट’ मेन्यू में जाकर अनइंस्टॉल किया जा सकता है. इसके अलावा ‘सी ड्राइव’ को खाली रखें. यह हार्ड डिस्क का वह हिस्सा होता है जिसमें सभी सॉफ्टवेयर रहते हैं.

3. रिसाइकिल बिन खाली रखें

कंप्यूटर में जो भी फाइल डिलीट करते हैं वह पूरी तरह से डिलीट होने के बजाय ‘रिसाइकल बिन’ में स्टोर हो जाती है. लगातर कई दिनों तक एक साथ कई फाइलें डिलीट करने से रिसाइकिल बिन भर जाता है और कंप्यूटर की मेमोरी फुल हो जाती है. इससे बचने के लिए समय-समय पर रिसाइकिल बिन खाली करते रहें. अगर आपको कोई फाइल हमेशा के लिए ही डिलीट करनी है तो उसे सिलेक्ट कर shift delete कमांड का इस्तेमाल कर सकते हैं. इससे फाइल रिसाइकिल बिन में नहीं जाएगी बल्कि पूरी तरह कंप्यूटर से डिलीट हो जाएगी.

आरबीआई ने इन बैंकों पर लगाया करोड़ों का जुर्माना

रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने देश के सबसे वैल्यूएबल लेंडर एचडीएफसी बैंक और पब्लिक सेक्टर के बैंक ऑफ बड़ौदा पर करोड़ों का जुर्माना लगाया है. अक्टूबर 2015 में दोनों बैंकों में कथित तौर पर लगभग 6000 करोड़ की विदेशी मुद्रा संबंधी अनियमितता होने का खुलासा हुआ था.

आरबीआई ने एचडीएफसी बैंक पर दो करोड़ और बैंक ऑफ बड़ौदा पर 5 करोड़ का जुर्माना लगाया है. दोनों बैंकों ने इसके बारे में एक्सचेंजों को बता दिया है.सीबीआई ने कई बैंकों के एडवांस इंपोर्ट रेमिटेंस में अनियमितता पाए जाने पर पिछले साल एचडीएफसी बैंक और बैंक ऑफ बड़ौदा की देशभर में फैली शाखाओं में तलाशी और जब्ती का अभियान चलाया था. आरबीआई ने बैंक ऑफ बड़ौदा की दिल्ली वाली अशोक विहार ब्रांच से हुए 6100 करोड़ रुपये के इंपोर्ट रेमिटेंस की जांच की थी.

सीबीआई और एन्फोर्समेंट डायरेक्टरेट (ईडी) बैंक से हांगकांग में बड़े पैमाने पर हुए रेमिटेंस की जांच कर रहे हैं. जांच एजेंसियों को शक है कि यह रकम कथित तौर पर इंपोर्ट के लिए होनेवाले पेमेंट के तौर पर ट्रांसफर की गई थी. एचडीएफसी बैंक ने बयान जारी कर कहा है कि बैंक पर एडवांस इंपोर्ट रेमिटेंस से संबंधित पेनाल्टी बिल ऑफ एंट्री की रिसीट पेंडिंग होने और एंटी मनी लॉन्ड्रिंग गाइडलाइंस के पालन में कुछ कमी रहने के चलते लगाई गई है.

आरबीआई की तरफ से बैंक ऑफ बड़ौदा की जांच में कुछ एंटी मनी लॉन्ड्रिंग प्रोविजंस को लेकर इंटरनल कंट्रोल मेकेनिज्म में कमी और नुक्स निकले हैं. बैंक से चूक ट्रांजैक्शन की मॉनिटरिंग, फाइनेंशियल इंटेलिजेंस यूनिट को समय पर संदिग्ध लेनदेन के बारे जानकारी देने और अपने क्लाइंट्स को यूनीक कस्टमर आइडेंटिफिकेशन नंबर देने में हुई थी.दोनों बैंकों ने कहा है कि उन्होंने यह सुनिश्चित करने के लिए इंटरनल कंट्रोल मजबूत बनाने के मकसद से अपने यहां व्यापक सुधारात्मक काम करने का प्लान लागू किया है, ताकि भविष्य में ऐसी चूक नहीं हो.

भारत की उम्मीदों को एक और बड़ा झटका

रियो ओलंपिक से पहले भारत का एक और खिलाड़ी डोप टेस्ट में फेल हो गया है. पहलवान नरसिंह यादव के बाद शॉटपुट खिलाड़ी इंद्रजीत सिंह भी डोप टेस्ट पास नहीं कर पाए हैं. इंद्रजीत सिंह भी प्रतिबंधित दवा के सेवन के दोषी पाए गए हैं.

नैशनल ऐंटी-डोपिंग एजेंसी ने ऐथलेटिक्स फेडरेशन को इस बारे में सूचित किया है कि इंद्रजीत डोप टेस्ट में फेल हो गए हैं. इस बार भारत की ओर से 34 ऐथलीट्स ने रियो के लिए क्वॉलिफाइ किया था. भारत की ओर से यह अभी तक का सबसे बड़ा दल है. ऐसे में कई डोप वॉचर्स इसे संदेह की दृष्टि से देख रहे थे.

एशियन चैंपियनशिप्स, एशियन ग्रां प्री और वर्ल्ड यूनिवर्सिटी गेम्स में सोने का तमगा जीत चुके इंद्रजीत भारत की ओर से ओलंपिक में क्वॉलिफाइ करने वाले पहले ऐथलीट थे. उम्मीद थी कि वह रियो में 21 मीटर के बैरियर को भी पार कर सकेंगे.

इसी वजह से उन्हें अमेरिका ट्रेनिंग के लिए भी भेजा गया. माना जा रहा है कि यहीं वह परफॉर्मेंस बढ़ाने वाली दवाओं के संपर्क में आए होंगे.

खबर है कि अभी इंद्रजीत सिंह का 'ए' सैम्पल पॉजिटिव आया है. हरियाणा के रहने वाले इंद्रजीत अपना 'बी' सेम्पल भी टेस्ट करवाना चाहते हैं. नाडा का कहना है कि ऐसा उन्हें सात दिनों के भीतर ही करना होगा.

अभी कुछ कहना जल्दबाजी

एथलेटिक्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (एएफआई) के अध्यक्ष एजे सुमारीवाला ने इस पर कोई भी बयान देने से इनकार किया है. उन्होंने कहा कि अभी इस बारे में कुछ भी कहना जल्दबाजी होगी.

जबकि फेडरेशन के महासचिव सीके वाल्सन ने बताया कि डोप टेस्ट में एक सैंपल पॉजिटिव पाया गया है. फेडरेशन को इस बारे में देर रात जानकारी मिली है.

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