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एक नहीं अब अनेक रास्ते दिखायेगा गूगल मैप

प्रौद्योगिकी क्षेत्र की सबसे बड़ी कंपनियों में शुमार गूगल के नेविगेशन एप गूगल मैप्स एप्पल IOS के लिए एक नया फीचर लेकर आया है. इसमें इस्तेमाल करने वालों को एक ही दौरे के दौरान कई ठिकानों को जोड़ने की सुविधा मिलेगी. अमेरिकी मीडिया नेटवर्क कंपनी द वर्ज ने शुक्रवार को कहा है, "आम तौर पर नेविगेशन एप आपको सिर्फ एक जगह ए से बी तक जाने का निर्देश देते हैं.

इस एप को इस्तेमाल करने वाले नए मैप्स किसी को बी से सी, डी, ई और इस तरह के और भी कई जगह को शामिल कर सकते हैं. इससे यदि यात्रा पर निकलने वाला व्यक्ति आसपास की सैर करना चाहता है और कहीं-कहीं थोड़ी देर के लिए रुकना चाहता है तो यह बहुत आसान हो गया है".

एक माह पहले ही इस फीचर को एंड्रायड पर शुरू किया गया है. फिलहाल यह वेब पर उपलब्ध है.गूगल ने इसी हफ्ते मैप्स की डिजाइन में भी सुधार किया है.

एटीएम की समस्या ऐसे सुलझायें

सुमित ने छह बार एटीएम से दस हजार रुपये निकालने की कोशिश की. तीन बार सॉरी की पर्ची बाहर आई पर चौथी बार बैंक स्टेटमेंट में दस हजार की कटौती दिखाई गई जबकि पैसे इस बार भी नहीं निकले. बैंक ने जिम्मेदारी लेने से इनकार कर दिया और ट्रांजैक्शन को सफल बताया. जांच करने पर पता चला कि मशीन कई दिन से खराब चल रही थी जिसके कारण उसे हटाने की प्रकिया भी बैंक में चल रही थी. कन्जयूमर कोर्ट ने जब सीसीटीवी फुटेज मांगी तो कैमरा खराब निकला. इसके बाद कोर्ट ने बैंक से कहा कि वह सुमित को दस हजार रुपये लौटाए.

एटीएम जाने पर ऐसी समस्याओं का हमें आए दिन सामना करना पड़ता है. कभी मशीन खराब तो कभी कोई और समस्या. आपने मशीन में कोड डाला, लेकिन पैसे नहीं निकले और पर्ची निकल आई कि आपके इतने पैसे कट गए. अगर आपको ऐसी किसी भी समस्या का सामना करना पड़ा हो तो आप इन तरीकों से शिकायत कर सकते हैं.

ऐसे करें शिकायत

अगर एटीएम में ट्रांजैक्शन करते वक्त पैसे बाहर नहीं आते और आपके अकाउंट से उतनी रकम कट जाती है तो आप अपने बैंक में इसकी शिकायत कर सकते हैं. 7 दिनों के अन्दर आपको आपकी रकम मिल जानी चाहिए. इससे ज्यादा दिन लगने पर बैंक आपको 100 रुपये रोजाना के हिसाब से पेनल्टी देगा. एटीएम से संबंधित किसी और समस्या के लिए भी सबसे पहले आप अपने बैंक में ही शिकायत करें. एक महीने तक अगर कोई कार्रवाई नहीं होती है तो आप इसके बाद बैंकिंग लोकपाल (ऑम्बड्समैन) में शिकायत दर्ज करा सकते हैं. अगर लोकपाल के पास नहीं जाना चाहते तो कन्जयूमर कोर्ट की भी मदद ले सकते हैं, लेकिन इसमें किसी भी सिस्टम की मदद लेने से पहले बैंक को आपकी शिकायत लेने पर कार्रवाई करने के लिए एक महीने का समय देना जरूरी होता है.

ATM यूज करते वक्त रहें अलर्ट

एटीएम इस्तेमाल करते वक्त सुनिश्चित करें कि आपके आस-पास कोई दूसरा शख्स न हो जो आपका पासवर्ड देख ले. ट्रांजैक्शन में मुश्किल होती दिखे तो उसे कैंसल करना न भूलें. किसी अंजान शख्स की मदद बिल्कुल भी न लें.

नरसिंह को मिली क्लीन चीट, रियो की राह कठिन

नैशनल ऐंटी-डोपिंग एजेंसी (नाडा) ने पहलवान नरसिंह यादव को डोपिंग के आरोप से तो बरी कर दिया है, लेकिन नरसिंह ओलंपिक में खेल पाएंगे या नहीं, इस पर अब भी कोई फैसला नहीं हो पाया है.

नरसिंह के आगे अभी भी चुनौतियां कुछ कम नहीं हैं लेकिन काम तेज हो तो वह रियो ओलंपिक में शिरकत करने से चंद कदमों की दूरी पर ही हैं.

नरसिंह के रियो में जाने के लिए उनके सामने अब दो चुनौतियां हैं. पहली यह कि डोपिंग मामले में नैशनल ऐंटी डोपिंग एजेंसी (नाडा) द्वारा उन्हें बेकसूर ठहरा दिए जाने के फैसले को वर्ल्ड ऐंटी डोपिंग एजेंसी (वाडा) कोर्ट ऑफ आर्बिटरेशन में चुनौती ना दे.

दूसरा यह कि इंटरनैशनल ओलंपिक काउंसिल नरसिंह की जगह 74 किलोग्राम कैटिगरी में रियो जाने वाले प्रवीण राणा की जगह वापस नरसिंह को लाने का निवेदन मान ले.

इस सब को होने में काफी समय लग सकता है लेकिन 26 वर्षीय नरसिंह के पास अब ज्यादा समय नहीं बचा है क्योंकि रियो में 74 किलोग्राम कैटिगरी का मुकाबला 19 अगस्त को होना है और जॉर्जिया में ट्रेनिंग ले रही भारतीय टीम 11 अगस्त तक रियो पहुंचेगी.

इन सबके अलावा वाडा और वर्ल्ड बॉडी को नाडा के फैसले को 21 दिनों में चुनौती देनी होगी. कुल मिलाकर नरसिंह के पास अब केवल 10 दिन बचे हैं क्योंकि 11 अगस्त को भारतीय कुश्ती टीम को रियो पहुंचना है.

उधर केंद्रीय खेलमंत्री विजय गोयल ने कहा है कि रियो में नरसिंह खेलेंगे या नहीं, इसका फैसला भारतीय कुश्ती महासंघ (WFI: रेसलिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया), अंतरराष्ट्रीय कुश्ती महासंघ (IWF: इंटरनैशनल रेसलिंग फेडरेशन), अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति (IOC: इंटरनैशनल ओलंपिक कमिटी) और विश्व डोपिंग रोधी एजेंसी (WADA: वर्ल्ड ऐंटी-डोपिंग एजेंसी) के हाथों में है.

गौरतलब है कि नाडा का फैसला आने के बाद ही भारतीय कुश्ती महासंघ के अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह ने कह दिया था कि नरसिंह को ओलंपिक भेजने के लिए वह इंटरनैशनल रेसलिंग फेडरेशन को पत्र लिखेंगे और इसके लिए पूरा प्रयास करेंगे.

नाडा के महानिदेशक अग्रवाल ने नरसिंह यादव पर फैसले को पढ़ते हुए कहा, ‘‘हमने बीते समय के (दो जून तक) के नमूने को ध्यान में रखा, जिसमें उसका कोई भी नमूना पॉजिटिव नहीं पाया गया था. यह बात समझ से बाहर थी कि एक बार यह प्रतिबंधित पदार्थ लेने से फायदा होगा. इसलिए पैनल का विचार था कि एक बार लिया गया पदार्थ ‘जान-बूझकर’ नहीं लिया गया था.’’

नरसिंह ने भी WFI के सपॉर्ट के लिए उसका शुक्रिया अदा किया. इस बारे में जब खुद नरसिंह से बात की गई तो उन्होंने कहा कि उन्हें ओलंपिक में भारत का प्रतिनिधित्व करने का मौका मिलने की उन्हें पूरी उम्मीद है. नरसिंह ने बताया कि इसी वजह से उन्होंने इस पूरे विवाद के दौरान भी अपनी प्रैक्टिस नहीं छोड़ी थी और वह देश को मेडल दिलाने के लिए पूरी तरह तैयार हैं.

फैसले के बाद पहलवान नरसिंह यादव ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को शुक्रिया कहा. नरसिंह ने कहा, 'मैं प्रधानमंत्री का शुक्रगुजार हूं, जिन्‍होंने न्‍याय पाने में मेरी मदद की, मुझे उम्‍मीद है कि रियो ओलंपिक में पदक जरूर जीतूंगा.'

इंटरनैट विनाश का जरिया

दुनिया ने पिछले 25 साल में बहुत तरक्की की है. इंटरनैट ने जिंदगी बदल डाली. हर तरह की जानकारी सैकंड में मिल जाती है. सारी दुनिया एक धागे में बंध गई. क्या वाकई दुनिया ने ‘पा’ के सफेद ग्लोब जैसा एक ग्लोब बना डाला है जिस में देशों की लाइनें ही नहीं थीं? क्या वाकई हम ग्लोबल विलेज बन रहे हैं?

शायद नहीं. यह ठीक है कि 18वीं, 19वीं और 20वीं सदी की तरह की लड़ाइयां अब नहीं हो रही हैं पर अब उस से ज्यादा दहशत का माहौल है. यह दहशत बढ़ रही है, इंटरनैट के फैलाव की तरह. लगता है जैसेजैसे इंटरनैट बढ़ रहा है, उस का असर गहरा हो रहा है, दुनिया की समस्याएं बढ़ रही हैं, लोगों में खाई बढ़ रही है.

अमेरिका में पुलिस वालों को मारा जाने लगा है. अमेरिकी पुलिस कालों को जन्मजात अपराधी मान कर उन्हें कभी भी बंदूक का निशाना बना डालती है. सीरिया और उत्तरी अफ्रीका के झगड़ों से परेशान लाखों परिवार सुरक्षा व रोजीरोटी की तलाश में जान जोखिम में डाल कर यूरोप में जबरन घुस रहे हैं, नंगे पांव, बिना खाना साथ लिए, छोटे बच्चों और बूढ़े बाप के साथ.

भारत कौन सा बचा है. कश्मीर फिर उबल रहा है. आरक्षण के पक्ष व विपक्ष की लाइनें उभरने लगी हैं. गौ सेवकों ने इसलामिक स्टेट जैसा संगठन बनाने की तैयारी कर ली है. माओवादी किसी भी तरह काबू में नहीं आ रहे.

इन सब को आपस में कौन जोड़ रहा है? वही इंटरनैट जिस ने दुनिया के देशों की नक्शे पर खिंची लाइनें मिटा दी हैं. कोई भी किशोर सैकंडों में फ्रांस के नीस शहर में 9 टन के ट्रक की चपेट में आए 80 लोगों का ट्रक द्वारा कुचले जाने वाला वीडियो देख सकता है पर क्या यह उन्हें वायलैंस के खिलाफ तैयार कर रहा है या वायलैंस पू्रफ बना रहा है.

इसलामिक स्टेट का फैलाव भी इंटरनैट और सैटेलाइट फोन के जरिए हुआ है. उस से मौत का संदेश उसी तरह फैला है जैसे यूरोप की फैक्ट्रियों की चिमनियों का धुआं और गाडि़यों का प्रदूषण एशियाअफ्रीका तक फैला है.

इंटरनैट आशा का संदेश ले कर आया था पर अब विध्वंसक बन गया है. हर किशोर के हाथ में अब खिलौना बेकार की बातों या हिंसक वीडियो खेलों से भरा है. इंटरनैट उत्पादन की बात नहीं कर रहा, शांति का दूत नहीं है, प्रेरक नहीं है, सफलता की कहानियां नहीं कहता. यह तो एक जरिया बन गया है विनाश का.

किशोरों, युवाओं या दफ्तरों से इसे अब छीना नहीं जा सकता. इस पर कंट्रोल नहीं हो सकता. लेकिन यह तो कहा जा सकता है कि खबरदार, यहां इंटरनैट चालू है. खतरा है.                                                     

मेरी जांघों पर सफेद रंग की धारियां पड़ गईं हैं. कोई सरल घरेलू उपाय बताएं.

सवाल

मैं 21 साल की अविवाहित युवती हूं. मेरी जांघों पर सफेद रंग की धारियां पड़ गईं हैं. ये बहुत बुरी दिखती हैं. मैं इन से छुटकारा पाना चाहती हूं. कोई सरल घरेलू उपाय बताएं?

जवाब

किशोर उम्र में और बाद में वयस्क होने पर विवाहित जीवन में गर्भ ठहरने पर जब शरीर का वजन अचानक बढ़ता है, तो शरीर के कई अंगों खास कर जांघों, पेट और वक्ष पर चरबी बढ़ने से त्वचा के संयोजी ऊतकों पर अचानक भारी दबाव आ जाता है, जिस से उन में दरारें उत्पन्न हो जाती हैं, शुरू में उन का रंग लाल जामुनी होता है, पर जब ये दरारें भर जाती हैं तो इन का रंग सफेद हो जाता है. इन्हें स्ट्रैच मार्क्स कहते हैं.

उम्र के साथ ये सफेद धारियां खुदबखुद थोड़ी हलकी हो जाती हैं. लेकिन इन्हें हलका करने के लिए डर्मैटोलौजी में कई प्रकार के इलाज आजमाए गए हैं. यदि स्त्री गर्भवती नहीं है, तो वह त्वचा विशेषज्ञ से सलाह ले कर रेटिनो ए क्रीम लगा कर देख सकती है. कुछ डर्मैटोलौजिस्ट एनडी याग लेजर से भी इलाज करते हैं. पर दोनों ही विधियों में इलाज की कामयाबी की दर सीमित ही है. अच्छाई इसी में है कि इन के प्रति विचलित होने के बजाय इन्हें शरीर की सामान्य जैविक क्रिया के रूप में स्वीकार कर लिया जाए.

 

अगर आप भी इस समस्या पर अपने सुझाव देना चाहते हैं, तो नीचे दिए गए कमेंट बॉक्स में जाकर कमेंट करें और अपनी राय हमारे पाठकों तक पहुंचाएं.

डिलीट हो के भी डिलीट नहीं होती व्हाट्सएप चैट

व्हाट्सएप पर आप कई बार अपनी चैट डिलीट करते होंगे. कभी मैमोरी की वजह से तो कभी पर्सनल इश्यू की वजह से हम व्हाट्सएप चैट को हम डिलीट कर देते हैं. जिसके बाद आपके सामने से व्हाट्सएप चैट गायब हो जाती है, यानी डिलीट हो जाती है लेकिन नहीं. चैट डिलीट नहीं होती है, बल्कि करीब दो महीने तक वो चैट सेव रहती है.

खैर ऐसा हम नहीं कह रहे हैं यह कहना iOS रिसर्चर जोनाथन डिजायरस्की का, जो कि कहते हैं व्हाट्सएप आपकी चैट को सेव रखता है. डिजायरस्की के मुताबिक चैट को डिलीट, रिमूव या क्लियर ऑल चैट करके भी डिलीट नहीं होती. यदि आपको चैट डिलीट करनी है तो आप व्हाट्सएप को अपने फोन से हटा दें, तो चैट डिलीट हो सकती हैं.

हालांकि उन्होंने कहा कि व्हाट्सएप ऐसा जानबूझकर नहीं करता है. आपको बता दें कि फेसबुक के आधीन होने के बाद व्हाट्सएप ने यूज़र्स की चैट को सिक्योर करने के लिए एंड टू एंड एन्क्रिप्शन शुरू किया जो किया आपकी चैट और व्हाट्सएप डाटा को सेफ करता है.

153 डॉट बॉल का अनोखा रिकॉर्ड

कुसाल मेंडिस की चमत्कारी बल्लेबाजी के बाद रंगना हेराथ की शानदार गेंदबाजी के दम पर श्रीलंका ने ऑस्ट्रेलिया को पहले टेस्ट में 106 रन से हरा दिया. अपनी जमीन पर ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ श्रीलंका की ये दूसरी जीत है.

लेकिन इस मुकाबले में ऑस्ट्रेलिया के बल्लेबाजों ने लगातार 25.3 ओवर बिना कोई रन बनाए एक वर्ल्ड रिकॉर्ड खड़ा कर दिया. जी हां क्रिकेट इतिहास में यह एक रिकॉर्ड है कि मेहमान टीम ने 25.3 ओवर बिना किसी रन के निकाल दिए.

क्रिकेट इतिहास में इससे पहले इतने ओवर एक साथ कभी मेडन नहीं फेंके गए. पारी के 63वें ओवर में 4 रन बटोरने के बाद 64वें ओवर से 88.3 तक एक भी रन नहीं बन सका.

ऑस्ट्रेलिया के पारी में लायन के आउट होने के बाद मैदान पर आए स्टीव ओ कैफी ने पीटर नेविल के साथ मिलकर 64वें ओवर से 85.5 ओवर तक बल्लेबाजी की जिसके बाद वो आउट हो गए. इस साझेदारी में इस दौरान एक भी रन नहीं बना.

इसके बाद स्टीव भी हेरात का शिकार बन गए. इस दौरान भी कोई रन नहीं जुड़ा. इस तरह ऑस्ट्रेलिया की पारी में कुल 25.3 ओवर खाली निकले.

इसके अलावा पांचवें दिन जब ऑस्ट्रेलिया मैच बचाने के लिए संघर्ष कर रही थी और श्रीलंका अपने दूसरी जीत की ओर बढ़ रही थी तब ऑस्ट्रेलिया के पीटर नेविल और चोटिल ओ-किफ ने हार और जीत के बीच बल्लेबाजी का एक और अलग विश्व रिकॉर्ड बना दिया.

नौवें विकेट के लिए यू तो दोनों ने सिर्फ चार रनों की साझेदारी की लेकिन इसके लिए उन्होंने इतनी गेंद खेली कि नया रिकॉर्ड बन गया. दोनों ने पहले रन के लिए रिकॉर्ड 154 गेंद खेली. इसके बाद इनकी साझेदारी जब हेराथ ने तोड़ी तब तक दोनों ने 178 गेंदें खेल ली थी. यानि कि 29.4 ओवर में दोनों ने 0.13 के रन औसत से रन बनाए जो कि टेस्ट क्रिकेट का नया विश्व रिकॉर्ड है.

इससे पहले 2015 में साउथ अफ्रीका के हाशिम अमला और एबी डिविलियर्स ने भारत के खिलाफ 253 गेंदों पर 0.64 के औसत से 27 रन बनाए थे.

अब ये क्या कह दिया संजय दत्त ने

पिछले कई माह से चर्चाएं गर्म थी कि संजय दत्त की जिंदगी पर आधारित फिल्म का निर्माण राजकुमार हिरानी कर रहे हैं. चर्चाएं गर्म रही हैं कि अपनी इस बायोपिक फिल्म में संजय दत्त का किरदार निभाने वाले अभिनेता रणबीर कपूर को संजय दत्त ने खुद ही ट्रेनिंग दी है. मगर अब अपने जन्मदिन पर संजय दत्त ने इस बात से साफ इंकार किया है.

संजय दत्त ने मीडिया से बात करते हुए कहा-‘‘मैंने अब तक रणबीर कपूर को अभिनय की कोई टिप्स या ट्रेनिंग नहीं दी है. मैं रणबीर कपूर को कोई ट्रेनिंग देने वाला भी नही हूं. फिल्म को लेकर सब कुछ सही ढंग से करने के लिए राजकुमार हिरानी स्वयं सक्षम हैं.’’

संजय दत्त के इस बयान के आने के बाद बौलीवुड में खबरें गर्म है कि क्या संजय दत्त उम्मीद खो चुके हैं कि उनकी बायोपिक फिल्म बन सकेगी?

संजय के करियर को संवारने की नई कवायद

1993 के बम ब्लास्ट के बाद आर्म्स एक्ट के तहत सजा काटने के बाद फरवरी माह में जेल से वापस आए संजय दत्त का करियर जिस हिसाब से उन्होंने योजना बनायी थी, उस हिसाब से शुरू नहीं हो पाया. इसमें कई लेाग उनकी किस्मत को दोष दे रहे हैं. यहां तक कि सिद्धार्थ आनंद, संजय दत्त के साथ फिल्म ‘‘बदला’’ बनाने की जो योजना बनायी थी, वह बंद कर दी गयी. जबकि संजय दत्त ने इस फिल्म के लिए ट्रेनिंग भी ली थी. पर अंततः सिद्धार्थ आनंद यह फिल्म शुरू नही कर पाए और अब सिद्धार्थ आनंद ने हृतिक रोशन के साथ दूसरी फिल्म पर काम करना शुरू कर दिया है. इस घटनाक्रम के बाद संजय दत्त की समझ में नही आ रहा था कि क्या किया जाए.

सूत्रों की माने तो अपने जन्मदिन के बाद संजय दत्त ने नई कवायद शुरू कर दी है. सूत्रों की माने तो अब संजय दत्त ने एक अन्य पीआर की मदद लेकर यह खेल ‘शुरू किया है. अब मीडिया में खबर फैलायी जा रही है कि फिल्म ‘‘बदला’’ का बजट ज्यादा था, इसलिए बंद हो गयी. पर इससे संजय दत्त की ईमेज सुधरने की बजाय बिगड़ रही है. जिस पीआर ने इस तरह की खबर फैलाने की सलाह दी, उसने गलत राह ही पकड़ायी है. क्योंकि यदि यह मान लें कि फिल्म का बजट ज्यादा होने के कारण बंद की गयी, तो इसके मायने यही हैं कि अब संजय दत्त इतने लोकप्रिय नहीं रहे कि उनकी फिल्में बाक्स आफिस पर धन बटोर सके. यानी कि निर्माताओं का उन पर विश्वास नहीं रहा. बौलीवुड का एक तबका मानता है कि संजय दत्त को नए सिरे से दर्शकों के बीच अपनी पैठ बनाने और निर्माताओं का विश्वास हासिल करने की जरुरत है, जिस पर वह जितनी जल्दी ध्यान देंगे, उतना बेहतर होगा.

किसकी फिल्म देखने मुंबई पहुंची नरेंद्र मोदी की पत्नी

देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पत्नी जसोदाबेन के लिए आज भी रिश्ते पहली अहमियत रखते हैं. इसी के चलते जब गुजराती फिल्मों के मशहूर अभिनेता राजदीप ने अपनी पहली हिंदी फिल्म ‘‘यह कैसी है आशिकी’’ के मुंबई में आयोजित ‘प्रेस शो’ में मुख्य अतिथि के रूप में बुलाया, तो जसोदाबेन अहमदाबाद से मुंबई पहुंची. जसोदाबेन ने पत्रकारों के साथ बैठकर फिल्म देखने के बाद राजदीप को आशीर्वाद देते हुए फिल्म की सफलता की कामना की.

30 जुलाई को मुंबई में ‘‘फन रिपब्लिक’’ के प्रिव्यू थिएटर में फिल्म देखने के बाद जब हमारी जसोदाबेन से बात हुई, तो जसोदाबेन ने ‘‘सरिता’’ पत्रिका से कहा- ‘‘राजदीप मेरे भाई की तरह हैं. मैंने उनकी गुजराती भाषा की ‘देश जोयो दादा प्रदेश जोयो’, ‘उंची मोड़ी नो उंचा मोल’ सहित कई सुपरहिट फिल्में देखी हैं. वह सिनेमा के क्षेत्र में 25 वर्षों से अच्छा काम करते आ रहे हैं. मैं उनकी इस फिल्म की सफलता के लिए आशीवार्द देने आयी हूं. मैने आप लोगों के साथ फिल्म देखी. अच्छी कहानी है.’’

जी एन भाई व वंदना बी.रावल निर्मित तथा सुभाष जे शाह निर्देशित फिल्म ‘‘यह कैसी है आशिकी’’ के हीरो राजदीप ने ही इस फिल्म की कथा व पटकथा लिखी है. राजदीप का असली नाम जमीर खान है. उनका फिल्मी नाम राजदीप है. वह पिछले 25 वर्षों से बतौर हीरो गुजराती फिल्मों में सफलता के झंडे गाड़ते आ रहे हैं. ‘यह कैसी है आशिकी’ उनकी पहली हिंदी फिल्म है. जसोदा बेन के साथ अपने संबंधों की बात करते हुए राजदीप ने कहा- ‘‘जसोदा बेन को मैं वर्षों से बहन की तरह मानता आया हूं. इसीलिए आज वह मेरे करियर के नए पड़ाव पर मुझे आशीर्वाद देने आयी हैं.’’

रहस्य, रोमांच, मर्डर मिस्ट्री, हारर से भरपूर संगीतमय प्रेम कहानी वाली फिल्म ‘‘यह कैसी है आशिकी’’ की कहानी एक पचास साल से अधिक उम्र के अमीर इंसान कुमार की है, जो कि अपनी बेटी प्रिया की उम्र की ही लड़की कामिनी से दूसरा विवाह कर लेते हैं. कामिनी ने महज कुमार की दौलत देखकर विवाह किया है. वह एक नहीं दो दो युवकों के साथ रंगरेलियां मनाती रहती है. इसमें सवाल उठाया गया है कि बीस साल की उम्र की लड़कियां किसी अधेड़ उम्र के अमीर इंसान से प्यार व शादी क्यों करती हैं? ऐसी शादी होने के बाद लड़की व उस अमीर इंसान का क्या होता है? क्या यह वास्तव में प्यार है या सौदा? इस फिल्म के गीतकार अमिताभ रंजन व माहिल पधवी हैं. संवाद लंखक सुरेष जोशी तथा फिल्म को अभिनय से संवारने वाले कलाकार हैं- सुखबीर लांबा, अतुल सोनी, सिप्रा गौर, वंदना रावल, स्वाती मुखर्जी, गोकुल बारैया, राजू भरूची व अन्य.

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