Download App

‘फ्रेकी अली’ का जबरदस्त ट्रेलर क्या आपने देखा

सोहेल खान के प्रोडेक्शन और डायरेक्शन में बनी फिल्म ‘फ्रेकी अली’ का रविवार को ट्रेलर लॉन्च किया गया, जिसमें सलमान अपने दोनों भाईयों को ज्वाइन किया. फिल्म के हीरो नवाजुद्दीन सिद्दीकी इससे काफी खुश हैं कि खान भाई उन्हें एक साथ मिलकर सपोर्ट कर रहे हैं. नवाजुद्दीन के मुताबिक ‘ये बहुत अच्छा है कि सलमान भाई मेरी फिल्म को सपोर्ट कर रहे हैं. यहां तक कि मुझे तीनों भाईयों का बराबर सपोर्ट इस फिल्म के लिए मिल रहा है.’

उम्दा एक्टर हैं नवाजुद्दीन : सोहेल

लेकिन तीनों भाईयों को साथ लाने का आइडिया किसका था? इस सवाल के जवाब में सोहेल ने कहा कि मैं और अरबाज भाई इस फिल्म का हिस्सा हैं और सलमान भाई फैमिली का हिस्सा हैं. जब सोहेल से पूछा गया कि क्या उनकी ये फिल्म नवाजुद्दीन को एक हीरो के रूप में पेश करेगी? तो सोहेल ने कहा, ‘नवाज एक उम्दा एक्टर हैं और मेरे लिए फिल्म में हीरो बनने से पहले किसी किरदार को बखूबी निभाना जरूरी है. उनमें एक नेचुरल गोल्फर जैसी बात है और उनके काम के प्रति समर्पण ने उन्हें ऐसा बनाया. मुझे एक कैप्टेन की तरह महसूस हुआ और मेरी उम्दा कास्ट और क्रू ने मेरे काम को बेहद आसान और बेहतर बनाया है.’

एमी जैक्सन फिल्म की एक्ट्रेस

आपको बता दें कि नवाज दोनों ही भाईयों के साथ काम कर चुके हैं और जिनके साथ वह आफ कैमरा खूब मस्ती भी करते नजर आते हैं. सोहेल के मुताबिक नवाज बहुत ही शांत, सहज और हंसमुख व्यक्ति हैं. आपको बता दें कि नवाजुद्दीन के साथ फिल्म ‘फ्रेकी अली’ में अभिनेत्री एमी जैक्सन भी मुख्य भूमिका निभा रही हैं. ये फिल्म 9 सितंबर को रिलीज होगी.

एवलीन शर्मा का हॉट ब्लू बिकिनी लुक

बॉलीवुड एक्ट्रेस एलवीन शर्मा इन दिनों बाली में छुट्टियां मना रही हैं. बीच साइड पर रिलैक्स कर रही एवलीन ने इंस्टाग्राम पर अपनी तस्वीरें शेयर की. एवलीन बॉलीवुड फिल्म ये जवानी है दिवानी और नौटंकी साला में नजर आ चुकी हैं. बता दें कि एक बार एवलीन ने कहा था कि उन्हें फोटोशॉप किए बिना असली तस्वीरें शेयर करना पसंद है. एवलीन एक जर्मन इंडियन मॉडल और एक्ट्रेस हैं.

हर इंसान आत्म केंद्रित हो चुका है: हृतिक रोशन

‘‘जोधा अकबर’’ के बाद हृतिक रोशन अब एक बार फिर आशुतोष गोवारीकर के निर्देशन में एक ऐतिहासिक फिल्म ‘‘मोहनजो दाड़ो’’ में नजर आने वाले हैं. मगर खुद हृतिक रोशन इसे ऐतिहासिक फिल्म की बजाय प्रेम कहानी वाली फिल्म मानते हैं.

‘‘सरिता’’ पत्रिका से बात करते हुए खुद हृतिक रोशन ने कहा- ‘‘मेरी फिल्म ‘मोहनजो दाड़ो’ ऐतिहासिक नहीं बल्कि एक काल खंड पर आधारित प्रेम कहानी है. मेरा मानना है कि यह फिल्म ‘मोहनजो दाड़ो’ की पृष्ठभूमि पर बदले की भावना से प्रेरित संगीतमय फिल्म है. इसमें ड्रामा भी बहुत है. इसमें मैंने सरमन का किरदार निभाया है, जो कि मोहनजो दाड़ो पहुंचने के बाद चानी से प्यार कर बैठता है.’’

हृतिक रोशन ने फिल्म ‘‘मोहनजो दाड़ो’’ के अपने सरमन किरदार की व्याख्या करते हुए कहा- ‘‘सरमन मेरे जैसा आम इंसान है. मेरी ही तरह वह भी दुनिया को बहुत खूबसूरत मानता है. जब मैने अपना अभिनय करियर शुरू किया था, उस वक्त मैं बहुत सीधा सादा था. मेरे लिए यह संसार खूबसूरत और अच्छा था. मगर समय के साथ मेरी समझ में आता गया कि यह दुनिया कितनी कठोर है. इस दुनिया में लोग किस तरह दूसरों के रास्ते में सिर्फ कांटे ही बोते हैं. सरमन भी कड़वे सच का अहसास मोहनजो दाड़ो पहुंचने के बाद करता है और फिर अन्याय के खिलाफ जंग शुरू करता है.’’

जब हमने हृतिक रोशन से पूछा कि फिल्म ‘मोहनजो दाड़ो’ में जो सभ्यता संस्कृति व राजनीति दिखायी गयी है, वह आज के परिपेक्ष्य में कैसे ठीक बैठती है?

इस सवाल के जवाब में हृतिक रोषन बताया-‘‘कुर्सी हथियाने का मसला हो या पावर गेम हो, वह उस वक्त जैसा था, वैसा आज भी है. कहने का अर्थ यह है कि मोहनजो दाड़ो में जिस तरह की राजनीति दिखायी गयी है, वह आज भी मौजूद है. उस वक्त भी अन्याय होता था. लोग अन्याय के खिलाफ विद्रोह करते थे. आज भी वैसा ही हो रहा है. उस वक्त की तरह आज भी विद्रोही मौजूद हैं. तो हमारी फिल्म में अन्याय के खिलाफ विद्रोह करने की जो जरूरत का चित्रण है.’’

पर जब हमने हृतिक रोशन से कहा कि अन्याय के खिलाफ विद्रोह का बिगुल बजाने वालों को लोगों का साथ नही मिलता?

इस बाबत हृतिक रोषन ने कहा-‘‘इसकी सबसे बड़ी वजह यह हैं कि हर इंसान सिर्फ अपने लिए जीता है. हर इंसान आत्म केंद्रित है. यदि अन्याय से 1000 लोग प्रभावित हुए हैं, तो उनमें से पांच विद्रोह के लिए आगे बढ़ते हैं. फिर बीस लोग उनके साथ जुड़ जाते हैं. मगर हजार नहीं जुड़ पाते हैं. मुझे लगता है कि यह बात पर भी निर्भर करता है कि उस अन्याय का असर किस पर कितना हुआ है? हर इंसान कहता है कि जिंदगी में सब कुछ फेयर नहीं होता. तो लोग इस बात को स्वीकार करते चलते हैं कि अनफेयर होना ही है.

जब आप यह मान लें कि अन फेयर हो रहा है, तभी आप लड़ाई लड़ सकते हैं. वास्तव में लोग पलायन वादी हो गऐ हैं. दूसरों की समस्या या मुसीबत को नजरंदाज कर देना आसान होता है. यदि किसी इंसान को दूसरे की समस्याओं में नहीं पड़ना है,तो सबसे अच्छा रास्ता होता है, उसे अनदेखा कर जाना. जब आपको दूसरों की समस्याओं के लिए लड़ना हो, तो अपनी जिंदगी से थोड़ा बहुत हटना पड़ता है. अब कौन क्यों करेगा? हर इंसान अपनी जिंदगी किसी न किसी समस्या से जुझ रहा है. हर इंसान अपनी समस्याओं में इतना मशगूल रहता है कि वह दूसरों की समस्याओं को देखना, सुनना या समझना ही नहीं चाहता.’’

ओलंपिक के लिए मुंडवा लिया सिर

ओलंपिक गेम्स के दूसरे दिन हंगरी की 'आयरन लेडी' और पांच बार की वर्ल्ड चैम्पियन स्वीमर कतिन्का होसू ने गोल्ड मेडल जीता. उन्होंने ये मेडल 400 मीटर इंडिविजुअल इवेंट में वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाते हुए जीता.

स्वीमिंग को लेकर होसू इतनी क्रेजी है कि इसी गेम की वजह से उन्हें 'आयरन लेडी' का नाम मिला है. यहां तक कि इसके लिए एकबार वे अपना सिर भी मुंडवा चुकी हैं. 27 साल की कतिन्का होसू हंगरी की प्रोफेशनल स्वीमर और बिजनेस वुमन हैं.

होसू पांच बार की लॉन्ग कोर्स वर्ल्ड चैम्पियन और कई इवेंट्स में वर्ल्ड रिकॉर्ड होल्डर हैं. होसू ने साल 2013 में लंबे समय तक अपने कोच और बॉयफ्रेंड रहे शेन टसप से शादी की है.

मुंडवा चुकी हैं सिर

होसू स्वीमिंग में अपनी परफॉर्मेंस को लेकर इतनी सीरियस हैं कि वे एक बार इसे लेकर अपना सिर भी मुंडवा चुकी हैं. उन्होंने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर करीब 4 महीने पहले अपने गंजे सिर के साथ तस्वीर पोस्ट की थी और इस बारे में सबकुछ बताया था. अपनी तस्वीर के साथ उन्होंने लिखा, 'मैं अपनी प्रिपरेशन के लिए छोटी से छोटी बात का भी ध्यान रखती हूं.'

होसू ने लिखा कि स्वीमिंग में कॉम्पटीशन इतना बढ़ चुका है कि कई बार सेकंड के सौवें हिस्सा भी आपको हरा सकता है. ऐसे में उन्होंने खुद को और भी बेहतर बनाने के लिए अपने सिर के बाल निकलवा दिए थे. साथ ही उन्होंने लिखा था कि 'मैं अपने नए बालों के साथ पूल में ट्राय करने के लिए और इंतजार नहीं कर सकती'.

लोग कहते हैं आयरल लेडी

होसू को लोग 'आयरन लेडी' भी कहकर बुलाते हैं. ये नाम उन्हें एक के बाद एक लगातार थका देने वाले कई कॉम्पटीशन्स में हिस्सा लेने की वजह से मिला. वे स्वीमिंग को लेकर कितनी जुनूनी हैं इसको इसी बात से समझा जा सकता है कि होसू के पास हंगरी के दो-तिहाई से ज्यादा नेशनल रिकॉर्ड्स हैं. इसके अलावा वे कई बड़ी इंटरनेशनल कंपनीज की ब्रांड एम्बेसडर भी हैं.

जीता पहला ओलंपिक गोल्ड

हंगरी की इस स्वीमर का ये चौथा ओलंपिक है. लेकिन इससे पहले के तीनों ओलंपिक में वे कोई मेडल नहीं जीत सकी थीं. होसू ने 4 मिनट 26.36 सेकंड का वक्त निकालकर वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाते हुए गोल्ड मेडल जीता. जबकि इससे पहले का रिकॉर्ड 4 मिनट 28.43 सेकंड का था.

सिर्फ 30 सेकंड में हैक हो सकता है किसी का भी Whatsapp

हाल ही में UAE बेस्ड NGO ने एक अवेयरनेस प्रोग्राम रखा था. इस प्रोग्राम में बताया गया की सिर्फ 30 सेकंड के अंदर कोई भी इंसान किसी के भी वॉट्सऐप अकाउंट की एक्सेस ले सकता है. हैकर को सिर्फ आपके स्मार्टफोन का एक्सेस एक बार चाहिए. कैसे हैक किया 30 सेकंड में वॉट्सऐप…

वॉट्सऐप वेब का किया इस्तेमाल

वॉट्सऐप अकाउंट हैक करते हुए फर्म ने एक वीडियो जारी किया है जिसमें दिखाया है कि कैसे सिर्फ फोन उधार लेकर Whatsapp web अपने कम्प्यूटर में ऑन कर लिया. ऐसे में फोटोज, वीडियो, चैट सारा डाटा सिर्फ 30 सेकंड के अंदर सामने वाले के कम्प्यूटर में चला गया. इसके लिए किसी खास ट्रेनिंग की जरूरत भी नहीं पड़ी

कैसे बचें इससे

– वॉट्सऐप को लॉक करके या पासवर्ड सेट करके रखें

– वॉट्सऐप वेब की सेटिंग्स में जाएं और चेक करें की कहीं कोई और डिवाइस तो आपके फोन से कनेक्ट नहीं हुआ

– Web.Whatsapp.com पर जाकर

Whatsapp मैसेज एक्सट्रैक्ट करके

वॉट्सऐप मैसेज एक्सट्रैक्ट करके कोई भी आसानी से आपका अकाउंट हैक कर सकता है. चैट्स एंड कॉल्स में एक ऑप्शन ऐसा भी होता है जिससे आसानी से पूरी चैट हिस्ट्री ईमेल की जा सकती है.

क्या करें बचने के लिए

– अपने ईमेल अकाउंट को चेक करें की कहीं कोई अननोन मेल तो नहीं गया.

– वॉट्सऐप हमेशा लॉक करके रखें

– जीमेल को भी ऐप लॉक से लॉक किया जा सकता है.

Whatsapp Call की मदद से

वॉट्सऐप कॉल की मदद से फोन को हैक करना और आसान है. हैकर को सिर्फ आपका फोन 15 सेकंड के लिए चाहिए और आपका फोन हैक हो सकता है.

क्या करें बचने के लिए

– Incoming Call Lock ऐप इंस्टॉल करें. इस ऐप की मदद से हर नए कॉल पर एक लॉक आएगा जिसे ओपन करने के बाद ही कॉल रिसीव हो सकेगा.

Spy Apps

इंटरनेट स्पाई ऐप्स से भरा हुआ है. अगर आपके दोस्त या परिवार वाले इनमें से कोई ऐप इंस्टॉल कर लेते हैं तो उनके लिए आपका वॉट्सऐप अकाउंट हैक करना काफी आसान हो जाएगा.

क्या करें बचने के लिए

– अपने फोन में नए ऐप्स को चेक करते रहें. अगर कोई नया ऐप दिखे जिसे आपने इंस्टॉल नहीं किया हो तो उसे फॉरन अनइंस्टॉल करें.

– अगर आपका फोन रूटेड है तो परमीशन मैनेजर का इस्तेमाल करें.

OTP SMS की मदद से

वॉट्सऐप को हैक करने का सबसे आसान तरीका है OTP है. बिना OTP कन्फर्मेशन के वॉट्सऐप का इस्तेमाल यूजर्स नहीं कर सकते ऐसे में हैकर्स को सिर्फ SMS स्पाईवेयर की जरूरत है.

कैसे बचें

– एक अच्छा एंटीवायरस अपने फोन में हमेशा रखें.

– स्क्रीन नोटिफिकेशन लॉक करके रखें

– ऐपलॉक की मदद से SMS ऐप लॉक रखें.

फोन को कंट्रोल करके

आपके एंड्रॉइड फोन की कॉपी बनाना इतना आसान है कि हैकर मिरर यॉर फोन तकनीक का इस्तेमाल करके कहीं से भी पूरे फोन की एक्सेस ले सकते हैं. इसके लिए बस एक ऐप और टीम व्यूअर की थोड़ी सी जानकारी चाहिए.

क्या करें बचने के लिए

– अपने फोन में नए ऐप्स को चेक करते रहें. अगर कोई नया ऐप दिखे जिसे आपने इंस्टॉल नहीं किया हो तो उसे फॉरन अनइंस्टॉल करें.

– अगर आपका फोन रूटेड है तो परमीशन मैनेजर का इस्तेमाल करें.

8 पीएसयू पर नीति आयोग का शिकंजा

नीति आयोग ने सार्वजनिक क्षेत्र की 8 बीमार इकाइयों को बंद करने की सिफारिश की है. प्रधानमंत्री कार्यालय ने आयोग को सार्वजनिक क्षेत्र की बीमार इकाइयों की व्यवहार्यता का पता लगाने को कहा था. आयोग ने पाया है कि इन 8 इकाइयों का पुनरोद्धार नहीं किया जा सकता.

इस घटनाक्रम से जुड़े सूत्रों ने कहा, ‘‘ये आठ इकाइयां उन 74 नुकसान में चल रहे सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों में से हैं जिनकी पहचान नीति आयोग ने बंदी या बिक्री के लिए की है.’’ सूत्र ने कहा कि एक बार पीएमओ द्वारा इस प्रस्ताव को सैद्धान्तिक मंजूरी मिलने के बाद संबंधित मंत्रालय इन इकाइयों को बंद करने के लिए विस्तृत योजना बनाएंगे.

इन विस्तृत योजनाओं में बेची जाने लायक परिसंपत्तियों की पहचान और इन आठ कंपनियों के कर्मचारियों के लिए मुआवजा देना आदि शामिल है. सूत्र ने कहा कि इन कंपनियों को बंद करने की योजना केंद्रीय मंत्रिमंडल के सामने रखी जाएगी ताकि इन कंपनियों को बंद करने की प्रक्रिया शुरू की जा सके.

इससे पहले प्रधनमंत्री कार्यालय ने नीति आयोग से कहा था कि वह ऐसे मामलों में आगे बढ़ने से पहले बिक्री आदि से जुड़ी विस्तृत प्रक्रिया के साथ एक बीमार सार्वजनिक उपक्रम की पहचान करे.

कहीं बच्चे इंटरनेट पर पॉर्न तो नहीं देख रहे?

पेरेंट्स होने के नाते आपका बच्चा इंटरनेट पर क्या देख रहा है इसकी जानकारी रखना आपका हक है. ये स्पाइंग नहीं है. अपने बच्चे को स्मार्टफोन देने से पहले इसमें एक सेटिंग करने से आप उसकी इंटरनेट एक्टिविटी पर नजर रख पाएंगे. अगर वो सर्च हिस्ट्री डिलीट भी कर देता है तो भी आपको उसके एक्टिविटी के बारे में पता चलता रहेगा. कहीं आपका बच्चा पॉर्न साइट्स तो नहीं देख रहा…?

– uknowkids.com पर पब्लिश एक रिपोर्ट के मुताबिक 8 से 16 साल की उम्र के बच्चे ऑनलाइन कम से कम एक बार पॉर्न देख चुके होते हैं.

– ऑनलाइन पॉर्न देखने के मामले में 12 से 17 साल के लड़कों की संख्या काफी ज्यादा है.

– इंटरनेट पर अडल्ट कंटेंट की भरमार है और इसे एक्सेस करने के लिए किसी भी तरह के वेरिफिकेशन की जरूरत नहीं पड़ती.

– इससे स्मार्टफोन और इंटरनेट पर अडल्ट कंटेंट एक्सेस करना बच्चों के लिए और भी आसान हो गया है.

– हालांकि बच्चे इतने स्मार्ट तो हैं ही कि वे सर्च हिस्ट्री डिलीट कर देते हैं. ऐसे में Cookies ही एक ऑप्शन बचता है जिससे आप पता लगा सकें कि आपका बच्चा इंटरनेट पर क्या देख रहा था.

एंड्रॉइड स्मार्टफोन में करें ये सेटिंग-

– क्रोम ब्राउजर में जाकर Settings में जाएं.

– इसमें स्क्रॉल करके नीचे जाएं और Site Setting ऑप्शन पर टैप करें.

– यहां अगर Cookies ऑप्शन ऑफ है तो इसे ऑन कर दें.

– इसके बाद सर्च हिस्ट्री डिलीट होने के बाद भी आपको ब्राउज की गई साइट्स के बारे में पता चल जाएगा.

क्या काम करते हैं Cookies-

Cookies यूजर द्वारा विजिट की गई साइट्स, एक्टिविटी और किसी वेबसाइट पर स्पेंड किए गए समय का इंफॉर्मेशन सेव रखती हैं.

इसके अलावा प्ले स्टोर पर कई ऐसे ऐप्स अवेलेबल हैं जिनसे आप किसी की इंटरनेट सर्च पर नजर रख सकते हैं.

सिस्टम में ऐसे चेक करें Cookies –

Chrome ब्राउजर है तो ये स्टेप्स फॉलो करें-

– Chrome ओपन करके लेफ्ट साइड में मेन्यू पर क्लिक करें.

– इसमें Settings ऑप्शन पर जाएं.

– Settings में जाने के बाद Show advanced settings पर क्लिक करें.

– इसमें Privacy ऑप्शन में Content Settings पर जाएं.

– अब All cookies and site data ऑप्शन पर क्लिक करें. 

Firefox यूज करते हैं तो ये करें-

– Firefor ओपन करने के बाद Tools पर क्लिक करें.

– इसमें Option पर क्लिक करें. इसके बाद Privacy पर जाएं.

– Remove individual cookies पर क्लिक करके आप ब्राउजिंग हिस्ट्री चेक कर सकते हैं. अगर आपका बच्चा कोई एडल्ट कंटेंट देख रहा है तो यहां से आपको उसके बारे में पता चल जाएगा.

विदेशी कंपनियों को निमंत्रण

देशी संस्कृति का रातदिन आलाप करने वाली सरकार ने बहुत से क्षेत्रों में शतप्रतिशत विदेशी पूंजी लगाने की इजाजत दे कर ठीक किया है या नहीं, यह कहना आसान नहीं. यह पक्का है कि देश में नई नौकरियां जरूरी हैं पर देश में उतनी पूंजी नहीं है कि नए कारखानों में पैसा लगाया जा सके. इसलिए अगर विदेशी लोग बाहर से पैसा ला कर लगाते हैं और उद्योग शुरू करते हैं तो नौकरियां मिलेंगी ही.

सवाल उठता है कि ये कंपनियां क्या बनाएंगी, क्या बेचेंगी और किसे बेचेंगी. देश की जनता के पास खर्च करने के लिए पैसे नहीं है तभी तो देश में पूंजी नहीं बन रही है और इसीलिए विदेशी आ रहे हैं. लेकिन ये विदेशी नौकरियां बांटने नहीं, मुनाफा कमाने आ रहे हैं और मुनाफे के लिए जो सामान बेचेंगे वह बिका तो उस जगह आजकल बिक रहा सामान, बिकना बंद हो जाएगा.

यानी होगा यह कि देशी कंपनियों का घटिया, पुरानी तकनीक पर आधारित तैयार माल बिकना बंद हो जाएगा और विदेशी कंपनियों का माल बिकेगा. इस से आर्थिक लाभ किसे होगा? या तो उन्हें जो बढि़या सामान चाहते हैं या उन्हें जो बनाते हैं. देशी कंपनियों के दरवाजे बंद हो जाएंगे, नौकरियां समाप्त हो जाएंगी.

विदेशी कंपनियों के पास इतना पैसा पड़ा है कि भारत के सारे उद्योगधंधे खरीद लें. अंबानी, टाटा, अदानी सरकारी संरक्षण के कारण टिके हैं. देशी कंपनियों के पास अपनी खोजों और तकनीक का अभाव है. उन के पास पुरानी मशीनें हैं, वे भी आयातित और आज भी घटिया काम कर रही हैं. अपनेअपने देशों में घटते बाजार को देख कर कितनी ही कंपनियां भारत में आना चाहती हैं और पैसा लगाना उन के लिए मुश्किल नहीं है, पर यह 1947 के पहले वाला हाल होगा जब हर अच्छे उद्योग अंगरेजों के थे. 1947 में भारत दुनिया का 7वां सब से बड़ा औद्योगिक देश था गुलामी के बावजूद. आज विश्व की तीसरे नंबर की अर्थव्यवस्था है तो विशाल जनसंख्या के कारण, अपनी कुशलता के कारण नहीं.

1947 के पहले जो राग स्वदेशी का लगा था वह इसीलिए लगा था कि मिलें अंगरेजों की थीं. इस में शक नहीं कि उन्हें प्रबंधन की कला आती थी और उन में कुछ नया करने की इच्छा भी थी. हम पुराने ढंग से जी रहे हैं और शायद इसीलिए भारतीय कंपनियों को विदेशों में जगह नहीं मिल रही. जबकि उन के आने के लिए भारत में लाल गलीचा बिछाया जा रहा है.

जिस भी क्षेत्र में विदेशी ब्रैंड आ जाते हैं, यह पक्का है कि उस क्षेत्र के देशी ब्रैंड गायब हो जाते हैं. भारतीय जनता पार्टी और उस से पहले कांगे्रस वही गलती कर रही हैं जो हिंदुस्तानी राजाओं ने की थी- विदेशियों को दावत देना. वैसे, अंगरेजों के शासन में भारत की जनता दुखी थी, यह कहना कठिन है. जो प्रबंधन उन्हें आता था, वह आज 69 साल बाद भी हम नहीं जानते. तभी तो विदेशियों को बुला रहे हैं.         

 

युवा आक्रोश

अमेरिका में रंगभेद विवाद अब फिर तूल पकड़ रहा है. पिछले कई सालों से गोरे पुलिस वाले काले युवाओं को, केवल शक पर, गोली मारते रहे हैं और अमेरिकी जेलें कालों से भरी पड़ी हैं. हर 3 अश्वेतों में से 1 अश्वेत जीवन में कभी न कभी जेल में रह आता है. ‘ब्लैक लाइव्ज मैटर’ आंदोलन तेजी से जोर पकड़ रहा है और लाखों गोरों का सहयोग मिलने के बावजूद गोरे पुलिस वाले हर काले युवा को गुंडा, हत्या का इरादा करने वाला मान रहे हैं.

पुलिस के प्रति बढ़ती घृणा अब गहरे प्रतिशोध की जगह लेने लगी है. एक पूर्व सैनिक ने अकेले डलास शहर में उस समय 5 गोरे पुलिस वालों को गोली मार डाली जब वहां ‘ब्लैक लाइव्ज मैटर’ प्रदर्शन हो रहा था. मिका जेवियर जौनसन पुलिस की गोलियों से मारा गया. पुलिस को शक है कि उस के साथ 3 और अश्वेत आतंकवादी थे जिन्हें गिरफ्तार कर लिया गया है.

अमेरिका में डेढ़ सौ साल पहले हुए गृहयुद्ध में कालों को गुलामी से मुक्ति दिलाई गई थी पर सच यह है कि अमेरिकी समाज ने उसी तरह कालों के साथ व्यवहार किया जैसा हमारे यहां दलितों के साथ होता है. आज भी श्वेत पुलिस वाले हर अश्वेत युवा को पैदाइशी गुंडा मानते हैं और यदि न्याय की मांग करते हुए अश्वेत युवा ने कुछ कह दिया तो उसे गोली मारने से हिचकते नहीं हैं.

अमेरिका में अश्वेतों की आबादी 12.43 फीसदी है पर जेलों में बंद 35 फीसदी कैदी अश्वेत हैं. अमेरिका के 30-39 वर्ष की आयुवर्ग के 1 फीसदी श्वेत जेलों में हैं जबकि अश्वेत 6 फीसदी हैं. 2010 से 2012 के दौरान 1,217 अश्वेत पुलिस अफसरों द्वारा गोली से मारे गए थे. हर 20 लाख युवाओं और किशोरों में से 62 काले पुलिस की गोली के शिकार हुए जबकि हर 20 लाख गोरों में से केवल 3 गोरे ही पुलिस द्वारा मारे गए.

डलास में हुए हत्याकांड ने गोरे-कालों का भेद और ज्यादा गंभीर बना दिया है. वैसे ही दुनिया बारूद के ढेर पर बैठी है, जिहादियों ने जता दिया है कि लोकतांत्रिक अधिकारों से ज्यादा जोर की आवाज तो बंदूकों की होती है. जिस तरह से लाखों युवाओं ने पश्चिमी एशिया में तकनीकी आधुनिक सुविधाओं के बदले जान को जोखिम में डालने वाले जिहादी कैरियर को खुशीखुशी और अकारण अपनाया है उस से साफ है कि आज का युवा इस समाज से बुरी तरह खफा है.

भारत में कश्मीर में बुरहान वानी की सैनिकों द्वारा हत्या किए जाने के बाद जो उफान आया है उस की हवा वही है जो पश्चिमी एशिया में है या अमेरिका में है. दुनिया की बुढ़ाती पीढ़ी आज की नई पीढ़ी का रोष नहीं समझ पा रही. उस पीढ़ी ने पैसे पर भी कब्जा कर रखा है और पावर पर भी. अब एक और युवा क्रांति की लपटें उठने लगीं हैं अलगअलग देशों में अलगअलग तरह से.

युवाओं को सही पाठ पढ़ाने वाला अब कोई नहीं बचा. जो समाजसेवा कर सकते थे, ऊंचे कैरियर के चक्कर में वे कंपनियों में जा बैठे हैं. पैसा, बड़े मकान, बड़ी गाडि़यां कुछ के जीवन के ऐसे अंग बन गए हैं कि घर के बाहर उग रही जहरीली घास उन्हें दिख ही नहीं रही, हिंसा का फैलता व्यापार उन्हें महसूस नहीं हो रहा. उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर से ले कर डलास तक बात एक ही है. युवाआक्रोश काबू से बाहर है.

नरेंद्र मोदी: सत्तर चूहे खाकर बिल्ली चली हज की ओर

भाजपा चुनावों के जरिये सत्ता पर एकाधिकार चाहती है. उसके दावे बड़े हैं. उसके इरादे पक्के हैं. उसने उन तकतों से तालमेल भी बैठा लिया है, जो सरकारें बनाती हैं और जिनके नाम से सरकारें बनायी जाती हैं, उस आम जनता के लिये उसके पास आकर्षक नारें हैं, जिसमें फंसाने का काम प्रचारतंत्र करता है. नायक के रूप में उसने नरेंद्र मोदी को खड़ा कर लिया है. सत्तर चूहे खाने के बाद जिसे हज की जरूरत भी नहीं पड़ी. बिल्ली को बाघ मान लिया गया. भाजपा की ये बड़ी सफलता है, जिसे कांग्रेस की मनमोहन सिंह सरकार ने सजा कर प्लेट में दिया.

2014 में उसने लोकसभा चुनाव में बड़ी सफलता हासिल की. 2015 में बिहार के बाद 2016 में पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव में उसे बिहार में शिकस्त के बाद, पश्चिम बंगाल, पाण्डुचेरी, केरल और तमिलनाडू में भी करारी मात मिली, मगर असम के चुनाव में मिली सफलता को उसने अपनी सफलता और जन स्वीकृति का ऐसा जरिया बनाया, इतनी खुशियां बांटी कि देश की आम जनता, शायद धोखे में आ गयी है, और 2017 में होने वो उत्तर प्रदेश सहित अन्य चार राज्यों में चुनावों में सफलता की घोषणा वह अभी से करने लगी है. उसके हौसले बुलंद हैं. उसके दावे बड़े हैं. वह उत्तर प्रदेश को निशाने पर ले चुकी है, जहां सपा की सरकार है. बसपा की मजबूत स्थिति है और कांग्रेस भी है. वामदलों के साथ में खास कुछ नहीं है. बिहार चुनाव में भाजपा की हार के बाद जिस राजनीतिक विकल्प की बातें हुईं थी, वह अभी साफ नहीं है. कह सकते हैं, कि वह है.

लेकिन भाजपा कांग्रेस को समाप्त करने पर तुली हुई है. ‘कांग्रेस मुक्त भारत‘ उसका नारा है. वह मान कर चल रही है, कि यदि कांग्रेस नहीं है, तो राष्ट्रीय स्तर पर उसके लिये दलगत राजनीतिक चुनौती नहीं है.

भाजपा जिन छुपे और खुले हुए मुद्दों के तहत 2014 का लोकसभा चुनाव जीत चुकी है, उन्हीं मुद्दों के तहत ‘मिशन 2017‘ वह पूरा करना चाहती है. मिशन 2017 उसके लिये उत्तर प्रदेश में भाजपा की सरकार है, मगर यह उससे कहीं ज्यादा है, वह मान कर चल रही है, कि उत्तर प्रदेश में सरकार का मामला मतलब 2019 के आम चुनाव में जीत की गारंटी है. पंजाब का चुनाव भी, उसके इस मिशन का हिस्सा है. वह अपनी उपलब्धियों को गिनाने और बताने में इतनी मशगूल है कि वह जनसमस्याओं का समाधान करने के बजाये उसे भुलावा देने और भटकाने में लग गयी है. उसने हिन्दुत्व के घातक मुद्दे को चुनाव में रामनामी ओढ़ाना तय कर लिया है. विकास के साथ रामनामी भी अहम मुद्दा है.

12, 13 जून को इलाहाबाद में भाजपा कार्यकारिणी की बैठक और सभायें हुईं. अमित शाह और तमाम मंत्री-संतरी, जिसे जो कहना चाहिये था, उन्होंने वही कहा. मीडिया को जैसे रिपोर्टिंग करनी चाहिये थी, उन्होंने वैसी ही रिपोर्टिंग की. भाजपा नमोवादी हो गयी. उत्तर प्रदेश 2017 का चुनाव मोदी के नाम पर लड़ना तय हो गया.

नरेंद्र मोदी को, पार्टी और सरकार के कंधों पर चढ़ा दिया गया. ‘हाथी-घोड़ा पालकी, जय कन्हैया लाल की.‘ चुनाव में माहिर हो गये भाजपा अध्यक्ष अमित शाह, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बैठक में शामिल किसी भी मंत्री ने देश की वस्तु स्थिति के बारे में कुछ नहीं कहा. बढ़ती हुई महंगाई, भूखमरी, सूखे की स्थिति, तेजी से बढ़ती सामाजिक एवं आर्थिक असमानताओं के बारे में कुछ नहीं कहा. वो मोदी के दो साल की तस्वीरें चिपका कर एक-दूसरे को आईना की तरह दिखाते रहे. ऐसी तस्वीरें दिखाते रहे जिसमें मोदी का कद तो बढ़ता है, मगर देश और आवाम गायब होती जा रही है. मोदी चुनावी चेहरा बन गये हैं. सरकारी खर्च पर प्रचार कार्य जारी है.

भाजपा उत्तर प्रदेश में 2014 के आम चुनाव परिणाम की तरह 2017 में प्रदेश चुनाव परिणाम के सपने पाल रही है. वह सोच रही है, कि 2019 का ‘गेट पास‘ उसे मिल जायेगा. चुनाव वह अकेले ही लड़ने के मूड़ में दिख रही है. निशाने पर वैसे तो सपा और बसपा है, मगर समीकरण अभी बदलेगा. सभी शातिर दिमागों की तेजाबी होगी. नरेंद्र मोदी अपने को करामाती दिखाने में लगे रहे. संघ की फौज को तैयार किया जा रहा है. धर्म और जाति के गोटियों पर विकास का बर्क चढ़ाया जा रहा है. आने वाले कल में राम मंदिर के निर्माण और ‘देशद्रोही बनाम देशभक्ति‘ के मुद्दे को तरजीह मिलेगी.

भाजपा की सफलता इस बात पर निर्भर करती है, कि वह प्रदेश की आम जनता को बरगलाने में कितना सफल होती है. कमोबेश यही स्थिति अन्य राजनीतिक दलों के बारे में भी कही जा सकती है. सपा जो है उसे बचाने में लगी है. बसपा समीकरण मे संभावनायें तलाश सकती है, जिसके वोट बैंक में घुसपैठ हो रही है. कांग्रेस और तीसरा मोर्चा के माथे पर गहरी शिकन है.

अनलिमिटेड कहानियां-आर्टिकल पढ़ने के लिएसब्सक्राइब करें